याकूब मेनन को आतंकवाद के जुर्म में मिली फांसी की सजा का सम्मान करनी चाहिए । आज पाकिस्तान सहित सम्पूर्ण विश्व इस आतंकवाद के नासूर के दुष्परिणाम को भुगत रहा है । जो भी बम्ब इत्यादि ब्लास्ट कर निर्दोष मनुष्यों की हत्या करते हैं, जिसमें महिला, बच्चे, बूढ़े , जवान ये सभी होते हैं तथा मरने वालों में सभी सम्प्रदाय के भी लोग होते हैं , इस तरह की घटना को अंजाम देने वाले को निश्चित रूप से ही मृत्युदंड की सजा मिलनी ही चाहिए , लेकिन याकूब को ये सजा जितनी देर से मिली है , इतनी देर नहीं होनी चाहिए । आज का पाकिस्तान जो कभी मूल रूप से आतंकवादियों को पैदा करने वाला देश समझा जाता था , अब जब इस नासूर ने पाकिस्तान को भी अत्यधिक दुःख पहुंचाना आरम्भ किया है , तो आज के दिनों मुस्लिम आतंकवादियों को फांसी की सर्वाधिक सजा पाकिस्तान खुद दे रहा है ।
किसी भी सम्प्रदाय का आतंकवादी यदि जनसंहार करता है , या बम्ब ब्लास्ट के माध्यम से निर्दोष मानव का जीवन छीनता है तो ऐसों को अवश्य ही मृत्युदंड की सजा मिलनी चाहिए । कुछ लोगों का यह तर्क हो सकता है की मुम्बई ब्लास्ट चूँकी अयोध्या के विवादित ढांचा गिराने के फलस्वरूप हुआ था , इसलिए इसमें नरमी बरती जा सकती थी , लेकिन यह कतई उचित नहीं की मंदिर-मस्जिद इत्यादि के झगडे में आम निर्दोष मनुष्य से उसका जीवन छीना जाय , जिनका उस झगडे से कोई मतलब भी नहीं होता । भारत के सभी सम्प्रदाय के लोगों को चाहिए की वे नफ़रत त्याग कर मेलमिलाप से रहें , पढ़ें-लिखे , मनुष्य बनें , महान बनें और अपने परिवार समाज तथा राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदार नागरिक बनकर क़ानून का सम्मान करते हुए आतंकवाद तथा आतंकवादी का विरोधी बने ।
आमोद शास्त्री ,
दिल्ली।
मोब=9818974495 & 9312017281

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