बीजेपी में कार्यकर्ता ही बनता है प्रधानमंत्री: डा लक्ष्मीकांत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 मई 2015

बीजेपी में कार्यकर्ता ही बनता है प्रधानमंत्री: डा लक्ष्मीकांत

  • पूरे दमखम के साथ बीजेपी में पूर्व मंत्री दीनानाथ भास्कर, औराई विधानसभा से भास्कर को टिकट मिलने के संकेत 
  • राहुल को भूमि अधिग्रहण और अखिलेश को किसानों की मदद के मुद्दे पर बोला हमला, कहा दोनों है किसान विरोधी 

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भदोही (सुरेश गांधी )। कांसीराम के दौर में उत्तर प्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर चर्चा में आये भास्कर ने एकबार फिर से राजनीति में नई पारी की शुरुवात की है। गुरुवार को भदोही के ज्ञानपुर स्थित डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क में आयोजित जनसभा में भास्कर ने पूरे दमखम व अपने लौह-लश्कर के साथ प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी सांसद वीरेन्द्र सिंह, काशी प्रांत प्रभारी लक्ष्मण आचार्य की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान ज्ञानपुर से विधायक व मंत्री रहे रामकिशोर बिन्द को भी भास्कर के साथ पार्टी में शामिल कर फूलमालाओं से उनका स्वागत किया गया। माना जा रहा है कि भास्कर के जुड़ने से पूर्वांचल में बीजेपी काफी मजबूत होगी। घोषणा तो नहीं की गयी, लेकिन अपने अध्यक्षीय भाषण में लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने यह कहकर साफ कर दिया कि बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है जहां उर्जावान, कर्मठ व लगनशील कार्यकर्ता प्रधानमंत्री तक बन सकते है। अगर पार्टी में शामिल होने वाले कार्यकर्ता पार्टी के मंसूबों पर खरे उतरे तो उनकी हर इच्छा पूरी करने में भाजपा पीछे नहीं हटेगी। हालांकि इस दौरान श्री बाजपेयी ने अखिलेश सरकार पर भी जमकर हमला बोला, कहा किसानों के साथ भेदभाव व उनकी उपेक्षा करना बंद नहीं किया गया तो पार्टी पूरे सूबे में बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी। 

श्री बाजपेयी ने अखिलेश व राहुल को किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा किसानों को राहत प्रदान करने के लिए केंद्र की तरफ से भेजे गए सैकड़ों करोड़ रुपए प्रदेश सरकार खजाने में दबाये बैठी है। इस कारण प्रदेश का किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। उन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर सपा सरकार द्वारा बरती जा रही उदासीनता पर हैरानी जताते हुए सीएम अखिलेश से किसानों के मुद्दे पर राजनीति बंद करने को कहा है। उन्होंने मोदी सरकार द्वारा किसानों के 33 फीसदी नुकसान को आधार मानकर मुआवजा दिए जाने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि अखिलेश सरकार 33 फीसदी के आधार पर सर्वें क्यों नहीं करा रही? साथ ही उन्‍होंने सीएम को यह भी ताकीद दी कि वे यह सुनिश्चित करें कि केंद्र सरकार द्वारा किसानों की सहायता के लिए जो आर्थि‍क मदद दी जा रही है, वो मंत्रियों के भ्रष्टाचार में न डूब जाए।

उन्‍होंने कहा कि यूपी में पार्टी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से ही प्रदेश में 1 करोड़ 86 लाख लोगों को बीजेपी का सदस्य बनाया जा सका है। इससे साबित होता है कि अब प्रदेश की सत्ता में आने से बीजेपी को कोई नहीं रोक सकता है।

कार्यकर्ताओं का बलिदान और लंबे संघर्ष का ही परिणाम है कि आज हम देश में आजादी के बाद पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ गैर कांग्रेसी सरकार बनाने में सफल रहे। आज देश में 13 प्रदेशों में बीजेपी की सरकार है। उन्‍होंने कहा कि अब हम सब कार्यकर्ताओं का यह दायित्व बनता है कि हम अपने संगठन का और अधिक विस्तार कर पार्टी की पंचायत स्तर तक उसका जनाधार मजबूत करने का काम करें। उन्होंने राहुल गांधी को अमर्यादित शब्दों को प्रयोग न करने की हिदायत देते कहा कि उनका पीडि़त किसानों से कोई वास्ता नहीं है, वह सिर्फ उन्हें बरगलाना चाहते है। डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि राहुल गांधी घडि़याली आंसू बहाने के बजाए अपने ‘जीजाजी’ द्वारा हरियाणा में किसानों की ली हुई भूमि को वापस कराएं। केंद्र के भूमि अधिग्रहण कानून को तरक्की के लिए आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद इसे बनाया गया है। दावा किया कि अधिग्रहीत भूमि किसी अंबानी अथवा अडानी को नहीं दी जाएगी। वाजपेयी ने मोहम्मद आजम खां, राम गोपाल यादव व शिवपाल सिंह यादव के नामों के उल्लेख के साथ चुटकी लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भी क्या करें। वह तो चाचा-ताऊ से घिरे रहते हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी के सामने चुनौतियां हैं, लेकिन उसे किसी तरह की चिंता नहीं है। भाजपा का महासंपर्क अभियान 24 मई से प्रारम्भ होगा तथा 26 से यह बूथ स्तर पर पहुंचेगा। एक सवाल के जवाब में यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण राजनीति से जुड़ा मसला नहीं है यह आस्था का प्रश्न है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, लिहाजा कोर्ट आदेश पर काम होगा। सभा में डा राकेश दुबे, जिलाध्यक्ष संतोष पांडेय, ओमप्रकाश पांडेय, शैलेन्द्र दुबे, गोरेलाल पांडेय, सपना दुबे आदि ने अपनी बाते कहीं। 

बता दें, वर्ष 1984 से वाराणसी जिले के चंदौली क्षेत्र से बसपा के साधारण कार्यकर्ता के रुप में राजनीति में कदम रखने वाले दीनानाथ भाष्कर वर्ष 1987 तक चंदौली जिले में बसपा के ब्लाक व तहसील अध्यक्ष का रास्ता तय करते हुए वर्ष 1987 से 1995 तक वाराणसी से बसपा जिलाध्यक्ष रहे। वर्ष 1993 में चंदौली से चुनाव जीतने के साथ तत्कालीन सपा-बसपा गठबंधन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद मायावती की निजी जिन्दगी पर विवादास्पद बयान देकर पार्टी से अलग होकर वर्ष 2002 के विस चुनाव में विधायक निर्वाचित होने के बाद अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग का अध्यक्ष बन गये। लेकिन तेज-तर्रार व वूसलों की राजनीति से समझौता न करने वाले भास्कर ने सपा सिर्फ इसलिए छोड़ दिया कि वह मुलायम सिंह के बातों को यह कहकर इंकार कर दिया कि वह दलितों के साथ गद्दारी नहीं कर सकते। दरअसल मुलायम सिंह यादव चाहते थे कि दलितों को जमीन बेचने के मामले में परिसीमन के नाम पर जो रोक लगी है उस कानून को निरस्त कर दिया जाय। इसके पीछे मंशा यह थी कि अगर दलितों को जो पट्टा मिला वह उसे बेचने के साथ-साथ अपनी पैतृक जमीन भी बेचकर सड़क पर होगा और मूफलीसी में मायावती के वोट बैंक से कट जायेगा, लेकिन भास्कर ने यहां समाजहित में उनकी बात को टाल दिया। परिणाम यह हुआ कि मुलायम सिंह यादव के ईशारे पर ही बाहुबलि विधायक का वह कोपभाजन बनने लगे और उन्हें सपा छोड़नी पड़ी। काफी मान-मनौवल के घनचक्क्र में एक जून 2009 को भास्कर फिर से बसपा में शामिल हो गए। कांसीराम के दौर में उत्तर प्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर चर्चा में आये भास्कर फिर से बसपा छोड़ दी है। कहा जा सकता है कांशीराम के सबसे नजदीकी और भरोसेमंद माने जाने वाले भास्कर ही वह शख्स हैं जिनकी वजह से मुलायम सिंह यादव और मायावती के बीच ऐसी दीवार खड़ी हो गयी जो आज तक नहीं गिर पायी। कम लोग जानते हैं कि मायावती से पहले दीनानाथ भास्कर को ही मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव सामने आया था। भास्कर को भी भाजपा उसी नजरिए देख रही है और पार्टी में शामिल कर पूर्वांचल के दलितों को बताना चाहती है कि उसका कल्याण भाजपा ही कर सकती है। 
देखा जाय तो बीजेपी को चिंता बिहार, पश्चिम बंगाल व उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव की है। बिहार में साल के आखिर में चुनाव होने है। यहां दलितों की आबादी 22 प्रतिशत यानी 423 सीटों में 39 सीटे आरक्षित है। पश्चिम बंगाल में साढ़े 10 प्रतिशत दलित है यानी 254 सीटों में से 18 सीटे आरक्षित है। जबकि यूपी में 2017 में चुनाव होने है और यहां साढ़े 20 प्रतिशत दलित है। और इन्हीं दलितों पर सबकी निगाहे टिकी है, क्योंकि वर्तमान में जिस तरह एक वर्ग के मतों का ध्रुवीकरण हुआ है उसमें दलित वोट बैंक के जरिए ही राजनीतिक पार्टिया टक्कर देने में सफल हो सकती है। 

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