उत्तराखंड की विस्तृत खबर (23 मई) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 23 मई 2015

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (23 मई)

कहां हैं पर्यटन के ब्रांड अंबेसडर, एक बार भी उत्तराखंड नहीं आए विराट कोहली
  • सुरक्षित चारधाम यात्रा का देना था संदेश, मुंबई में लाखों रुपये खर्च होने की चर्चा

देहरादून, 23 मई (निस)। सरकार ने बड़े धूमधाम के साथ चारधाम यात्रा के सुरक्षित होने का संदेश देने के लिए क्रिकेटर विराट कोहली को पर्यटन विभाग का विभाग अंबेसडर बनाया था। माना जा रहा था कि अगर विराट उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर आते हैं तो इससे इस यात्रा को खासी पब्लिसिटी मिलेगी और देशभर में संदेश जाएगा कि यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित है। यात्रा चल रही है और पर्यटन विभाग के ब्रांड अंबेसडर का कोई पता नहीं है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि विराट को बुलाने के नाम पर लोगों ने लोगों ने मुंबई की सैर की। और पता नहीं क्या-क्या हुआ। हां सूत्र इतना जरूर बता रहे हैं कि कुछ खास लोगों की मुंबई यात्रा का खर्च कई लाख रुपये है। सरकार ने गुजरात की तर्ज पर चलते हुए किसी नामचीन हस्ती को ब्रांड अंबेसडर बनाने का आदेश पर्यटन विभाग को दिया था। गुजरात में सरकार को ब्रांड अंबेसडर महान फिल्म अभिनेता अभिताभ बच्चन है। सरकार की कोशिश थी कि ऐसा ही कोई चेहरा मिल जाए जो इस राज्य की छवि का निखार सके। सरकार की सोच थी कि अगर किसी शख्शियत गुजरात की तरह ही ब्रांड अंबेसडर बनाया जाता है तो देशभर में मीडिया के माध्यम से यह संदेश जाएगा कि चारधाम यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित है। सरकार की इस कोशिश को पर्यटन विभाग ने पलीता लगा दिया। पता नहीं क्यों क्रिकेटर विराट कोहली कोहली को ब्रांड अंबेसडर बना दिया गया।
अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि विराट ने चारधाम यात्रा के लिए आखिर किया क्या। विराट न तो उत्ताराखंड आए और न ही किसी अन्य माध्यम से उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा दिया। बताया जा रहा है कि कोहली को ब्रांड अंबेसडर बनाने के नाम पर पर्यटन विभाग ने लाखों रुपये खर्च किए हैं। अगर यह सच है तो सरकार को जांच करानी चाहिए कि पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर मुंबई में कितने पैसे खर्च किए गए और वास्तव में वो पैसा गया कहां। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि देहरादून से मुंबई गई टीम ने मौज-मस्ती में सरकारी खजाने के लाखों रुपये बहा दिए। कहा तो यहां तक जा रहा है कि विराट कोहली की जेब में एक पैसा भी नहीं गया। भले ही विराट को करोड़ों के विज्ञापन मिल रहे हों। लेकिन अगर उत्तराखंड सरकार की ओर से उनकी जेब में लाखों रुपये गए होते तो कम से कम एक बार तो विराट उत्तराखंड का रुख करते। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर इस बात की पड़ताल कराएगी कि सरकारी खजाने ने निकला पैसा कहां गया या फिर नेताओं और अफसरों की मिलीभगत से यूं ही जनता के पैसे पर मौज-मस्ती का सिलसिला चलता रहेगा।

शराब की ओरवरेटिंग से परेशान मयकश, नई नीति लागू होने के बाद पहले ही बढ़ गईं हैं कीमतें
  • बेअसर साबित हो रहा आबकारी विभाग का अभियान, ज्यादा पैसे को लेकर दुकानों परो रोज हो रहा विवाद

देहरादून, 23 मई (निस) । नई एफएल-टू के दुष्परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। पहले तो बीस रोज तक फुटकर दुकानों पर शराब ही उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। अब शराब आ गई है तो विक्रेता प्रिंट रेट से ज्यादा वसूल रहे हैं। पिछले कुछ रोज में आबकारी विभाग ने कुछ दुकानों को नोटिस भी जारी किए हैं। लेकिन दुकानदारों की मनमानी थमती नहीं दिख रही है। नजीता यह है कि मयकशों और विक्रेताओं के बीच रोजाना विवाद हो रहा है। एक मई से लागू हुई नीति से कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। बीस रोज तक तो दुकानों पर शराब ही नहीं आ सकी। अब किसी तरह से कुछ ब्रांड उपलब्ध भी कराए गए हैं तो फुटकर विक्रेताओं की मनमानी चल रही है। सरकार ने शराब ही हर बोतल, अद्धा और पैव्वे पर अधिकतम खुदरा मूल्य छापने का निर्देश दिया है। शराब कंपनियां ऐसा कर भी रही हैं। लेकिन फुटकर विक्रेता छपी कीमत से ज्यादा वसूल रहे हैं। अगर कोई विरोध करता है तो या तो शराब देने से ही मना कर दिया जाता है या फिर दुकानदार झगड़े पर आमादा हो जाता है। आबकारी विभाग को भी इस ज्यादा वसूली के मामले की शिकायतें मिल रहीं हैं। विभाग के लोग दिखावे के लिए कुछ दुकानदारों को नोटिस थमा कर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। नजीता यह है कि दुकानदारों की मनमानी बढ़ती जा रही है। तर्क दिया जा रहा है कि बीस दिन तक दुकानों को शराब नहीं मिली है। इस अवधि का टैक्स तो आबकारी विभाग को देना ही पड़ेगा। अगर ज्यादा कीमत नहीं वसूलेंगे तो क्या घर से टैक्स जमा करेंगे। शायद यही वजह है कि आबकारी विभाग इस ज्यादा वसूली के मामले में कोई सख्त एक्शन नहीं ले रहा है।

कोई नहीं दे रहा बिल
नियमानुसार हर दुकानदार को शराब बिक्री का बिल देना होता है। इसके लिए हर दुकान पर बिलिंग मशीन का होना भी जरूरी है। बताया जा रहा है कि आबकारी विभाग ने एक खास दुकान से ही इस बिलिंग मशीन को खरीदने के लिए दुकानदारों को तो मजबूर कर दिया। लेकिन हर ग्राहक को बिल देने के नियम पर अमल नहीं करवा पा रहा है। अगर दुकानों से बिल देने की व्यवस्था को सख्ती से लागू कर दिया जाए तो ओवर रेटिंग की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

काशीपुर में टेक्सटाइल पार्क जल्द केंद्र सरकार शुरुआती दौर में 40 करोड़ का पैकेज देने को तैयार
  • पीपीपी मोड में विकसित किया जाना है टेक्सटाइल पार्क, सात बड़ी कंपनियों ने इस पार्क में दिखाई अपनी रुचि
  • केंद्रीय सचिव ने सूबे के अफसरों के साथ ही गुफ्तगू

देहरादून, 23 मई (निस)। ऊधमसिंह नगर के काशीपुर शहर में टेक्सटाइल पार्क की योजना जल्द ही मूर्ति रूप ले सकती है। केंद्रीय टेक्सटाइल सचिव ने विगत दिवस सूबे के आला अफसरों से इस योजना पर गहन मंथन किया। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार इस पार्क के लिए शुरुआती दौर में 40 करोड़ का पैकेज देने को तैयार हो गई है। यह टेक्सटाइल पार्क पीपीपी मोड में बनाया जाना प्रस्तावित है। शुक्रवार को केंद्रीय टेक्सटाइल सचिव एसके पांडा ने देहरादून सचिवालय में मुख्य सचिव एन. रविशंकर व अन्य आला अफसरों के साथ इस योजना पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि काशीपुर में 40 एकड़ जमीन पर टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की सरकार की योजना खासी पुरानी है। इस पार्क के लिए जमीन की व्यवस्था पहले से ही की जा चुकी है। इस टेक्सटाइल पार्क का निमार्ण पीपीपी मोड में किया जाना है। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय सचिव ने इस बैठक के दौरान कहा कि केंद्र सरकार इस पार्क के लिए शुरुआती दौर में 40 करोड़ रुपये देने को तैयार है। इस टेक्सटाइल पार्क को बहुउद्देशीय बनाने की योजना है। इसे एकीकृत टेक्सटाइल पार्क का नाम दिया गया है। इसमें टेक्सलाइट के साथ ही हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, रेशम के साथ ही डिजाइनिंग का काम भी किया जाना है। बैठक में बताया गया कि अब तक इस पार्क को पीपीपी मोड में चलाने के लिए कोई आफर नहीं मिल पा रहा था। इस पर पार्क के कंसंल्टेंट ने बताया कि अब कोई दिक्कत नहीं है। इस पार्क को पीपीपी मोड में चलाने के लिए सात कंपनियों के प्रस्ताव सरकार के पास आ चुके हैं। माना जा रहा है कि काशीपुर में इस टेक्सटाइल पार्क को जल्द ही मूर्तिरूप दिया जा सकेगा। इस बैठक में अपर मुख्य सचिव और वित्त विभाग के मुखिया राकेश शर्मा समेत अन्य अफसर भी मौजूद रहे।

अभी एक पेंच और है बाकी
इस टेक्सटाइल पार्क के निमार्ण में अभी एक पेंच और बाकी है। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार चाहती है कि पीपीपी मोड में बनने वाले इस पार्क में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी और कंपनी की 49 फीसदी हो। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव से सहमत नहीं दिख रही है। केंद्र सरकार चाहती है कि राज्य सरकार की 49 फीसदी ही हो। बताया जा रहा है कि इसी शर्त पर ही बड़ी कंपनियों ने पार्क को पीपीपी मोड में चलाने की सहमति दी है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अगर राज्य सरकार अपने रुख पर अड़ी रही तो केंद्र सरकार ने वित्तीय मदद तो मिलेगी ही नहीं, पीपीपी मोड में काम करने की इच्छुक कंपनियां भी अपने हाथ खींच सकती हैं।

बदहाल पड़ी है काशीपुर की स्पनिंग मिल
कांग्रेसी दिग्गज नारायण दत्त तिवारी ने यूपी का सीएम रहते हुए काशीपुर में सहकारी क्षेत्र में एक स्पनिंग मिल का निमार्ण कराया था। सालों तक देशभर में झंडा गाड़ने वाली यह मिल पिछले 10 सालों से बदहाल पड़ी है। इसे पीपीपी मोड में चलाने की कोशिशें भी अफसरों के अड़गेबाजी से सफल नहीं हो सकीं। माना जा रहा है टेक्सटाइल पार्क बनने के बाद इस मिल के दिन भी फिरने के आसार हैं।

हरिद्वार का होटल रेडिसन ब्ल्यू सीज गंगा प्रदूषित करने वालों के खिलाफ एक्शन शुरू
  • नेशनल ग्रीन ट्रब्युनल ने अपनाया सख्त रुख, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब आ रहा हरकत में
  • कई और के खिलाफ की भी कार्रवाई जल्द

देहरादून, 23 मई (निस)। गंगा को प्रदूषित करने वाई इकाइयों के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रब्युनल को आखिरकार सख्त रुख अपनाना ही पड़ा। अब ट्रब्युलन ने ऐसा किया तो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी अपनी नींद खोलनी ही पड़ी। इसी क्रम में आज पहली गाज हरिद्वार के सिडकुल स्थित फाइव स्टार होटल रेडिसन ब्ल्यू को सीज कर दिया गया। माना जा रहा है कि अगले कुछ रोज में कई और इकाइयों के खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई हो सकती है। केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ गंगा को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर इस राज्य में कोई गंभीरता नहीं दिख रही है। पहाड़ से लेकर रुड़की तक रोजाना हजारों लीटर सीवर और औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी सीधे गंगा में बहाया जा रहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सब दिख ही नहीं रहा है। हालात ये हैं कि राज्य के अफसरों ने ग्रीन ट्रब्यूलन को एक झूठी रिपोर्ट तक भेज दी। ट्रब्युलन को इस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं तो उसने अपने स्तर से इसकी जांच करवाई। नतीजा चैकाने वाला सामने आया तो ट्रब्यूनल ने राज्य के आधा दर्जन अफसरों को इस झूठी रिपोर्ट के मामले में नोटिस थमा दिया। नोटिस के बाद राज्य के अफसरों में हड़कंप मचा तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नींद टूट गई। किसी सख्त एक्शन से बचने के लि बोर्ड ने हरिद्वार और देहरादून के कुछ होटलों और हाउसिंग प्रोजेक्ट को नोटिस जारी कर दिए। पहले लगा कि इस बार भी ये नोटिस महज दिखावे को दिए गए हैं। लेकिन इस बार ऐसा हुआ नहीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहली बार हिम्मत दिखाते हुए हरिद्वार के पंच सितारा होटल को सीज कर दिया। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ रोज में देहरादून और हरिद्वार के कुछ होटलों व हाउसिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ भी एक्शन हो सकता है।  गंगा एक्शन प्लान पर हरिद्वार में काम शुरू हो गया है। सिडकुल स्थित शहर के सबसे बड़े होटल रेडिसन ब्लू पर सील लगेगी। पर्यावरण मानकों की अनदेखी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त रवैये के बाद प्रशासन हरकत में आया और होटल बंद कराने का निर्णय लिया गया। एनजीटी की ओर से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गंगा में गंदगी प्रवाहित करने वाले बड़े आश्रमों और होटलों की जांच कराई गई थी।    जांच समिति में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अलावा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल थे। इन्होंने 23 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच में हरिद्वार और ऋषिकेश के बड़े आश्रमों और होटलों की जांच की थी। जांच रिपोर्ट में रेडिसन ब्लू होटल में मानकों का उल्लंघन पाया गया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस होटल को बंद करने के आदेश दिए गए थे लेकिन अभी तक कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी थी।

ट्रब्युनल में आज है पेशी
बताया जा रहा है कि ट्रब्युलन के दिल्ली दफ्तर में आज उत्तराखंड के अफसरों की पेशी होनी है। होटल सीज करने की एक बड़ी वजह यह भी रही। माना जा रहा है कि होटल सीज करने के मामले को अफसर ट्रब्युलन के सामने एक्शन टेकन रिपोर्ट के रूप में पेश करके बचने की कोशिश कर सकते हैं। 

कर्ज में डूबे दंपति ने जहर, खाया पति की मौत

देहरादून, 23 मई (निस) । पिथौरागढ़ में कर्ज में डूबे एक दंपति ने जहर खा लिया। इससे पति की मौत हो गई और पत्नी को जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि मूल रूप से पौड़ी जनपद के मालकोट ग्राम निवासी जसवंत सिंह (50 वर्ष)  यहां जाजरदेवल कस्बे में पिछले लगभग 25 सालों से किराए का कमरा लेकर परिवार सहित रह रहे थे और ठेकेदारी करते थे। बताया जा रहा है कि बीती रात्रि जसवंत सिंह ने पत्नी रूपा देवी  के साथ जहर खा लिया। इसकी जानकारी होते होते दंपति के दोनों बच्चों ने तत्काल ही पड़ोसियों को जानकारी दी। इससे वहां हड़कंप मच गया। पड़ोसी किसी तरह से दोनों अस्पताल लेकर आए। लेकिन डाकटरों से जसवंत को मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि उसकी रास्ते में ही मौत हो गई। पत्नी को गंभीर हालत में इलाज चस रहा है।  पुलिस ने बताया कि दंपति के कमरे से नुवान की खाली शीशी मिली है। आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि जसवंत सिंह का ठेकेदारी का धंधा करता था। पिछले कुछ समय से उसे लगातार घाटा हो गया था और वह बुरी तरह से कर्ज में डूब गया था। उधार देने वाले लोग अपने पैसे की वापसी के लिए दबाव बनाए हुए थे। इसी से आजिज आकर दोनों से अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए जहर पी लिया।

उत्तरकाशी में मानव तस्करी का धंधा तेज गरीब महिलाओं को गुमराह करके कराई जा रही शादी
  • रोहित नाम का शख्स इस धंधे का सूत्रधार, ग्रामीण अंचलों तक फैले हैं इसके बिचैलिए

देहरादून, 23 मई (निस) । उत्तरकाशी जनपद के ग्रामीण अंचलों में मानव तस्करी का कारोबार फल-फूल रहा है।  रोहित नाम का एक शख्स ऐसे लोगों को फांसता है जिनकी आवाज उठाने वाला कोई न हो। यह व्यक्ति प्रलोभन देकर शादी कर बैठता है।  फिर कुछ दिन छोड़कर फरार हो जाता है। इस शातिर व्यक्ति ने हर जगह अपने बिचैलिए रखे हैं। इनके माध्यम से ये वारदात को अंजाम देता है। इस संवाददाता के इस मालले की जानकारी हुई तो इस रोहित नामक शख्स और उसकी शिकार बनी महिलाओं की तफ्तीश की। इसी दौरान पता चला कि चिन्यालीसौड़ प्रखंड की एक महिला भी इसकी शिकार बनी। इस  महिला ने बताया की उसका एक कोई रिश्तेदार ही रोहित को घर लेकर आया था। उसी ने रोहित से शादी की बात की। महिला ने बताया कि उसने कहा कि मैं गरीब परिवार से हूं और मेरे मां-बाप भी नहीं है। वह दलित परिवार से है और आप पंडित हैं।  बकौल महिला इस पर रोहित का जवाब था कि हम लोग ये सब नहीं मानते। इस पर राजी होकर महिला ने सुरकंडा मंदिर में शादी की और बाद में देहरादून शिफ्ट हो गए। महिला ने एक वर्ष बाद बेटी को दून हस्पताल में जन्म दिया। बेटी का जन्म होने के बाद रोहित वहां से गायब हो गया और आज तक रोहित का महिला से सामना नहीं हुआ। महिला को इंसाफ के लिए दस साल बीत गए पर इंसाफ नहीं मिला। इतना ही नहीं आज महिला की बेटी नौ वर्ष की हो चुकी है। बेटी को नहीं मालूम क उसका बाप कौन है। महिला ने रोहित के बारे में पता किया तो उसे पता चला की ये शख्स शादीशुदा है। इसके अलावा इस महिला ने चमियाला में रोहित की शादी के बारे में बताया। वहां से रोहित ने उसने सोने की रिंग सहित लड़की वालों से नगदी भी ली। बस अब महिला का कहना है कि वह तो दर-दर की ठोकरें खा रही है। किसी तरह अपना और बेटी का पेट पाल रही हैं। महिला का कहना है कि जो रोहित ने उसके साथ किया है। वैसा किसी और के साथ न हो। डर लगता है न जाने अब तक वो कितनी लड़कियों की जिंदगी से खेल रहा होगा। 

उत्तराखंड उपभोक्ता आयोग में नहीं हुआ साल के आधे दिनों काम बार एसोसिएशन प्रस्तावों के कारण नहीं हुआ काम
  • 2015 में 84 दिन तथा 2015 में अप्रैल तक 28 दिन काम ही हुआ काम

देहरादून, 23 मई (निस)। जागो ग्राहक जागो का खोखला नारा व उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने को जिम्मेदार राज्य उपभोक्ता आयोग में वर्ष 2014 में आधे से अधिक दिनों काम ही नहीं हुआ है। यह खुलासा खुद राज्य उपभोक्ता आयोग के लोक सूचना अधिकारी/प्रषासनिक अधिकारी वन्दना शर्मा द्वारा राष्ट्रीय स्तरीय सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट को उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ है। काषीपुर निवासी राष्ट्रीय स्तरीय सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने राज्य उपभोक्ता आयोग के लोक सूचना अधिकारी से उन कार्य दिवसों के विवरण सम्बन्धी सूचना मांगी थी जिसमें आयोग में परिवादों व अपीलों की सुनवाई नहीं हुई है। आयोग के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 240 दिनांक 29 अप्रैल 2015 से श्री नदीम को जो सूचना उपलब्ध करायी गयी है उसमें वर्ष 2014 में 113 कार्य दिवसो में अपीलों व वादों की सुनवाई नहीं हुई। इसमें 84 दिन वकीलों के कार्याें में विरत रहने तथा 18 दिन सदस्य या अध्यक्ष अनुपस्थित होने के कारण कोरम अपूर्ण होने से नहीं हुई है।  उल्लेखनीय है वर्ष 2014 में उक्त कार्य न होने वाले दिनों में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा घोषित राजपत्रित अवकाष व 3 स्थानीय अवकाषों तथा रविवारों तथा माह के द्वितीय शनिवारों के अवकाषों को जोड़कर आयोग में साल के आधे से अधिक दिनों परिवादों व अपीलों की सुनवाई नहीं हुई है। श्री नदीम को आयोग के लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार राज्य उपभोक्ता आयोग में वर्ष 2014 के जिन कार्य दिवसो में अपील व परिवादों की सुनवाई नहीं हुई है इसमें जनवरी में 6, फरवरी में 16, मार्च में 6, अप्रैल में 3, मई में 5, जून में पूरे माह के 30, जुलाई में 19, अगस्त में 7, सितम्बर में 4, अक्टूबर में 5, नवम्बर में 3, दिसम्बर में 9 दिन शामिल हैं। राज्य उपभोक्ता आयोग में जिन 18 कार्य दिवसो में कोरम पूर्ण में न होने के कारण अपीलों व केसों की सुनवाई नहीं हुई है उसमें 1 से 17 जुलाई तथा 25 नवम्बर को आयोग की बैठक नहीं हुई है। श्री नदीम को उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार वकीलों के कार्य न करने के कारण जिन कार्य दिवसो में कार्य नहीं हुये है उसमें जून के पूरे माह सहित 84 कार्य दिवस शामिल हैं। बार एसोसिएषन देहरादून के वकीलों के कार्य न करने के प्रस्ताव के कारण जून में सर्वाधिक 30 दिन, फरवरी में 13 दिन, दिसम्बर में 9 दिन, अगस्त में 7 दिन तथा जनवरी, सितम्बर तथा अक्तूबर में 4-4 दिन, मार्च, अप्रैल, मई में 3-3 दिन तथा जुलाई तथा नवम्बर में 2-2 दिन आयोग में अपील तथा परिवादों की सुनवाई नहीं हुई है। श्री नदीम को उपलब्ध करायी सूचना के अनुसार 2015 में भी 27 अप्रैल तक 36 कार्य दिवसों में आयोग में अपील तथा परिवादों की सुनवाई नहीं हुई है। इसमें 28 दिन बार एसोसिएषन देहरादून के वकीलों के कार्य न करने के प्रस्ताव के कारण  तथा 1 दिन कोरम पूर्ण न होने के कारण अपीलों व केसों की सुनवाई नहीं हुई है।

‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ अभियान से जुड़े स्कूल: राज्यपाल

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देहरादून, 23 मई (निस) । उत्तराखण्ड के राज्यपाल डाॅ0 कृष्ण कांत पाल से शनिवार को राजभवन में आर्यन्स एजुकेशनल एण्ड चैरीटेबल ट्रस्ट, चंडीगढ़  के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की। भेंटवार्ता के दौरान राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की प्रतिभावान लड़कियों को ट्रस्ट द्वारा संचालित काॅलेजों के विभिन्न व्यावसायिक व तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश तथा शिक्षा में आने वाले व्यय में मदद किया जाना हितकारी होगा। इससे ट्रस्ट का ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ अभियान सार्थक सिद्ध होगा। इस मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने ट्रस्ट के ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ अभियान सम्बन्धी पोस्टर का लोकार्पण भी किया। ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को अवगत कराया कि ट्रस्ट के तत्वाधान में मैनेजमैंट, इंजीनियरिंग तथा नर्सिंग आदि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तथा शिक्षा सम्बन्धी शिक्षण संस्थान चलाये जा रहे हैं। ट्रस्ट के कल्याणकारी कार्यों के अन्तर्गत चलाये जा रहे इस अभियान में आर्थिक रूप से कमजोर उत्तराखण्ड की 50(पचास) प्रतिभावान लड़कियों को चिन्हित करके उन्हें शिक्षा शुल्क में 50 प्रतिशत छूट व छात्रवृति दिये जाने की योजना बनाई गई है।  

सेंध लगाकर दो दुकानों में चोरी

देहरादून, 23 मई (निस) । दून में चोरों की आंतक जारी है। शहर के धर्मपुर क्षेत्र में दो दुकानों में सेंध लगाकर चोर नगदी व लाखों का सामान ले उड़े। इस दौरान चोरों ने दुकान में लगे सीसी कैमरे भी तोड़ डाले। पुलिस ने मामला दर्ज कर चोरों की तलाश शुरू कर दी हैं। चोरी की यह वारदात नेहरूकालोनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत धर्मपुर में हुई। चोर दीवार तोड़कर दुकानों के भीतर घुसे। पहले चोरों ने बुटीक की दुकान की दीवार तोड़ी और भीतर से करीब ढाई लाख की नगदी व कपड़ों पर हाथ साफ कर दिया। इसके बाद बुटीक की दुकान की दीवार में छेद बनाकर इससे सटी दुसरी इलेक्ट्रोनिक्स की दुकान में घुसे। यहां से भी चोर करीब 85 हजार रुपये नगद और मोबाईल फोन, एलईडी टीवी समेत कीमती सामान उड़ा ले गए।  चोरी की इस घटना का दुकान स्वामियों को सुबह तब पता चला जब वे दुकान खोलने पहुंचे। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गयी। मौके पर पहंुचकर पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर चोरों की तलाश शुरू कर दी हैं। धर्मपुर चैक स्थित भीड़भाड़ इलाके में चोरी की इस घटना से क्षेत्र के लोगों में पुलिस के प्रति रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में हर समय पुलिस की गश्त रहती हैं। इसके बावजूद चोरी होने से लोगों में असुरक्षा की भावना घर कर रही हैं। 

राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चैपट हो गईः भट्ट

देहरादून, 23 मई (निस) । नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चैपट हो गयी है, क्योंकि जहाॅ एक लम्बे समय के बाद भी पुलिस आज तक बहुचर्चित रूबी प्रकरण की जाॅंच में एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पायी है वहीं दूसरी ओर 14 मई की रात हरिद्वार को लौटते समय लगभग 11 बजे मेरे काफिले को दुर्घटनाग्रस्त करने वाले आरोपी ट्रक चालक व ट्रक को पुलिस नहीं पकड़ पायी है। श्री भट्ट ने कहा कि वे 14 मई को नैनीताल से हरिद्वार लौट रहे थे, रात्रि लगभग 11 बजे चिडि़यापुर में एक ट्रक द्वारा उनके काफिले को दुर्घटनाग्रस्त कर दिया था, जिसकी सूचना तत्काल पुलिस को दे दी गयी थी और आगे की तरफ काफी मात्रा में लम्बा जाम लगा हुआ था, पुलिस को सूचना देने के बाद भी हैरानी की बात है कि आखिर कैसे ट्रक चालक दुर्घटनाग्रस्त ट्रक समेत फरार हो गया। श्री भट्ट ने कहा कि अभी तक पुलिस न तो आरोपी ट्रक चालक को पकड़ पायी और न ही दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को अपने कब्जे में ले पाई है। प्रदेश की कानून व्यवस्था का इससे बड़ा और उदाहरण भला क्या हो सकता है ? उन्होंने कहा कि इस दिशा में पुलिस अभी तक एक इंच भी जाॅच नहीं कर पायी है। श्री भट्ट ने कहा कि उनके एस्कार्ट ड्यूटी में तैनात वाहन चालक श्री गणेश थापा आज भी हिमालय हाॅस्पिटल में जिन्दगी और मौत से जूझ रहा है जबकि अभी तक शासन-प्रशासन के किसी भी अधिकारी या व्यक्ति द्वारा उससे मिलने की जहतमत तक नहीं उठायी गयी भला इससे बड़ी मानवहीनता और संवेदनशीलता और क्या हो सकती है। श्री भट्ट ने इस पूरे प्रकरण पर कानून व्यवस्था और प्रदेश सरकार की उदासीनता पर गम्भीर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि अभी तक शासन-प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई जानकारी तक नहीं ली गयी इससे बड़ी उदासीनता और क्या होगी। श्री भट्ट ने कहा कि उन्होंने वाहन चालक गणेश थापा के उपचार के लिए हिमालयन हाॅस्पिटल द्वारा दिया गया उपचार सम्बन्धी रू0 तीन लाख का आंगणन उनके द्वारा मुख्यमंत्री को प्रेषित कर दिया गया है और चालक की हालात आज भी काफी गम्भीर बनी हुई है। श्री भट्ट ने कहा कि उन्हें अत्यधिक खेद है कि सरकार और प्रशासन का कोई भी व्यक्ति आज तक उनके एस्कार्ट चालक जो कि जिन्दगी की लड़ाई लड़ रहा है उसकी हालात जानने तक नहीं पहुॅचा, जबकि पूरे घटनाक्रम से सभी अच्छी तरह से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा आज तक उस दिशा में कोई कार्यवाही न करना और इतने दिनों के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना कई सवालों को जन्म देता है, क्योंकि जब एक व्यक्ति उस दुर्घटना के कारण अपनी जिन्दगी से लड़ रहा हो और शासन प्रशासन इस पूरे मामले को इतने हल्के में ले रहा हो तो इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। श्री भट्ट ने कहा कि पूरी सरकार माफियाओं के आगे नतमस्तक है उसे प्रदेश के कानून व्यवस्था अथवा विकास कार्यों से कोई लेना-देना नहीं है। 

मंत्री ने ली खेल विभाग के अधिकारियों के बैठक 

देहरादून, 23 मई (निस) । ग्रामीण आंचलों के प्रतिभावान खिलाडि़यों को राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार करने के लिये मुख्यमंत्री के मन्त्व्य के अनुसार ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर प्राप्त करने हेतु आज विधान सभा स्थित अपने कक्ष में प्रदेश के खेल मंत्री उत्तराखण्ड सरकार दिनेश अग्रवाल ने प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण अधिकारियों के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा 5 करोड़ 86 लाख रू0 ग्राम एवं न्याय पंचायत स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में एथेलिटिक्स, फुटबाल, खो-खो, कबड्डी, कुश्ती, बालीबाल खेलों के आयोजन हेतु स्वीकृत किये गये हैं। उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार न्याय पंचायत एवं ग्राम पंचायत पर खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन सम्बन्ध में कहा कि सचिव युवा कल्याण एवं खेल के साथ तीनों विभागों के अधिकारी बैठकर पहले कार्य योजना सुनिश्चित करें कि उक्त खेलों का आयोजन युवा कल्याण विभाग या खेल विभाग कौन करायेगा। क्योंकि कार्य योजना बनने के पश्चात ही इन खेलों के आयोजन की जिम्मेदारी किस विभाग द्वारा निर्वहन की जायेगी। तथा इन खेलों हेतु नोडल अधिकारी की भूमिका का निर्वहन कौन सा विभाग करेगा। इनके साथ ही उन्होंने उक्त अधिकारियों को खेल कलैण्डर 15 दिन के अन्दर बनाने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि उक्त तीनों विभागों के समन्वय से ही उक्त खेल सम्पन्न करवाये जायें। उक्त आयोजन से प्रतिभावान खिलाडि़यों का चयन आगामी वर्ष 2018 में हो रहे राष्ट्रीय खेलों में प्रतिभाग हेतु चुना जाय। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान खिलाडि़यों को भी राष्ट्रीय खेलों हेतु सुअवसर का लाभ प्राप्त हो सके। बैठक में अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा उषाशुक्ला, अपर सचिव युवा कल्याण आर.सी.लोहानी, संयुक्त सचिव लक्ष्मण सिंह, अपर निदेशक शिक्षा बी.एस.रावत, उपनिदेशक खेल अजय अग्रवाल, उपनिदेशक युवा कल्याण शक्ति सिंह, और अनु सचिव माध्यमिक शिक्षा बी.एस.पुण्डीर मौजूद थे।

खड्ड में मिला पूर्व ब्लाॅक प्रमुख का शव,हत्या की आशंका

देहरादून, 23 मई (निस) । जयहरीखाल प्रखंड के पूर्व ब्लाॅक प्रमुख का शव संदिग्ध परिस्थितियों में एक खड्ड में मिलने से सनसनी फैल गयी। घटनास्थल के करीब तीन सौ मीटर दूरी पर उनकी कार भी बरामद की गयी। मौके पर पहंुचकर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस मामले में कयास लगाए जा रहे है कि पूर्व ब्लाॅक प्रमुख की हत्या के बाद इसे दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया है। पुलिस  छानबीन करने में जुट गयी है। जयहरीखाल के अंर्तगत बबीना गांव निवासी अरुण खंतवाल (42 वर्ष) ठेकेदारी का काम करते हैं। उनके बच्चे सतपुली में रहते हैं। वर्तमान में इन दिनों वह दुधारखाल-सतपुली मोटर मार्ग पर सडक निर्माण करवा रहे थे। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की रात करीब नौ बजे वह अपने पैतृक गांव बबीना पहुंचे और उन्होंने वहां से अपनी पत्नी को सतपुली में फोन कर बताया कि वह सतपुली लौट रहे हैं। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। देर रात तक जब वह घर नहीं पहुंचे तो परिजन भी परेशान रहे। शनिवार सुबह सतपुली-कांडाखाल मोटर मार्ग पर ग्राम हंडोल की कुछ महिलाओँ ने सड़क किनारे खड्ड में एक बोलेरो कार पड़ी देखी। सूचना पर ग्रामीण व पुलिस मौके पर पहुंचे और उन्होंने आसपास की तलाशी ली। कार से करीब तीन सौ मीटर की दूरी में अरुण का शव पड़ा मिला। घटनास्थल व आसपास के क्षेत्र की स्थिति यही बयां कर रही है कि यह हादसा नहीं है, बल्कि हत्या है। दुर्घटनास्थल से करीब दो किमी. पहले सडक पर काफी खून भी पड़ा मिला। साथ ही अरुण की कार की स्टेपनी का कबर भी खून के समीप पड़ा मिला। माना जा रहा है कि उसकी हत्या कर इसे दुर्घटना का रूप दिया गया है। सूचना पर मौके पर पहंुची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस इस पूरे प्रकरण की छानबीन में जुट गयी है।

छात्रों का वाहन दुर्घटना ग्रस्त सात घायल

देहरादून, 23 मई (निस) । दिल्ली के हेरीटेज स्कूल के छात्रों व शिक्षकों के दल में शामिल एक मैक्स वाहन खड्ड में गिर गया। दुर्घटना में चार महिलाओं समेत सात लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर होने पर उन्हें देहरादून रेफर कर दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की सुबह करीब 70 सदस्यीय दल शिक्षा टूर पर चार दिन के लिए बस से कोटद्वार पहुंचा था।। यहां से इस दल ने 11 प्राइवेट टैक्सी किराये पर ली और झवाणा स्थित एक रिसोर्ट के लिए रवाना हुए। प्रखंड दुगड़डा के अंतर्गत आमसौड-झवाणा संपर्क मार्ग पर झवाणा से करीब आधा किमी पहले दल में शामिल एक मैक्स खड़ड में जा गिर गया। बताया जा रहा है कि खडी चढाई में अचानक मैक्स में तकनीकि खरीबी आ गई व वाहन पीछे की ओर आकर खड्ड में जा गिरा। मैक्स में चालक समेत दस लोग सवार थे। दुर्घटना में आश्रम दिल्ली निवासी शीतल (26 वर्ष), वसंतकुंज दिल्ली निवासी मीतू (45वर्ष), जेएनयू दिल्ली निवासी रोहित के.राय (26 वर्ष), द्वारिका दिल्ली निवासी सुनील मल्होत्रा (32 वर्ष), द्वारिका दिल्ली निवासी आरके शर्मा (52 वर्ष), सुलतानपुर दिल्ली निवासी सपना मल्होत्रा (32 वर्ष) व गुडगांव निवासी प्रियंका (30 वर्ष) घायल हो गए। नायब तहसीलदार श्रेष्ठ गुनसोला ने बताया कि घायलों में प्रियंका, सपना व शीतल की हालत नाजुक बताई जा रही है व तीनों को देहरादून के लिए रेफर कर दिया गया है। मैक्स चालक रघुनाथ सिंह ने बताया कि यहां यह भी बताना जरुरी है कि जिस मार्ग पर मैक्स दुर्घटना हुई, उस पर वाहन संचालन की कोई अनुमति नहीं है। 

झील में मिला टूरिष्ट गाईड का शव

नैनीताल, 23 मई (निस। शनिवार की सुबह नगर के पाषाण देवी मंदिर के निकट झील से टूूरिस्ट गाइड का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान 41 वर्षीय सुरेश पुत्र विशन राम निवासी मटीना अल्मोड़ा के रूप में हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शनिवार की सुबह मंदिर के निकट झील में एक व्यक्ति का शव लोगों ने देखा। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया और मृतक की शिनाख्त कराई। पुलिस के मुताबिक सुरेश वह टूरिस्ट गाइड था। वह तल्लीताल स्थित नैना गेस्ट हाउस में काम करता था। शुक्रवार की शाम लोगों ने उसे मंदिर के समीप बैठे देखा था। शनिवार की सुबह उसका शव झील में पड़ा मिला। इस मामले में पारिवारिक तनाव की बात भी सामने आ रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

केदारनाथ में यात्रियों का रहना- खाना बना चुनौती हवाई कंपनियों को अलर्ट नोटिस जारी

रुद्रप्रयाग, 23 मई (निस । केदारनाथ में प्रशासन ने सीमित संख्या में ही यात्रियों के रहने व खाने की व्यवस्था की है, लेकिन व्यवस्था से अधिक यात्रियों के रात्रि को धाम में रुकने पर प्रशासन गंभीर हो गया है। इसी के तहत तीन हवाई कंपनियों को अलर्ट नोटिस दिया गया है, साथ ही कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। प्रशासन का कहना है हवाई कंपनियां यात्रियों को ले जा रही हैं, लेकिन वापस कम संख्या में ला रही है, जिससे केदारनाथ में रात्रि रुकने वाले यात्रियों की संख्या अधिक हो रही है। डीएम राघव लंगर ने हवाई कंपनी सुमित एविएशन, हिमालयन हेली व यूटिएयर को अलर्ट नोटिस देते कहा है कि कंपनियां उतने ही यात्रियों को केदारनाथ ले जाए, जितने को वापस ला सके। वे जिन यात्रियों को केदारनाथ ले रहे हैं। उन्हें वापस नहीं लाया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने केदारनाथ में लगभग पन्द्रह सौ यात्रियों के रहने व खाने की व्यवस्था की है, इसी अनुपात में यात्रियों को सोनप्रयाग से पैदल छोड़ा जा रहा है, साथ ही लिनचोली में भी यात्रियों को ठहराया जा रहा है, लेकिन हवाई कंपनियां यात्रियों को बड़ी संख्या में केदारनाथ ला रही हैं, वापस कम संख्या में उसी दिन ले जा रही है। जिससे केदारनाथ में रहने व खाने की व्यवस्था करना प्रशासन के लिए मुश्किल हो रहा है।

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