दिल्ली के ओखला में कल लूट के बाद लुटेरों का पीछा जनता द्वारा किया जाना लगता है जनता ने दिल्ली के प्रथम सेवक श्री केजरीवाल जी के एफएम चैनल पर लगातार दिए गए उपदेश का पालन करने का यथा सम्भव प्रयत्न तो किया , लेकिन श्री केजरीवाल जी ने एफएम चैनल्स के माध्यम से अपने वोटर्स को यह नहीं समझाया की यदि लुटेरे\अन्यअपराधी भागते समय या किसी समय कोई लालच दे तो उस लालच में नहीं आते , इसीलिए लूटे गए 22 लाख रुपयों में से जब लुटेरों ने पीछा कर रहे आमआदमी के वोटर्स के ऊपर दो लाख रुपये हवा में उछाल दिए तो सभी लोग लुटेरों का पीछा करना छोड़ रुपया बटोरने में लग गए । बचपन में गांव में सुनता था की जब चोर चोरी करने आते थे तो कुत्ते न भौंके इसलिए थाली में चावल या बाल्टी भर के दूध कुत्तों को पीने देदेते थे , लुटेरों ने दिल्ली की जनता के ऊपर भी उसी फार्मूले का प्रयोग किया ।
एक बात जो समझ नहीं आई की जब लुटेरों का दिमाग इतना ही तेज था तो वो आईएएस , आईपीएस या कोई राष्ट्रीयस्तर का नेता क्यों नहीं बना ? यदि इतने तेज दिमाग से नेता , आईएएस , आईपीएस बनता तो देश लूटने का कितना अच्छा मौका मिलता और माननीय भी कहलाता । हाँ , यदि नेता बनने के लिए जैसे केजरीवाल ने बिना संस्था के ही संस्था के नाम से ( इंडिया अगेंस्ट करप्शन) ही जनलोकपाल आंदोलन कर करोड़ों रुपया गलत तरीके से जुटा बाद में उन्हीं पैसों से अपना खूब प्रचार करवा नेता बने , यदि ये लुटेरे भी उसी तरह नेता बनने के लिए पहले रुपये जुटाने में लगे हों तो कोई आश्चर्य की बात नहीं । खैर , जो भी कहें लुटेरों के दिमाग को दाद तो देनी ही होगी की कितना अच्छा नब्ज उसने दिल्ली की जनता के वोटर्स का पकड़ा ?
आमोद शास्त्री,
दिल्ली ,
मोब= 9818974495 & 9312017281 ,

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