आनंद पर्वत के पंजाबी बस्ती के इलाके में हुई मीनाक्षी नाम की युवती की हत्या में श्री केजरीवाल द्वारा मात्र पुलिस को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है । क्या उस बस्ती में केजरीवाल को सीएम बनाने वाले लोग नहीं थे, जो उस युवती की चीख सुनकर उसको बचाने आते ? दिल्ली की दो करोड़ की आवादी पर हर जगह हर व्यक्ति के साथ दिल्ली की साठ हजार पुलिस खड़ी रह सकती है , क्या यह सोच ही अव्यवहारिक नहीं है ? इसी तरह कल जब अलीपुर के भीड़भाड़ वाले इलाके में एक युवक को ज़िंदा जलाया गया तो आमआदमीपार्टी के वोटर्स वहाँ क्या तमाशा देख रहे थे ? जो वहाँ वोटर्स की इकट्ठी भीड़ ने उस युवक को बचाने का यत्न नहीं किया ? हम हर काम के लिए जहां पुलिस की गलती नहीं होती है , उसमें भी पुलिस को घसीटने का काम करते हैं तो यह सर्वथा नाजायज है ।
हम इस बात से हमेशा खुद को दूर रखने का यत्न करते हैं की मनुष्य होने के नाते हम सामाजिक प्राणियों की जिम्मेदारी क्या है ? जहांतक पुलिस की बात है , तो वे शर्मा पुलिस , सिंह पुलिस , चौधरी पुलिस , ठाकुर पुलिस , खान पुलिस इत्यादि इत्यादि पुलिस भी इसी समाज के गुण-अवगुण को लेकर पुलिस की नौैकरी ज्वाइन करते हैं । जो यदि अन्य डिपार्टमेंट यहां तक की शिक्षा या न्यायपालिका के डिपार्टमेंट तक में देखा जाय तो शिक्षक एवम न्यायाधीश तक पैसे के लालच में इंसानियत तथा न्याय के खिलाफ पैसों के समक्ष घुटने टेकते नजर आते हैं । यदि केजरीवाल के कार्य को सही से देखा जाय तो जो "इंडिया अगेंस्ट करप्शन" नाम की संस्था तक नहीं थी , उस संस्था के माध्यम से उसने करप्शन के खिलाफ आंदोलनकर खुद को समाज में मसीहा साबित करवा लिए । और आंदोलन करता कौन है ? आंदोलन वह करता है जिसने उसके लिए पहले जमीनीस्तर पर जूझा हो , लेकिन केजरीवाल का न्यूजपेपर तथा न्यूजचैनल के स्क्रीन के अतिरिक्त करप्शन या करप्टसिस्टम के खिलाफ जमीनीस्तर पर सूई के नोक के बराबर भी काम किया हुआ नहीं था , फिर वह आंदोलनकारी कैसे होगया ?
कैसे जो संस्था ही नहीं थी, और जो काम कभी उसने अपने जीवन में किया ही नहीं था , उस संस्था के नाम पर तथा उस काम के नाम पर करोड़ों रुपये ले लिए ? पुलिस ने इस दुराचार को होने से क्यों नहीं रोका , इसपर केजरीवाल का ध्यान क्यों नहीं ? साथ ही यदि पुलिस को यह पता होती की यह घटना घटने वाली है , तो जब केजरीवाल का कानूनमंत्री पूर्व में फर्जी तरीके से डिग्री तैयार करवा रहा था , तभी क्या पुलिस उसको गिरफ्तार नहीं कर लेती ? यदि पुलिस को पूर्व पता होती की केजरीवाल का एक विधायक दूसरों का जमीन फर्जी तरीके से बेचने के लिए जमीन का कागजात अपने नाम से तैयार करवा रहा है , तभी पुलिस विधायक मनोज कुमार को गिरफ्तार क्यों नहीं कर लेती ?
यदि उस युवती की हत्या होते देख आमआदमीपार्टी के वोटर्स जो उस मोहल्ले में थे , उसको नहीं बचाया तो पुलिस का यह काम है की अपराधी को पकड़ उसको कानूनन सजा दिलवाए जो पुलिस कर रही है । लेकिन सभी सामाजिक प्राणियों के अंदर कर्तव्यपरायणता को जागृत करने के लिए मूलरूप से सामाजिक नवचेतना को लाने की आवश्यकता है , लेकिन केजरीवाल जैसे मौकापरस्त तथा मात्र मीडिया प्रचार पाने के उद्देश्य से राजनीति करने वाले लोग इस उचित व्यवस्था के सर्वाधिक दुश्मन हैं ।
आमोद शास्त्री ,
दिल्ली ।
मोब= 9818974495 & 9312017281 ,

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