कांग्रेस ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(एनएसए) स्तर की बातचीत के लिए माहौल अनुकूल नहीं है लेकिन अगर बातचीत करनी है तो इस बात को सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि उसके सकारात्मक नतीजे आएं। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में विशेष संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पाकिस्तान में सरकार के साथ ही वहां की फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई की अहम भूमिका होती है इसलिए कभी भी बातचीत की सफलता के लिए पहले यह भी देखना पडेगा कि उसकी सरकार के साथ वहां की फौज और आईएसआई सहमत है या नहीं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के इसी माहौल को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस रूस के ऊफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच हुई बातचीत के विवरण को लगातार सार्वजनिक करने की मांग करती रही है। उनका कहना था कि पाकिस्तान में हमारे यहां की तरह लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि श्री शरीफ ने जैसे ही ऊफा में श्री मोदी के साथ बातचीत की और एनएसए स्तर की वार्ता संबंधी संयुक्त बयान दिया तो यह पाकिस्तान की फौज और आईएसआई को रास नहीं आया इसलिए दोनों प्रधानमंत्रियों की वार्ता के कुछ ही देर बाद संघर्ष विराम का उल्लंघन शुरू हो गया और आतंकवादियों की सक्रियता बढ गयी।
श्री शर्मा ने आरोप लगाया कि ऊफा की बातचीत के बाद एनएसए स्तर की वार्ता को लेकर सरकार ने संसद तथा देश की जनता को लगातार अंधेरे में रखा है। सरकार ने बातचीत और एनएसए के एजेंडे की जानकारी देने की कांग्रेस की मांग को अनसुना किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनएसए स्तर की बातचीत शुरू करने की पहल करके सरकार ने पाकिस्तान के साथ भारत की नीति की अनदेखी की है। उनका कहना था कि हमारी स्पष्ट नीति रही है कि जब तक वह मुंबई हमलों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है तब तक उसके साथ बातचीत नहीं की जानी चाहिए लेकिन सरकार ने ऊफा वार्ता के बाद पैदा हुई जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया और एनएसए स्तर की बातचीत की पहल को जारी रखा।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि ऊफा वार्ता के बाद पाकिस्तान की तरफ से लगातार हो रही फायरिंग और जम्मू-कश्मीर के साथ ही पंजाब में हुई आतंकवादी घटना से साफ हो गया था कि वहां की फौज और आईएसआई अपने प्रधानमंत्री की ऊफा वार्ता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हुर्रियत का इस्तेमाल अपने मुद्दे के प्रचार प्रसार के लिए कर रहा है। उनका आरोप था कि सरकार ने हुर्रियत नेताओं को तरजीह देकर उनके आधार को बढाया है। श्री शर्मा ने कहा कि हुर्रियत नेताओं का कोई वजूद नहीं है, उनका जनाधार नहीं है इसलिए सरकार को उन्हें महत्व नहीं देना चाहिए। उन्हें महत्व देने से वार्ता का फोकस आतंकवाद की जगह कश्मीर हो जाता है। उनका कहना था कि देश की सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति नहीं हो सकती है।

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