एक शोध में कहा गया है कि आपका आहार जितना विविधतापूर्ण होगा, आपके देर तक स्वस्थ बने रहने की संभावनाएं उतनी ही बेहतर होंगी। अमेरिका की जैव प्रौद्योगिकी कंपनी 'माइक्रोबायोम थेराप्यूटिक्स' के उपाध्यक्ष एवं मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी मार्क हीमन ने कहा कि बीते 50 वर्षो के दौरान आहार विविधता की कमी मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल तकलीफें और अन्य बीमारियां बढ़ने की मुख्य वजह हो सकती है। हीमन ने कहा कि हमारे पेट के बैक्टीरिया को बेहतर तरीके से काम करने के लिए विविधतापूर्ण आहार की जरूरत होती है।
मौजूदा कृषि पद्धतियों के साथ ही जलवायु परिवर्तन ने उस आहार विविधता को नुकसान पहुंचाया है। दुनिया की करीब 75 फीसदी आबादी महज पांच पशु प्रजातियों और 12 पौध प्रजातियों या किस्मों का सेवन कर रही है। हीमन ने शिकागो में इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी (आईएफटी) द्वारा आयोजित 'आईएफटी15 : वेयर साइंस फीड्स इनोवेशन' में एक विचार-गोष्ठी में कहा कि उन 12 प्रजातियों या किस्मों में से चावल, मक्का और गेहूं सभी कैलोरी में 60 फीसदी योगदान देते हैं।
हीमन ने कहा, "किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र की तरह प्रजातियों में सर्वाधिक अलग वह है, जो स्वास्थ्यकर है।" उन्होंने कहा, "अब तक बीमारी की जिन भी अवस्थाओं का अध्ययन किया गया है, करीब-करीब प्रत्येक अवस्था में सूक्ष्म जैव तंत्र (माइक्रोबायोम) ने आहार विविधता खो दी। कुछ ही प्रजातियों का प्रभुत्व दिखाई पड़ता है।" हीमन ने अपने शोध में पाया कि प्री-डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में इन रोगों से रहित लोगों की तुलना में एक अलग माइक्रोबायोम रूप है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें