उत्तर प्रदेश में रामपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को चुनाव आचार संहिता उल्लंघन अौर मार्ग अवरुद्ध करने के मामले में आज बरी कर दिया। श्री नकवी को इस मामले में चार माह पहले रामपुर की ही एक निचली अदालत ने एक वर्ष का कारावास और चार हजार रुपये का जुर्माना सुनाया था।
अभियोजन के अनुसार वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर जिले के पटवाई थाने में हंगामा करने और थाने के सामने शाहबाद-रामपुर मार्ग जाम करने के आरोप में श्री नकवी समेत 23 भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध मामले दर्ज किये गये थे। उनके विरुद्ध चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 143, 341,342 और अन्य आरोपों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के बाद पुलिस ने श्री नकवी के अलावा 19 भाजपा नेताओं के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। एडिशनल सिविल जज(सीनियर डिविजन)की अदालत ने इस मामले की सुनवाई के बाद 14 जनवरी 2015 को श्री नकवी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा और चार हजार का अर्थदंड़ सुनाया था।
श्री नकवी ने अदालत के इस फैसले के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीके गोयल की अदालत में अपील की थी जहां इस मामले में नौ मई को दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो गई थी।न्यायाधीश गोयल ने श्री नकवी को सभी आरोपों से बरी करते हुए उन्हें सजा से मुक्त कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्याम लाल ने कहा कि उन्होंने न्यायालय के समक्ष उन पत्रावलियों को प्रस्तुत किया था जिसमें श्री नकवी के विरुद्ध आरोपों की पुष्टि नहीं होती थी।श्री लाल ने बताया कि आरोपपत्र में जिस मार्ग अवरुद्ध का जिक्र किया गया है,अभियोजन पक्ष उसे प्रमाणित नहीं किया जा सका।इसी को आधार मानते हुए न्यायालय ने श्री नकवी को दोषमुक्त करने का फैसला सुना दिया है।
श्री लाल ने कहा इस मामले में श्री नकवी के साथ 19 भाजपा कार्यकर्ताओं को भी निचली अदालत ने सजा सुनायी थी।वे मामले भी इसी श्रेणी में तो हैं,लेकिन अलग-अलग हैं लिहाजा उन भाजपा कार्यकर्ताओं को भी आज के फैसले का लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है। श्री नकवी ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए इसे सत्य की जीत करार दिया है।
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