अली बने कवि.. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 26 जुलाई 2015

अली बने कवि..

ali-become-poet
अली आजकल अपनी एक पुरानी हॉबी को काफी गंभीरता से ले रहे हैं।इससे पहले कि वह अपनी आगामी फ़िल्म जिसका संभावित नाम 'रौरव' हो सकता है के लिए शूटिंग करे, वह इस समय मिले खाली समय का भरपूर उपयोग करना चाहते हैं।

अली अकसर कॉलेज के दिनों में कवितायेँ लिखा करते थे और उनकी गिटार पर धुन बना, गाया भी करते थे और यह बात लड़कियों के बीच बहुत पॉपुलर थी।उन दिनों वह अपने विचारों को कविताओं का रूप देते रहते थे।
लगता है अली के अंदर फिर वही पुराना अली ज़िंदा हो गया है और आजकल वह अपने घर के एक पसंदीदा कोने में बैठे कर कवितायेँ लिख रहे हैं।यदि सूत्रों का विश्वास करें तो अली जल्द ही अपनी सभी कविताओं का संकलन एक किताब के रूप में अपने फैंस के बीच लाने वाले हैं।

अली ने बताया कि पता नहीं वह कब तक लिखना जारी रख पाएंगे लेकिन फिलहाल जब उनके पास थोडा समय है तो वह कुछ कुछ पंक्तियां लिखते ही रहते हैं।उनका कहना है कि इस सब की प्रेरणा उन्हें अपने आस-पास घटित होने वाली चीज़ों से ही मिलती है वह तो सिर्फ उन्हें सजग रह कर देखते रहते हैं। निश्चित रूप से अली एक ऐसे बहुमुखी अभिनेता हैं जिनके अंदर कई छिपे हुए हुनर हैं।

कोई टिप्पणी नहीं: