मुख्यमंत्री हरीश के हिंदुत्व की ओर झुकाव की काट तलाश रहा भाजपा हाईकमान, अब सतपाल महाराज के नाम पर किया जा रहा मंथन
- पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल के देशभर में फैले हैं भक्त, भाजपा के तीन दिग्गजों को भेजा जा चुका है लोस
- अन्य नेताओं में कोई करिश्मा नहीं आ रहा नजर
देहरादून,15 मई। मुख्यमंत्री हरीश रावत के हिंदुत्व की ओर बढ़ते कदमों से भाजपा हाईकमान चैकन्ना हो गया है। माना जा रहा है कि इसकी काट के लिए पार्टी हाईकमान किसी धार्मिक छवि वाले नेता की तलाश में जुटा है। सूत्रों का कहना है कि हाईकमान की निगाहें सतपाल महाराज पर टिकीं हैं। अगर सब ठीक रहा तो महाराज को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान सौंपी जा सकती है। मुख्यमंत्री हरीश रावत पिछले कुछ समय से हिंदुत्व वाली बातों को खासी तरजीह दे रहे हैं। चारधाम यात्रा से सीएम ने खुद को जोड़ा तो सूबे के अन्य धार्मिक स्थलों की भी सुध ली। हज यात्रा की तर्ज पर पहली आदि कैलास की यात्रा के लिए अनुदान देने की घोषणा की तो कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए 50 करोड़ रुपये दिए। इतना ही नहीं, हरिद्वार में कैबिनेट बैठक के बहाने संत समाज के साथ लंबी बातचीत की। बताया जा रहा है कि सीएम की इस सियासत से भाजपा के कान खड़े हो गए हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की कवायद पहले से ही चल रही थी। कई नामों पर हाईकमान ने विचार किया। लेकिन चुनाव में हरीश की सियासी चालों का मुकाबला करने वाले नेता की तलाश पूरी नहीं हो सकती। पार्टी की दिक्कत यह है कि तीन पूर्व सीएम बीसी खंड़ूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी और डा, रमेश पोखरियाल निशंक की आपस में ट्यूनिंग बनती नहीं है। कभी कोई किसी से हाथ मिलाकर तीसरे को सियासी पटखनी देता है तो कुछ माह दुश्मन ही दोस्त की भूमिका में आ जाता है। बताया जा रहा है कि भाजपा हाईकमान चुनावी बेला में पार्टी के अंदर किसी तरह का घमासान नहीं चाहता है। सूत्रों ने बताया कि पार्टी के अंदरूनी हालात और सीएम की सियासी चालों के बीच हाईकमान ने अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज में संभावनाएं तलाशन शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि पार्टी इस बात पर मंथन कर रही है कि महाराज किस हद तक हरीश की सियायत का मुकाबला कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि महाराज के पक्ष में सबसे बड़ा आधार उनकी धर्मगुरु की छवि को माना जा रहा है। महाराज के देश-विदेश में अनुयायियों की बहुतायत है। वैसे भी महाराज के अनुज भोले महाराज से कांग्रेस की नजदीकियां किसी से छुपी नहीं हैं। भाजपा इन्हीं बातों के मद्देनजर महाराज की प्रदेश अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों ने बताया कि हाईकमान इस बात पर भी विचार कर रही है कि महाराज को अध्यक्ष बनाने से पार्टी में किसी तरह का विरोध तो नहीं झेलना होगा। माना जा रहा है कि अगर हाईकमान को माहौल अनुकूल नजर आया तो महाराज को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी जा सकती है।
गांववासी है संघ की पसंद
भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहनसिंह रावत गांववासी आरएसएस की पहली पसंद बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि गांववासी खांटी संघी है और प्रदेश भाजपा में उनकी पकड़ है। अमित शाह के दून दौरे के वक्त भले ही प्रदेश भाजपा ने उन्हें कार्यक्रम में नहीं बुलाया। लेकिन संघ की चली तो कमान गांववासी को उसी तरह से दी जा सकती है. जैसे कि उत्तर प्रदेश में रामप्रकाश गुप्ता अचानक मुख्यमंत्री की कुर्सी पा गए थे।
युवाओं की बात हुई तो धामी
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं पर फोकस कर रहे हैं। इस प्रदेश में भी अगर हाईकमान ने किसी युवा कंधे को कमान सौंपने का मन बनाया तो खटीमा विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुष्कर सिंह धामी का नाम सबसे आगे रहने वाला है। वैसे प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए इस वक्त जिन नामों की चर्चा हो रही है, उसमें भी धामी का नाम शामिल है।
शराब छोड़ो, ऊपर तक देता हूं पैसा, अवैध शराब पकड़ने वाले अफसर को इस अंदाज में दी धमकी
- ऋषिकेश में धड़ल्ले से बेची जा रही देशी शराब, प्रवर्तन दल ने दो दिन में पकड़ा 31 पेटी माल
- सीएम दफ्तर से मिले थे छापामारी के निर्देश
देहरादून,15 मई(निस)। धर्मनगरी ऋषिकेश में देशी शराब की सरेआम बिक्री की जा रही है। सीएम दफ्तर के निर्देश पर प्रवर्तन दल ने छापामारी की तो दो दिन में देशी शराब की 31 पेटियां बरामद की गईं हैं। इससे बौखलाए ठेकेदार के आदमी ने दफ्तर में घुसकर सहायक आयुक्त को माल छोड़ने के लिए धमकाया। मना करने पर कहा गया कि मैं ऊपर तक पैसा देता हूं। तुम्हारा क्या हश्र होगा, इसे आसानी से समझ सकते हो। सहायक आयुक्त ने इस कथित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। यूं तो ऋषिकेश में कच्ची शराब की बिक्री होती रहती है। लेकिन यात्रा सीजन में इसमें और भी तेजी आ गई है। प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के एक पदाधिकारी ने इस मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री दफ्तर में की थी। वहां से प्रवर्तन दल के सहायक आयुक्त विवेक सोनकिया को इस बारे में एक्शन लेने को कहा गया था। इस टीम ने पिछले दो दिनों में ऋषिकेश शहर के गोविंद नगर, ट्रांसपोर्ट नगर, यात्रा बस अड्डा, जेजे ग्लास, चंद्रभागा, मायाकुंड और जाटव मोहल्ला समेत अन्य स्थानों पर छापामारी की। इस दौरान टीम को देशी शराब की 31 पेटियां मिलीं। अहम बात यह भी है कि इस देशी शराब की बिक्री के काम में महिलाएं भी शामिल पाईं गईं हैं। इतनी ज्यादा मात्रा में माल पकड़ने से रायवाला देशी शराब की दुकान का कथित ठेकेदार राजीव उर्फ पुजारी बौखला गया। यह व्यक्ति अपने कुछ साथियों के साथ आबकारी विभाग के ऋषिकेश तहसील परिसर स्थित दफ्तर में पहुंचा। इस व्यक्ति ने सहायक आयुक्त से कहा माल उसका है। तत्काल छोड़ दो। सहायक आयुक्त ने ऐसा करने से मना कर दिया। इस पर इस पुजारी नाम के व्यक्ति ने कहा कि शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि हम लोग ऊपर तक पैसा देते हैं। पुलिस या आबकारी विभाग के सारे बड़े अफसरों से उसके ताल्लुकात हैं। बताओ किससे फोन करवाना है। इसके बाद भी सहायक आयुक्त ने इस व्यक्ति की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया तो वह धमकियां देता हुआ फरार गया। सहायक आयुक्त की ओर से इस पुजारी नाम के व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
रायवाला से ही ऋषिकेश जाती है शराब
ऋषिकेश में बिकने वाली अधिकांश शराब रायवाला के ठेके से ही जाती है। इसके अलावा कुछ शराब रानीपोखरी के ठेके से भी ले जाई जाती है। बताया जा रहा है कि ठेके से बिक्री कम होती है। लेकिन ऋषिकेश में दो नंबर से शराब की बिक्री करके पैसे कमाए जाते हैं। इसकी जानकारी सभी को है। लेकिन पुलिस या आबकारी महकमा इस ओर से जानबूझ कर आंखें बंद किए रहता है।
ठेकेदार कोई और काम कर रहा कोई और
इस रायवाला ठेके की कहानी भी अजीब है। लाटरी में ठेका भले ही किसी के नाम निकलें। लेकिन इस पर कब्जा बरेली निवासी एक शराब कारोबारी का ही रहता है। आबकारी विभाग ने कभी यह जानने की कोशिश नहीं कि क्या ठेकेदार की हैसियत शराब के कारोबार में इतना मोटा पैसा लगाने की है भी या नहीं। यह भी इस बात की ओर इशारा करता है कि सब कुछ मिलीभगत से हो रहा है।
वाणिज्यकर अफसर ने एक स्टोन क्रशर को नियमों के विपरीत जारी किया मान्यता प्रमाणपत्र, सात साल में लगाया करोड़ों के राजस्व का चूना
- प्रमाणपत्र ने डीजल खरीद में मिलती रही भारी छूट, मामला खुला तो निरस्त कर दिया गया प्रमाणपत्र
- लालकुआं स्टोन क्रशर ने नहीं की गई कोई वसूली, दोषी अफसर पदोन्नति पाकर बने अपर आयुक्त
- सूचना अधिकार से मिली जानकारी से खुला खेल
देहरादून,15 मई(निस)। वाणिज्यकर विभाग के अफसर ने एक स्टोन क्रशर स्वामी से सांठगांठ करके सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगा दिया। क्रशर स्वामी इसी आदेश के जरिए सात साल तक डीजल व अन्य सामान की खरीद में कर चोरी करता रहा। मामला खुला तो आदेश निरस्त कर दिया गया। लेकिन न तो स्टोन क्रशर से कोई रिकवरी की गई और न ही अफसर के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया। यह अफसर पदोन्नति पाकर विभाग में अपर आयुक्त जरूर बन गए। वाणिज्यकर विभाग निर्माता इकाइयों को वैट में छूट के लिए एक मान्यता प्रमाणपत्र जारी करता है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर इकाई कच्चे माल और निर्माण में प्रयोग होने वाले अन्य सामान की खरीद में वैट पर छूट का लाभ लेती है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर डीजल की खरीद में वैट 20 फीसदी की बजाय एक से दो फीसदी तक ही लगता है। इसी नियम का लाभ रुद्रपुर के लालकुआं स्टोन क्रशर को देकर करोड़ों के राजस्व का चूना सरकार को लगाया गया है। सूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार रुद्र्पुर में वाणिज्यकर विभाग के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर पीयूष कुमार ने लालकुआं स्टोन क्रशर को 28 सितंबर-06 को मान्यता प्रमाणपत्र सदैव के लिए जारी कर दिया। इसके जारी होने के बाद क्रशर को डीजल समेत तमाम अन्य वस्तुओं की खरीद पर वैट में छूट मिलना शुरू हो गई। वैट में छूट का यह सिलसिला जून-13 तक बदस्तूर चलता रहा है। बताया जा रहा है कि बाद में आए अफसर को इस प्रमाणपत्र के बारे में जानकारी हुई तो उसे निरस्त कर दिया गया। अहम बात यह है कि यह प्रमाणपत्र अवैध रूप से जारी किया गया। इसे जारी करने का अधिकार सहायक आयुक्त के पास होता है। लेकिन डिप्टी कमिश्नर पीयूष ने इसे खुद ही जारी कर दिया। इससे भी ज्यादा गंभीर बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने लालकुआं स्टोन क्रशर बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के वाद में साफ कर दिया है कि स्टोन क्रशर को निर्माता इकाई नहीं माना जा सकता। इसी फैसले के आधार पर उस समय स्टोन क्रशर को जारी किया गया मान्यता प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद भी डिप्टी कमिश्नर ने इसी स्टोन क्रशर को मान्यता प्रमाणपत्र जारी करके सरकार को सात सालों में करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगवा दिया। सूत्रों ने बताया कि स्टोन क्रशर ने सबसे ज्यादा कर का नुकसान डीजल की खरीद में किया है। इस मान्यता प्रमाणपत्र की वजह से डीजल की खरीद पर स्टोन क्रशर को 20 फीसदी के स्थान पर एक से दो फीसदी ही कर देना पड़ा। बताया जा रहा है कि डीजल की खरीद केवल जनरेटर आदि चलाने के लिए ही की जा सकती है। लेकिन भारी मात्रा में डीजल की खरीद साफ इशारा करती है कि इसका इस्तेमाल माल ढोने में भी किया गया होगा। बताया जा रहा है कि अगर 2006 से 2013 के बीच इस स्टोन क्रशर द्वारा खरीदे गए डीजल की जांच की जाए तो साफ होगा कि किस तरह से मिलीभगत करके राजस्व का चूना लगाया गया है। इस मामल में अफसरों ने 2013 में स्टोन क्रशर को जारी मान्यता प्रमाणपत्र निरस्त तो कर दिया। लेकिन स्टोन क्रशर से किसी भी तरह की कोई वसूली नहीं की गई। इतना ही नहीं विभाग को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि पहुंचाने वाले अफसर अब विभाग के अपर आयुक्त भी बन गए हैं। सूत्रों का कहना है कि अगर मामले की ईमानदारी से जांच की जाए तो स्टोन क्रशर से करोड़ों की वसूली हो सकती है।
रूबी प्रकरणः नहीं होगी सीबीआई जांच, मुख्यमंत्री हरीश ने ठुकराई डीजीपी की सिफारिश
- पुलिस की जांच सही न होने का दिया गया तर्क, आईएएस लाबी के दबाव में फैसला लेने की चर्चा
देहरादून,15 मई(निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू की ओर से की गई रूबी मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश को ठुकरा दिया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का मानना है कि पुलिस ने इस मामले की जांच सहीं ढंग से नहीं की है। इधर चर्चा इस बात की भी हो रही है कि मुख्यमंत्री ने आईएएस लाबी के दबाव में सीबीआई जांच की सिफारिश को ठुकराया है। लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी मसूरी में रूबी चैधरी नामक महिला की कथित घुसपैठ का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले की जांच पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने कथित रूप से गठित एक एसआईटी के हवाले की थी। डेढ़ माह की कवायद के बाद भी एसआईटी मामले की तह तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद डीजीपी ने मामले की जांच से हाथ खड़ा करते हुए सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। राज्य के गृह मंत्रालय ने इस सिफारिश के बारे में डीजीपी से तर्क जानने की कोशिश की। इस पर कहा गया कि यह बड़ा मामला है। लिहाजा जांच सीबीआई से कराई जाए। सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय डीजीपी के तर्कों से सहमत नहीं था। इसके बाद मामला मुख्यमंत्री हरीश रावत के संज्ञान में लाया गया। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने डीजीपी की सिफारिश को खारिज कर दिया है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि पुलिस ने जांच सही ढंग से नहीं की। लिहाजा सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। अब पुलिस को ही इस मामले की जांच करनी होगी। इधर सूत्रों का कहना है कि भले ही सीएम के स्तर से जांच सही ढंग से न होने की बात की गई है। लेकिन अंदरखाने कहीं न कहीं यह फैसला आईएएस लाबी के दबाव में लिया गया है। बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता से जांच हो तो एलबीएस अकादमी में तैनात कुछ आईएएस अफसरों पर भी आंच आ सकती है। अगर जांच उत्तराखंड पुलिस के पास ही रहेगी तो यहां के पुलिस अफसर किसी न किसी तरह दबाव में रहेंगे और किसी बड़े को जांच के दायरे में लेने से पहले सौ बार सभी पहलुओं पर विचार करेंगे। इसी वजह से आईएएस लाबी ने कोशिश करके सीबीआई जांच की सिफारिश को रद्द करवा दिया है।
भिलंगना हाइड्रो प्रोजैक्ट प्रभावितों ने अपर आयुक्त का सुनाई समस्या
देहरादून,15 मई(निस)। भिलंगना हाइड्रो पावर प्रोजैक्ट से प्रभावितों हुई ग्राम पंचायतों का एक शिष्टमण्डल विधायक भीमलाल आर्य के नेतृत्व में प्रभावितों की समस्याओं के समाधान हेतु अपर आयुक्त गढवाल मण्डल हरक सिंह रावत के साथ कैम्प कार्यालय में बैठक कर समस्याओं से अवगत कराया। बैठक में विधायक घनसाली भीम लाल आर्य ने बताया कि भिंलगना हाईड्रो पावर प्रोजैक्ट लि0 द्वारा प्रभावित ग्राम पंचायतों के साथ जो अनुबन्ध एवं समझौता किया गया था, कम्पनी द्वारा उसके अनुसार कार्य नही किया जा रहा है। उन्होने कहा कि कम्पनी द्वारा किसानों की अधिग्रहण की गयी भूमि का मुआवजा एवं प्रोजैक्ट द्वारा जो सड़के, सिंचाई नहरे, खेत, मन्दिर, शमशान घाट क्षतिग्रस्त हुए है उनके मरम्मत कराने का कार्य ठीक प्रकार से नही किया जा रहा है तथा प्रभावितों के परिवार के सदस्यों को रोजगार उपलब्ध नही कराया जा रहा है। उन्होने यह भी अवगत कराया है कि मुख्य मार्ग घुतु घंसाली मोटर मार्ग से सम्पर्क मोटर मार्ग कटवाड़ नामक तोड़ से ग्राम वीना तक चार किलो मीटर सड़क निर्माण की भी मांग की गयी तथा क्षेत्र में प्रर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति भी नही की जा रही है। उन्होने बताया कि इस सम्बन्ध में उनके द्वारा मा0 मुख्यमंत्री से भी भेट कर प्रभावितों की समस्याओं से भी अवगत कराया गया। जिस पर मा0 मुख्यमंत्री द्वारा आश्वस्त किया गया है कि प्रभावितों का जो भी भिलंगना हाइड्रो पावर प्रोजैक्ट से जो भी क्षति व नुकसान हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति कम्पनी द्वारा कराई जाएगी। जिसके लिए घनसाली विधायक श्री भीमलाल आर्य ने मा0 मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड का आभार व्यक्त किया। उन्होने कहा कि मा मुख्यमंत्री के आदेशों के अनुपालन में अपर आयुक्त गढवाल द्वारा यह बैठक बुलाई गयी है। बैठक में अपर आयुक्त हरक सिंह रावत ने भिलंगना हाईड्रो पावर प्रोजैक्ट से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रभावित ग्रामवासियों की जो भूमि अधिग्रहण की गयी है तथा उसका उन्हे अभी तक उचित मुआवजा न दिया गया है तो उन्हे तत्काल मुआवजा उपलब्ध करा दें। उन्होने यह भी निर्देश दिये है कि निर्माण कार्य से जो क्षेत्र की सड़के, सिंचाई नहरे, पुल व झुला पुल, गावं के मन्दिर एवं शमशान घाट क्षतिग्रस्त हुए है उनका पुर्ननिर्माण एवं सौन्दर्यकरण करना सुनिश्चत करें तथा कम्पनी द्वारा प्रभावितों के साथ हुए अनुबन्ध के अनुसार बेराजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। उन्होने कहा कि प्रभावित ग्राम थाती, वीना, मलेथा, चन्दाल, चक्र एवं पुजार गांव के प्रभावितों की जो भी समस्याएं एवं शिकायतें है उनका निराकरण समय पर कराना सुनिश्चित करें। उन्होने यह भी अवगत कराया है कि गढवाल मण्डल क्षेत्र में जितने भी पावर प्रोजैक्ट कार्य कर रहें है उनका सम्बन्धित उप जिलाधिकारियों से निरीक्षण कराया जाएगा तथा इन पावर प्रोजैक्ट से जो भी ग्राम पंचायतें एवं क्षेत्रवासी प्रभावित हुए हैं उन्हे उचित मुआवजा दिया गया है की नही इस सम्बन्ध में वे अपनी आख्या प्रस्तुत करेंगे ताकि प्रभावितों को सम्बन्धित कम्पनियों द्वारा किये गये अनुबन्ध के अनुसार उचित मुआवजा देने तथा प्रभावित क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जा सके। बैठक में कम्पनी के हाईड्रो प्रोजैक्ट के बी.पी सिंह, तनवीर अखक्तर, प्रधान ग्राम चक्र पे्रम सिंह गुंसाई, ग्राम प्रधान भलगांव परमानन्द भट्ट, ग्राम प्रधान थाती नत्थीलाल, ग्राम प्रधान चन्दला गजेन्द्र, भगवती प्रसाद उनियाल, विनयराम उनियाल, शम्भू प्रसाद उनियाल, हरिप्रसाद उनियाल उपस्थित थे।
यूपीसीएल एवं सी.एस.सी.-एस.पी.वी. के मध्य अनुबंध आज
देहरादून,15 मई(निस)। राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं के लिये विद्युत बिलों को समय पर जमा किये जाने एवं बिल संग्रह केन्द्रों तक उपभोक्ता की पहुंच को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाये जाने के उद्देश्य से सुभाष कुमार, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग द्वारा यूपीसीएल को ई-गवर्नेंस आॅफ इण्डिया लिमि0 के अंतर्गत संचालित काॅमन सर्विस सेन्टर्स (सी.एस.सी.-एस.पी.वी.) के साथ समन्वय स्थापित कर विद्युत बिल संग्रह प्रणाली को सुदृृढ़ किये जाने एवं इस सुविधा का राज्य में विस्तार किये जाने के निर्देश पूर्व मंें दिये गये थे। उक्त क्रम मेें वर्तमान तक हुई प्रगति की समीक्षा हेतु सुभाष कुमार, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग द्वारा शुक्रवार को एक बैठक आहूत की गई। उक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 16 मई को मुख्य अभियन्ता (वाणिज्यिक), यूपीसीएल एवं राज्य प्रमुख (सी.एस.सी.-एस.पी.वी.) द्वारा संयुक्त रूप से यूपीसीएल एवं सी.एस.सी.-एस.पी.वी. के मध्य अनुबंध को अन्तिम रूप दिया जायेगा तथा आगामी सप्ताह तक यूपीसीएल एवं सी.एस.सी.-एस.पी.वी. के अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा अनुबंध पर हस्ताक्षर किये जायेंगे। अनुबंध सम्पादित होने के उपरांत प्रारम्भिक परीक्षण के पश्चात् काॅमन सर्विस सेन्टर्स (सी.एस.सी.-एस.पी.वी.) के माध्यम से विद्युत बिल जमा करने की सुविधा आम विद्युत उपभोक्ताओं के लिये उपलब्ध रहेगी। यूपीसीएल द्वारा अवगत कराया गया कि बिल संग्रह केन्द्रों में वर्तमान नेटवर्क के अंतर्गत अभी प्रत्येक ब्लाॅक में केवल एक ही संग्रह केन्द्र उपलब्ध है। इस प्रकार राज्य में लगभग 95 संग्रह केन्द्र हैं तथा सी.एस.सी.-एस.पी.वी. के प्रतिनिधि द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान में 2000 सी.एस.सी. केन्द्र क्रियाशील हैं। इस प्रकार दोनों संस्थाओं के मध्य सम्पन्न होनेवाले उक्त अनुबंध के उपरांत बिल संग्रह केन्द्रों के नेटवर्क का व्यापक विस्तार स्वतः ही हो जायेगा। सी.एस.सी.-एस.पी.वी. के प्रतिनिधि द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि वर्तमान में प्रत्येक 06 गांवों के लिये 01 काॅमन सर्विस केन्द्र उपलब्ध है। विद्युत बिल जमा किये जाने की सेवा को सी.एस.सी. के इस नेटवर्क से जोड़े जाने से दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें विद्युत बिल जमा करने के लिये लंबी दूरिया तय करनी पड़ती थी। बैठक में एस0एस0 यादव, प्रबन्ध निदेशक, यूपीसीएल, नीरज सती, सचिव, उविनिआ, कृष्ण कुमार, राज्य प्रमुख (सी.एस.सी.-एस.पी.वी.), प्रभात डिमरी, निदेशक (तकनीकी), उविनिआ, एस0के0 टम्टा, मुख्य अभियन्ता (वाणिज्यिक), यूपीसीएल एवं संजय माथुर, कंसंलटेंट, ट्रेजरीज पेंशन एवं हकदारी द्वारा भाग लिया गया।
उपलब्धियों भरा रहा 108 सेवा का सात साल का सफरः नौटियाल
देहरादून,15 मई(निस)। उत्तराखंड में 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के सफर को सात साल पूरे हो गए हैं। तत्कालीन प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य की दिशा में शुरू की गई इस अनूठी पहल को स्थापित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इंडियन मीडिया सेंटर के अध्यक्ष एवं 108 सेवा के प्रथम पूर्व प्राथमिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (अनूप नौटियाल का कहना है कि 108 सेवा का बीते सात साल का कार्यकाल बेहद उपलब्धियों भरा रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश की विपरीत भौगोलिक परिस्थतियों में भी एक काॅल पर इस सेवा का पहुंचना इस सेवा से जुड़े कर्मियांे की मुस्तैदी को समझने के लिए काफी है। हांलाकि कुछ समय पहले सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते इस सेवा का पैसा न मिलने से 108 सेवा के पहिए थमने जैसे हालात पैदा कर दिए गए थे। इस दौरान 108 सेवा चार दिन नहीं चली तो पूरे राज्य में मरीजों की जान पर बन आई थी। मामला सुर्खियों में आने पर सरकार ने इस सेवा की महत्ता से समझा और बिगड़ते हालातों को संभाला। प्रदेश के वर्तमान स्वास्थ्य हालातों को देखते हुए सरकार को इस सेवा की निरंतरता को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना होगा। अनूप नौटियाल ने बताया कि प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य के महत्व को समझते हुए 15 मई 2008 को तत्कालीन सरकार ने 108 सेवा की शुरूआत की थी। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में प्रदेश की जनता को इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध करवाना था। अपने शुरूआती दौर में ही कार्यशैली और त्वरित उपलब्धता के चलते यह सेवा लोगों के दिलों में अपनी एक विशेष जगह बनाने में कामयाब हुई। 108 सेवा के दक्ष कर्मियों ने प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति की नींव रखने के साथ ईमानदारी से अपने कार्य को अंजाम देने की मिसाल कायम की। इस दौर को स्वास्थ्य की दिशा में बेहद क्रांतिकारी दौर कहना गलत न होगा। अनूप नौटियाल का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य हालातों की बेहतरी के लिए इस सेवा की मजबूती बेहद जरूरी है। इस दिशा में सरकार को 108 सेवा के संचालन को प्राथमिकता देनी होगी जिससे आम जनता का विश्वास सरकार के प्रति बना रहे। सरकार को 108 सेवा की उपलब्धियों को समझते हुए इसकी उपयोगिता को और अधिक अमल में लाने की दिशा में सोचना होगा। आपातकालीन सेवा के सफलतम तंत्र की उपयोगिता का इस्तेमाल प्रदेश के भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पूर्व राहत एवं बचाव कार्यों के प्रशिक्षण एवं विश्व स्तरीय काॅल सेवा के रूप में किया जाना जाना निश्चय ही बेहद कारगर साबित होगा। अनूप नौटियाल ने कहा है कि 108 सेवा के प्रदेश में उपलब्धियों भरे आठ साल के कार्यकाल और इस सेवा से जुड़े कर्मियों की विश्वसनीय कार्यशैली और उनके जजबे के लिए हम सभी प्रदेशवासी उनके दिल से शुक्रगुजार हैं।
कांग्रेस ही अल्पसंख्यकों की सच्ची हितैषीः इंदिरा
देहरादून,15 मई(निस)। कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष कारी मोहम्मद बाबर अली की सरपरस्ती में हल्द्वानी शहर की अल्पसंख्यक इकाई का गठन कर दिया गया है। नवगठित कार्यकारिणी के लोगों द्वारा वित्त मंत्री डा. इन्दिरा हृदयेश से उनके आवास संकलन में मुलाकात कर खुशी का इजहार किया।
शहर इकाई के अध्यक्ष मंजूर अहमद बेग ने कहा कि डा. हृदयेश के नेतृत्व में हल्द्वानी विधानसभा ही नहीं बल्कि पूरा सूबा तरक्की के रास्ते पर है। अपनी बात रखते हुए कारी मौहम्मद बाबर ने कहा कि कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है, जो गरीबों खासतौर पर अल्पसंख्यक समाज का विशेष ध्यान रखती है। यह पार्टी विकास करने में माहिर है। इस पार्टी द्वारा झूठे वायदे जनता से नहीं किये जाते हैं। यह पार्टी जो कहती है, वह करके दिखाते भी है। सभी नव मनोनीत पदाधिकारियों को सम्बोधित करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी विधानसभा में तकरीबन एक हजार करोड़ के विकास कार्य चलाये जा रहे हैं। हल्द्वानी की अनेकों विकराल समस्याएं हैं, जिसमें से महानगर के रूप में तबदील हल्द्वानी शहर को एक सुव्यवस्थित सीवर निस्तारण योजना की जरूरत है। इसके लिए एक सौ पचास करोड की लागत से सीवर योजना को सरकार ने स्वीकृति दे दी है। इस योजना में नब्बे करोड का सीवर ट्रीटमैंट प्लान्ट इन्द्रानगर में बनाया जायेगा। उन्होनें कहा कि मेरे दरवाजे हर गरीब व आम आदमी के लिए हर समय खुले हैं। समस्या लेकर आयें व समाधान लेकर जायें। इस मौके पर उपाध्यक्ष जुहैद सिद्दकी, महामंत्री अनस नवाब, नगर प्रभारी आदिल हुसैन, महासचिव फैसल खान, उपाध्यक्ष इलियास सिद्दकी, फाईज खान, संगठन मंत्री इमरान मर्चैंट तथा मोहसीन खान, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मकसूद हुसैन, संयोजक वसीम कुरैशी, महासचिव आफताब अंसारी आदि मौजूद रहे।
भीषण आग से दो दुकाने खाक
देहरादून,15 मई(निस)। रायपुर क्षेत्र के सुन्दरवाला इलाके में शुक्रवार की सुबह भीषण आग लगने से दो दुकाने जलकर राख हो गयी। सूचना पर मौके पर पहंुची फायर ब्रिगेड की टीम ने बड़ी मश्कक्त से आग पर काबू पाया। इस अग्निकांड में लाखों रूपए के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार सुन्दरवाला ओखला में सुनील थपलियाल पुत्र गणेश थपलियाल तथा राजेश गिरी पुत्र जगदीश गिरी की बराबर से सटी दुकानें है। सुनील की परचून की दुकान है जबकि राजेश गिरी का डेरी, परचून व बुटीक का कारोबार है। बताया जा रहा है कि यह हादसा उस वक्त हुआ जब लोग गहरी नींद में सोये हुए थे। इसलिए इस घटना की जानकारी लोगों को देर से लगने के कारण भी नुकसान ज्यादा हुआ है। दोनों ही व्यापारियों की दुकानें पूरी तरह से जलकर राख हो गयी है और वहंा रखा कोई भी सामान सुरक्षित नहंीं बचा है। व्यापारी राजेश गिरी का कहना है कि उनका सब कुछ खत्म हो गया है, डेरी में रखे दो डीफ्रिजर, दो टी.वी व इन्वेटर के साथ अन्य सभी सामान जलकर राख हो गये है, वहीं बुटीक में नये पुराने तमाम कपड़े भी जल गये है उनका कहना है कि उनका लाखों का नुकसान हुआ है, वहीं सुनील की परचून की दुकान में भी कुछ भी सामान शेष नही ंबचा है। बताया जा रहा है कि इस आग की सूचना राह चलते लोगों द्वारा रायपुर थाना पुलिस को दी गयी तथा पुलिस की सूचना पर मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाडि़यों ने घंटो की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। अनुमान लगाया जा रहा है कि आग लगने का कारण शाट सर्किट हो सकता है।
मंत्रिमंडल के निर्णयों की होगी समीक्षा
देहरादून,15 मई(निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत 25 मई, 2015 को मंत्रिमंडल के निर्णयों और घोषणाओं की समीक्षा करेंगे। समीक्षा बैठक में फरवरी 2014 से अब तक हुए कैबिनेट निर्णयों और मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर चर्चा होगी। इस संदर्भ में मुख्य सचिव एन. रवि शंकर ने अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे 25 मई से पहले अपने स्तर पर समीक्षा कर मंत्रिमंडल के निर्णयों और मुख्यमंत्री के घोषणाओं के प्रगति की तैयारी कर लें

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