सांसदों को लोकसभा से निलंबित किये जाने के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 4 अगस्त 2015

सांसदों को लोकसभा से निलंबित किये जाने के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन

अपने 25 सांसदों को लोकसभा की पांच दिन की कार्यवाही से निलंबित किये जाने का कांग्रेस द्वारा विरोध किये जाने के बीच भाजपा संसदीय दल ने मुख्य विपक्षी दल पर नकारात्मक, अवरोधक और विकास विरोधी होने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ आज एक प्रस्ताव पारित किया। उसने कहा कि कांग्रेस का रवैया भारत के दुनिया की महत्वपूर्ण ताकत बनने के प्रयासों में बाधक साबित होगा।

संसद भवन परिसर में जहां सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने अपने 25 सांसदों को निलंबित किये जाने के विरोध में धरना दिया, वहीं नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा संसदीय दल की बैठक में सत्तारूढ पार्टी ने निलंबन को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा। भाजपा ने कांग्रेस को पूर्व में उसके शासनकाल में आपातकाल लगाये जाने की याद दिलाते हुए उसकी आलोचना की।

कांग्रेस द्वारा सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटने की प्रतिबद्धता जताए जाने के बीच भाजपा ने कहा कि इस मांग का कोई आधार नहीं है और संसदीय दल अपने नेताओं के साथ खड़ा है। भाजपा संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है, कांग्रेस ने एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी को त्याग दिया है और संसद, विशेष तौर पर राज्यसभा में अपने संख्या बल का इस्तेमाल कर रही है। इसमें कहा गया है, भाजपा संसदीय दल, कांग्रेस के नकारात्मक, अवरोधक और विकास विरोधी संकीर्ण सोच की निंदा करती है क्योंकि इसका दीर्घावधि में देश पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पडेगा जो दुनिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक ताकत के रूप में उभर रहा है।

बैठक के बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस विध्वंसक विपक्षी पार्टी बन गई है। भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा गया कि सरकार ने मानसून सत्र में सदन को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास किया, साथ ही कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया गया कि मुख्य विपक्षी पार्टी प्रारंभ में व्यापमं और ललित मोदी प्रकरण पर चर्चा करने के लिए तैयार थी लेकिन उसने बाद में यूटर्न ले लिया।

बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि कांग्रेस ने इस बारे में वित्त मंत्री और राज्य सभा में सदन के नेता अरूण जेटली द्वारा बुलायी गई बैठक में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया और 31 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाने के सरकार के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। इसमें विपक्षी दल पर संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे के तहत काम करने का आरोप लगाया गया। भाजपा के प्रस्ताव में कांग्रेस पर आरोप लगाया गया है कि वह जानबूक्षकर देश को आगे बढ़ाने के मोदी सरकार के प्रयासों को बाधित करने का प्रयास कर रही है।

इसमें कहा गया है कि कांग्रेस संसद के पिछले सत्रों के दौरान कामकाज की बेहतर स्थिति से स्तब्ध रह गई। प्रस्ताव के अनुसार, स्तब्ध कांग्रेस ने इसके बाद अर्थव्यवस्था को बहाल करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाये जा रहे जरूरी आर्थिक सुधारों और सरकार की कल्याण एवं विकास नीतियों का मार्ग को रोकने की नीति तैयार की। यह उसकी राजनीतिक रणनीति बन गई है जिस पर कांग्रेस ने मानसून सत्र में पूरी ताकत से अमल किया है। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता कांग्रेस के आंखों का कांटा बन गई है।

लोकसभा से अपने 25 सांसदों को निलंबित किये जाने के विरोधस्वरूप पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतत्व में कांग्रेस सांसदों ने आज संसद भवन परिसर में धरना दिया और पुरजोर शब्दों में कहा कि संसद से पार्टी के सभी सदस्यों को बाहर किये जाने के बाद भी उनकी भाजपा नेताओं के इस्तीफे की मांग कमजोर नहीं पड़ेगी।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के 25 सदस्यों को निलंबित करने के स्पीकर सुमित्रा महाजन के फैसले को लोकतंत्र की हत्या करार दिया जबकि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग को उठाना जारी रखेगी।

सोनिया ने कहा कि संसद की कार्यवाही चलाना सरकार की जिम्मेदारी है। हमारे सांसदों का निलंबन अलोकतांत्रिक है। लोकतंत्र की हत्या हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने संसद परिसर में धरने के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, ए के एंटनी और आनंद शर्मा के साथ स्पीकर के फैसले के खिलाफ नारे भी लगाए। धरने में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी हिस्सा लिया।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हम अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे और जहां तक भ्रष्टाचार के मुद्दों का सवाल है और सुषमा एवं व्यापमं का विषय है, हमारे दबाव में कोई कमी नहीं आयेगी। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि इस्तीफा कांग्रेस पार्टी नहीं बल्कि देश की जनता मांग रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि व्यापमं ने मध्यप्रदेश में हजारों लोगों के भविष्य को बर्बाद कर दिया है। इस बात के स्पष्ट साक्ष्य हैं कि सुषमाजी ने नियमों को तोड़ा है। राजस्थान की मुख्यमंत्री (वसुंधरा राजे) की ललित मोदी के साथ वित्तीय संलिप्तता के स्पष्ट साक्ष्य हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के मन की बात सुननी चाहिए।

धरना दे रहे नेता वी वांट जस्टिस, तानाशाह शर्म करो जैसे नारे लगा रहे थे। कांग्रेस सदस्यों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर धरना दिया। सदस्य अपनी बांह पर काली पटटी बांधे हुए थे। सपा और राजद के सदस्यों ने भी कांग्रेस सांसदों के साथ धरने में हिस्सा लिया। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का फैसला कानून सम्मत नहीं है। मुलायम ने कहा कि उन्होंने स्पीकार से निलंबन पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मुद्दे के समाधान के लिए कांग्रेस के 25 सदस्यों को निलंबित करना कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इसे पहले भी देश के समक्ष उठाया, सरकार और संसद के समक्ष उठाया। हम चाहते हैं कि संसद सुचारू रूप से चले। सरकार का यह दायित्व है कि वह हमारी चिंताओं पर ध्यान दे। मनमोहन सिंह ने कहा, कुछ मंत्रियों जिनके आचारण संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं, हमारी मांग इस बारे में पूरी तरह से उचित है कि इन मंत्रियों को इस्तीफा दे देना चाहिए।

वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसदों के साथ जो कुछ किया गया, वैसा ही पूरे देश में कालेज छात्रों, इंटरनेट, विभिन्न संस्थानों और किसानों के साथ भी किया जा रहा है। राहुल ने कहा, भूमि विधेयक पर कांग्रेस उनके सामने खड़ी हो गई। वे (सरकार) पहले चिल्लाये, फिर धमकाया और फिर भाग खड़े हुए। इसी तरह से भ्रष्टाचार, व्यापमं, राजस्थान की मुख्यमंत्री और सुषमा स्वराज के मुद्दे पर, हम अपने दबाव को कम नहीं करेंगे, चाहे हमें संसद से बाहर कर दिया जाए या संसद में प्रवेश नहीं करने दिया जाए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पूरे देश में सरकार को घेरेगी। उन्होंने कहा, केवल मैं उनका इस्तीफा नहीं मांग रहा हूं, कांग्रेस इस्तीफा नहीं मांग रही है बल्कि भारत के लोग इस्तीफा मांग रहे हैं। मैं केवल देश की जनता की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा हूं। प्रधानमंत्री को अपने मन की बात कहने की आदत है, उन्हें देश के लोगों के मन की बात सुननी चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं: