झारखंड में मुख्यमंत्री की टिप्पणी से खफा भाजपा नेता - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 9 जुलाई 2015

झारखंड में मुख्यमंत्री की टिप्पणी से खफा भाजपा नेता


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झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता मुख्यमंत्री रघुबर दास की उस टिप्पणी से खफा हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीते 14 सालों में राज्य ने केवल भ्रष्टाचार देखा है। पहचान जाहिर न करने की शर्त पर भाजपा नेताओं ने गुरुवार को कहा कि टिप्पणी से ऐसा प्रतीत होता है कि अब तक के सभी मुख्यमंत्री भ्रष्ट रहे हैं। दास ने बुधवार को कहा, "भ्रष्टाचार हमें विरासत में मिला है। बीते 14 सालों में राज्य में केवल भ्रष्टाचार हुआ।" बीते साल दिसंबर में मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने वाले दास ने कहा, "अगर मैं भ्रष्टाचार का खात्मा करने में लगूं, तो इसमें कम से कम पांच साल का समय लगेगा। सभी विभागों में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।"

यह टिप्पणी हालांकि उनकी पार्टी को रास नहीं आई, क्योंकि 14 में से नौ साल प्रदेश में भाजपा की ही सरकार रही है। आधिकारिक तौर पर हालांकि भाजपा ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी का स्वागत किया है। झारखंड भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा, "मुख्यमंत्री ने एक साहसी बयान दिया है। वह भी भाजपा की पिछली सरकार में मंत्री रहे हैं। लेकिन लोग अब कार्रवाई चाहते हैं।" भाजपा के अन्य नेता उनकी टिप्पणी से सहमत नहीं हैं। भाजपा ने एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार ने तब गहरी जड़ें जमाई जब निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा साल 2006 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने कहा कि नवंबर 2000 में झारखंड के बनने से लेकर सितंबर 2006 तक राज्य में भाजपा की सरकार रही। उन्होंने कहा, "अर्जुन मुंडा तथा बाबूलाल मरांडी दोनों की सरकार में रघुबर दास मंत्री रहे।"

नेता ने कहा, "वर्तमान मुख्यमंत्री को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि बाबूलाल मरांडी या अर्जुन मुंडा के खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।" विपक्षी पार्टियों ने भी इस टिप्पणी पर चुटकी ली। कांग्रेस नेता आलोक दूबे ने कहा, "रघुबर दास को सच्चाई सामने रखनी चाहिए।" दूबे ने कहा, "यह भाजपा ही थी जिसने 14 सालों में नौ सालों तक राज्य में शासन किया। दास भाजपा सरकार में मंत्री थे।" उन्होंने कहा, "इसलिए भाजपा को राज्य में हुए सभी भ्रष्टाचारों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। सच बोलने के लिए हम मुख्यमंत्री को बधाई देते हैं। उन्हें भ्रष्टाचार के सभी मामलों की जांच का आदेश देना चाहिए।"

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