डवलपमेंट कम्युनिकेशन नेटवर्क चरखा व जनमत शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 14 जुलाई 2015

डवलपमेंट कम्युनिकेशन नेटवर्क चरखा व जनमत शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित

  • रिसर्च, मीडिया एजुकेशन, एडवोकेसी, अवाॅरनेस व कैपिसिटी बिल्ंिडग पर आधारित व जनमुद्दों को मुख्यधारा मीडिया में स्थान दिलाने की कवायद में आयोजित तीन दिवसीय (11 से 13 जुलाई 2015 तक) मीडिया वर्कशाॅप का समापन

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डवलपमेंट कम्युनिकेशन नेटवर्क, चरखा, नई दिल्ली व जनमत शोध संस्थान, दुमका के संयुक्त तत्वावधान में 13 जुलाई 2015 को एलआईसी काॅलोनी स्थित जोहार मानव संसाधन केन्द्र में आयोजित त्रिदिवसीय मीडिया वर्कशाॅप विधिवत संपन्न हो गया। रिसर्च, मीडिया एजुकेशन, एडवोकेसी, अवाॅरनेस व कैपिसिटी बिल्ंिडग पर आधारित व जनमुद्दों को मुख्यधारा मीडिया में प्रमुखता से स्थान दिलाने की कवायद में 11 से 13 जुलाई 2015 तक आयोजित इस त्रिदिवसीय मीडिया वर्कशाॅप में समाचार, फीचर, लेख, निबंध, शोध व संपादकीय से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर प्रतिभागियों का ध्यान केन्द्रीत कराया गया। विनय शंकर सहायक प्रोफेसर, यूनिवरसिटी स्कूल आॅफ मास कम्युनिकेशन, गुरु गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ की देखरेख व उनके प्रशिक्षण तथा जनमत शोध संस्थान के सचिव अशोक सिंह के संचालन आयोजित मीडिया वर्कशाॅप में समाचारों का संकलन, समाचारों के लिखने के तरीके, समाचारो का तकनीकी पहलु, प्रभावित पाठक वर्ग, समाज/ संबंधित विभागों/स्थानीय प्रशासन/सरकार पर पड़ने वाले प्रभाव तथा उससे होने वाले हानि-लाभ की विस्तृत जानकारी वर्कशाॅप के माध्यम से प्रतिभागियों के बीच दी गई। इसी तरह फीचर राईटिंग, लेख, निबंध, फोटोग्राफी व संपादकीय से जुड़ी जानकारियों की सूक्ष्मता से भी उन्हें अवगत कराया गया। 

इस तीन दिवसीय मीडिया वर्कशाॅप मंे विभिन्न क्षेत्रों से कुल 20 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसमें प्रखण्ड स्तरीय विभिन्न अखबारों के संवाददाताओं सहित सामाजिक कार्यकर्ता व  विभिन्न महाविद्यालयों व एसकेएमयू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत स्नातक/स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राएँ शामिल थे। प्रतिभागी कनकलता हेम्ब्रम, सुशीला मराण्डी, नीलम कुमारी, विक्की कुमार साह, निर्मला टुडू, विभा कुमारी, सुस्मिता साहा, आबदा हसन, प्रेम प्रकाश मुर्मू, निलेश कुमार पाल, लखीन्द्र मंडल, सबिना हाँसदा, दिलदार अंसारी, दशरथ महतों, राम कुमार दर्वे, सुजाता कर्ण, सपना पाठक, सुषमा मरांडी, जयती कुमारी व सौरभ कुमार इस प्रशिक्षण को अपने लिये मील का पत्थर कहा। वर्कशाॅप के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उप निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क, संताल परगना प्रमण्डल, दुमका अजय नाथ झा ने पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराते हुए उनमें उत्साह का संचार किया। एसकेएमयू हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डा0 प्रमोदनी हाँसदा ने समाज में मीडिया की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। डा0 अमरेन्द्र कुमार सिन्हा ने मीडिया से समाज को होने वाले हानि-लाभ से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उद्धाटन सत्र में पत्रकार प0 अनूप कुमार वाजपेयी ने भी मौजूद प्रशिक्षणार्थियों को टिप्स दिये। पत्रकार राजीव रंजन, राजकुमार उपाध्याय, अमरेन्द्र सुमन, शैलेन्द्र सिन्हा, कुमार प्रभात व अन्य ने वतौर रिसोर्स पर्सन विषय वार अपनी-अपनी बातों को रखा। 
                                       
फीचर लेखन में सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दे, विषय का चयन, संबंधित क्षेत्र/स्थल की पहचान, पीडि़त पक्ष की अभिव्यक्ति, बुद्धिजीवियों/नागरिकों/स्थानीय स्तर पर जानकारों का मन्तव्य, संबंधित विभाग से जानकारी/ आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण, सुविधाएँ, सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक स्तर का विवरण, स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से होने वाले कुप्रभाव, व अन्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों व लिखने वालों की मानसिकता से पत्रकार अमरेन्द्र सुमन ने प्रतिभागियों को अवगत कराया।

जनमत शोध संस्थान के सचिव अशोक सिंह के अनुसार रिसर्च, मीडिया एजुकेशन, एडवोकेसी, अवाॅरनेस व कैपिसिटी बिल्ंिडग पर आधारित व जनमुद्दों को मुख्यधारा मीडिया से जोड़ने के लिये पिछले कई वर्षों से काम कर रही संस्था जनमत शोध संस्थान का मानना है संताल परगना जैसे अति पिछड़े क्षेत्रों में जहाँ एक ओर जनमुद्दों की भरमार है वहीं दूसरी ओर इन मुद्दों की पहचान कर पीडि़त प़क्षों को न्याय दिलाना वर्तमान में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बन जाता है। विस्थापन, पलायन, दिहाड़ी मजदूरी, मनरेगा, पत्थर उद्योग, बीड़ी उद्योग, आदिवासी धर्म-संस्कृति, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व धार्मिक सरोकार जैसे असंख्य मुद्दे हैं जिनपर लगाातर कार्य करते रहने के बाद भी और अधिक काम करने की लालसा हमेशा बनी रहती है। महिला पत्रकारों की संख्या संताल परगना में शून्य के बराबर है। पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलने की बात तो की जाती है किन्तु मुख्य धारा मीडिया में महिलाओं का प्रतिनिधित्व शून्य के बराबर देखा जाता है।ं महिलाओं को इस क्षेत्र में अधिक से अधिक सहभागिता निभाने की जरुरत है ताकि महिलाएँ एक-दूसरे की समस्याओं से पूरी तरह अवगत हों उसे पटल पर ला सकें। इस तीन दिवसीय मीडिया कार्यशाला में दृश्यों के माध्यम से भी प्रतिभागियों को समझाया गया। अपने-अपने विचार प्रकट करते हुए प्रतिभागियों ने कार्यशाला को काफी महत्वपूर्ण बताया। संताल परगना में ऐसे कार्यशाला के लगातार आयोजन पर भी प्रतिभागियों ने बल दिया। 

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