मैगी के वर्तमान विवाद के बीच फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री युधवीर सिंह मालिक के कल मीडिया में छपे बयान जिसमें उन्होंने कहा की फ़ूड नियामक द्वारा मान्यता न दिए गए उत्पादों को बेचने को लेकर रिटेलरों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी, को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है ! व्यापारियों के संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा की यह बेहद एकतरफा और मनमाना नीतिगत फैसला होगा!
श्री मलिक को आज भेजे एक पत्र में कैट ने कहा है की हालाँकि अथॉरिटी द्वारा देश में सुरक्षित और मान्यता प्राप्त खाद्य वस्तुऐं बेचे जाने की भावना से हम भी सहमत हैं लेकिन इसके लिए अथॉरिटी को निर्माता के स्तर पर ही कड़े कदम उठाने चाहियें और अथॉरिटी इसके लिए अधिकृत भी है लेकिन निर्माता के स्तर पर ही इसको रोकने की बजाय रिटेलरों पर ये जिम्मेदारी मढ़ना अथॉरिटी की असफलता को दिखाता है !
कैट ने कहा की अथॉरिटी द्वारा गत 21 अप्रैल को राज्यों के फ़ूड विभागों को भेजे एक सर्कुलर जिसमें राज्यों को अथॉरिटी से अस्वीकृत खाद्य उत्पादों के निर्माण/बेचने/वितरण पर रोक लगाने की सलाह दी गयी थी, का स्वत: संज्ञान लेते हुए कैट ने 10 जून को अथॉरिटी के डायरेक्टर एनफोर्समेंट को एक पत्र भेजकर ऐसे सभी उत्पादों की सूची देने का आग्रह किया था जिससे देश भर के ट्रेड एसोसिएशन्स के मार्फ़त रिटेलरों को ऐसे उत्पाद न बेचने की सूचना दी जा सके ! अथॉरिटी कार्यालय ने सूची भेजने की बात तो दूर, पत्र का जवाब देने भी जरूरी नहीं समझा ! जब अथॉरिटी का रवैय्या इतना उदासीन है ऐसे में रिटेलरों को कैसे पता लगेगा की कौन सा उत्पाद अथॉरिटी से स्वीकृत है ! ऐसी कोई व्यवस्था न होने के बाद भी रिटेलरों को जिम्मेदार ठहराना कहाँ तक उचित है ?

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें