बिहार : खेलने और कूदने के समय में नौशाद बीमार पड़ा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 27 जून 2015

बिहार : खेलने और कूदने के समय में नौशाद बीमार पड़ा

  • आग तापने के समय हादसा से नहीं उभरा अल्पसंख्यक परिवार
  • जगत के भगवान मानने वाले चिकित्सकों के द्वार बदलकर पी.एम.सी.एच. में लाया

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पटना।यह कहा जाता है कि जबतक सांस चलता है,तबतक आस बंधा रहता है।उसी तर्ज पर जगत के भगवान भी चलने लगे हैं। जबतक परिजन के पाॅकेट में रकम है,तबतक इलाज करते हैं। जैसे ही भान होता है कि अब परिजनों से ‘चूसा’ नहीं जा सकता है। वैसे ही परामर्श देने लगते हैं कि सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज करवा लें। दवा-दारू मुफ्त में मिल जाती है। इसी तरह की मिलीजुली खबर है। गया जिले के निवासी मो. मुस्ताक बेहाल हो गए थे। अपने लाडले के इलाज में गया से पटना तक के प्राइवेट हाॅस्पिटलों में मैराथन दौड़ लगाए। जब पाॅकेट से रकम गायब होने लगी,तब जगत के भगवान ने पी.एम.सी.एच.रेफर कर दिए। 

पी.एम.सी.एच. के इन्दिरा गाँधी आकस्मिक सेन्टर। यहाँ पर परेशान परिजन तीन साल के लाडले को लेकर आए थे।उसे गोदी से उतारकर बेड पर लेटा दिया जाता है। कुर्सी पर विराजमान सी.एम.ओ. ने बच्चे के बारे में जानकारी लेते हैं। इस बच्चे का नाम नौशाद है और उसके पिताजी का नाम मो. मुस्ताक है। उम्र 3 साल। इसमें वह 6 माह से बीमार है। 6 माह से बेड पर से उतर नहीं सका। हाँ, खेलकूद भी नहीं कर सकता है। गरीबी के दंश झेलने वाले परिवार के लोगों ने बच्चे को बेड पर रहकर खेलने योग्य खिलौना भी उपलब्ध नहीं करा सकें। इसका असर बच्चे के शारीरिक और मानसिक पर पड़ने लगा है। बच्चा चिढ़चिढ़ा हो गया है। वह किसी को भी देखता है तो गजब का मुँह बनाकर रोने लगता है। 

अल्पसंख्यक परिवार के मुखिया मो.मुस्ताक कहते हैं कि हमलोग गया जिले के अलीगंज में रहते हैं। जनवरी माह में ठंड से बचने के लिए नौशाद आग ताप रहा था।इस बीच अकस्मात नौशाद के कपड़े में आग लग गयी। जबतक परिजनों के द्वारा नौशाद के कपड़े को उतारा जाता,तबतक वह काफी जल गया। बस उसी समय से परिजन परेशान होने लगे। गया से पटना तक इलाज कराया गया। इसमें सुधार नहीं हो सका। नौशाद पैर पसार नहीं सकता है। घुटना जाम हो गया है। चिकित्सक कहते हैं कि घाव ठीक होने के बाद ही पैर सीधा करने का प्रयास किया जाएगा। फिजियोथेरापी करवाने की जरूरत होगी। 

मो. मुस्ताक कहते हैं कि नौशाद की बीमारी से परेशान हो गया है। लाखों रूपए गंवा देने के बाद भी सुधार नहीं हो सका है। हाथ खाली होने पर निजी हाॅस्पिटल के जगत के भगवानों ने परामर्श देने लगे कि आपलोग पी.एम.सी.एच. में जाकर इजाज करवा लें। इन्दिरा गाँधी आकस्मिक सेन्टर में जांचोपरांत भर्ती कर लिया गया है। विभाग है प्लास्टिक सर्जरी। अब तो बाहर से दवाई खरीदकर नौशाद को इलाज करवाना पड़ेगा। 

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