राजीव ने मारवाड़ी में लिखी पैग़म्बर मुहम्मद साहब की जीवनी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 23 जुलाई 2015

राजीव ने मारवाड़ी में लिखी पैग़म्बर मुहम्मद साहब की जीवनी

mohammad-sahib-biography-in-marwari
राजस्थान में झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ तहसील के गांव कोलसिया के एक हिंदू युवक ने इस्लाम धर्म के पैग़म्बर मुहम्मद साहब की जीवनी मारवाड़ी भाषा में लिखी है. किताब के लेखक राजीव शर्मा (27) ने बताया कि यह एक ईबुक है, जिसका नाम है- पैगम्बर रो पैगाम. राजीव के मुताबिक पैग़म्बर मुहम्मद साहब पर किसी हिंदू द्वारा मारवाड़ी में लिखी गई यह विश्व की संभवतः पहली ईबुक है. किताब लिखने की प्रेरणा के बारे में उन्होंने कहा- जब मैं कोलसिया के राजकीय विद्यालय में 9वीं कक्षा का छात्र था तब घर पर एक निशुल्क लाइब्रेरी भी चलाता था.

इस लाइब्रेरी का नाम गांव का गुरुकुल था. उस समय कई देशों से यहां किताबें और पत्र-पत्रिकाएं आती थीं. लाइब्रेरी में मैंने हिंदू धर्म के अलावा इस्लाम, सिक्ख तथा ईसाई धर्म के महापुरुषों के जीवनी पढ़ी. उनके अध्ययन से पाया कि सभी धर्म अमन, नेकी और भाईचारे की शिक्षा देते हैं. खासतौर से पैग़म्बर मुहम्मद साहब का संपूर्ण जीवन इंसाफ, शांति, भलाई और एकता की मिसाल है. उन्होंने हमेशा उन बातों पर जोर दिया जिससे दुनिया में सच का उजाला कायम रहे. इसलिए मैंने निश्चय किया कि मैं मुहम्मद साहब की जिंदगी से जुड़ी बातों को मारवाड़ी में प्रस्तुत करूंगा.

mohammad-sahib-biography-in-marwari
उन्होंने कहा कि दुनिया में धार्मिक आधार पर बढ़ती हिंसा की अहम वजह यह है कि हम खुद को ही सर्वश्रेष्ठ मानने के अहंकार में इतने ज्यादा आगे चले गए हैं कि भाईचारे और अमन के रास्ते पीछे भूल आए. हमें उन रास्तों की ओर वापस लौटना होगा, जहां से हम तरक्की की ओर ही नहीं बल्कि एक दूसरे को जानने तथा धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करना भी सीखें. आज किसी को भी धर्म बदलने की ज़रूरत नहीं है. ज़रूरत है हिंदू को अच्छा हिंदू बनने तथा मुसलमान को अच्छा मुसलमान बनने की. हमें उन सभी अच्छाइयों का स्वागत करना चाहिए जो किसी भी धर्म या देश में मौजूद हैं.

किताब के संबंध में उन्होंने कहा कि इसे उनकी लाइब्रेरी के ब्लॉग- गांव का गुरुकुल डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम से निशुल्क प्राप्त किया जा सकता है. उनकी यह किताब भारत सहित सऊदी अरब, आस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के मीडिया में भी चर्चित हो चुकी है. गौरतलब है कि राजीव शर्मा इससे पहले हनुमान चालीसा का मारवाड़ी में अनुवाद कर चुके हैं. साथ ही जैन धर्म के उपदेश, अब्राहम लिंकन के ऐतिहासिक पत्र, रूसी लेखक टॉलस्टॉय की कहानियों को भी मारवाड़ी में ई-बुक के ज़रिए पेश कर चुके हैं.

कोई टिप्पणी नहीं: