- - पुराने रेल सुरंग का निर्माण 1860 में किया गया था, निर्माण एजेंसी ईस्ट इंडिया रेल कंपनी थी और इस परियोजना के एमडी राबर्ट स्टीफेंस थे जो रेल भाप इंजन का अविश्कार करने वाले जाॅर्ज स्टीफेंस के पुत्र थे
- - टेंडर प्रक्रिया पूरी, मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजे गए कागजात, निर्माण विभाग के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव आॅफिसर ने किया जमालपुर दौरा
- - निर्माण के लिए एक साल पहले ही मंजूर कर दी गई है राषि
(मुंगेर): यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो वो दिन दूर नहीं जब जमालपुर 154 साल बाद एक बार फिर अपने अतीत को खंगालेगा और रेल भाप इंजन के अविश्कारक जाॅर्ज स्टीफेंस के पुत्र राबर्ट स्टीफेंस द्वारा यहां किए गए कार्यों को आगे बढ़ाएगा। रेलवे जमालपुर पहाड़ में सुरंग बनाने की तैयारी में जुट गया है। वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण इस काम में देरी हो रही थी लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेष के बाद निचले स्तर से एनओसी मिल गया है। औपचारिक रूप से इस्टर्न वन एवं पर्यावरण विभाग के जोनल आॅफिस से आदेष भी कुछ दिनों के अंदर आ जाएगा। इधर, रेलवे के निर्माण विभाग ने टेंडर की प्रक्रिया षुरू कर दिया है और इस मद में एक साल पहले ही राषि तक मंजूर कर दी गई है। टेंडर की षर्तों को मंजूरी देने के लिए सभी कागजात कोलकाता स्थित जोनल मुख्यालय भेज दिया गया है। गत दिनों जोनल आफिस से चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव आॅफिसर भी जमालपुर पहुंचकर योजना की समीक्षा की थी। जमालपुर पहाड़ में नया सुरंग पुराने सुरंग से 25 मीटर हटकर बनाया जाएगा। इसकी लंबाई और चैड़ाई लगभग उतनी ही होगी जितनी पुराने सुरंग की है। लेकिन उंचाई अपेक्षाकृत अधिक रखी जाएगी ताकि भविश्य में विद्युतीकरण हो तो कोई समस्या न हो। नए सुरंग का सेक्षन लगभग घोड़े के पैर यानी नाल की तरह दिखेगा। रेलवे इंजीनियरों की मानें तो टेंडर होने के बाद अगले एक साल के अंदर ही जमालपुर पहाड़ में नया सुरंग बनाने का काम पूरा हो जाएगा।
टीम ने किया सर्वेक्षण: जिस जगह पर नया सुरंग बनना प्रस्तावित है वहां पहाड़ में दो तरह के पत्थर हैं। दोनों पत्थर की मजबूती अच्छी मानी जाती है। चूंकि सुरंग पहाड़ में बनना है इसलिए इसके लिए सेंट्रल माइनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमआरआई) से विषेशज्ञों की टीम बुलाकर पहाड़ में पत्थर की गुणवत्ता को देखकर सुरंग बनाने के लिए आवष्यक गाइडलाइन भी दिया गया है। टीम ने यह भी बताया कि किस जगह पर कैसा पत्थर है और वहां किस तरह के उपकरण का इस्तेमाल किया जाना है। रेलकर्मियों का कहना है कि एक सुरंग की वजह से यहां एक ही ट्रैक है जिसपर अप और डाउन दोनों ट्रेनें चलती हैं। इसकी वजह से आज भी कई एक्सप्रेस ट्रेनों को जमालपुर और रतनपुर में रोककर पास देना पड़ता है। अगले कुछ दिनों में मुंगेर रेल पुल का निर्माण होने के बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव और बढ़ेगा।
ईस्ट इंडिया रेल कंपनी ने बनाया था पहला सुरंग: जमालपुर पहाड़ में पुराने रेल सुरंग का निर्माण 1860 में किया गया था। निर्माण एजेंसी ईस्ट इंडिया रेल कंपनी थी और इस परियोजना के एमडी राबर्ट एस्टीफेंस थे जो रेल भाप इंजन का अविश्कार करने वाले जाॅर्ज स्टीफेंस के पुत्र थे।
कुमार गौरव,
जमालपुर

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