अरविंद केजरीवाल के खिलाफ विज्ञापन के मुद्दे को लेकर FIR - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 4 अगस्त 2015

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ विज्ञापन के मुद्दे को लेकर FIR

जहां एक ओर दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को इलाहाबाद हाईकोर्ट से हल्की राहत मिली है तो वहीं दूसरी ओर से टीवी में लंबे विज्ञापन के मुद्दे पर उनके खिलाफ हाई कोर्ट में एक ओर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार के विज्ञापनों में केजरीवाल सरकार क्यों लिखा जा रहा है। संविधान में दिल्ली सरकार होना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ के समक्ष यह याचिका वरुण कुमार माहला ने दायर की है। याचिका पर आज सुनवाई होने की संभावना है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछले कुछ समय से मेट्रो, समाचार पत्रों, टीवी चैनल, रेडियो आदि में विज्ञापन आ रहे है कि केजरीवाल सरकार ने रचा इतिहास, यही है केजरीवाल सरकार का वायदा-जो कहा वो किया, जिसमें संविधान का नाम न होकर केजरीवाल का नाम ज्यादा लिया जा रहा है।

संविधान के अनुच्छेद 239एए में साफ तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र या फिर दिल्ली सरकार का उल्लेख है। याचिका में कहा गया है कि संविधान में कहीं भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम से सरकार का उल्लेख नहीं है। लेकिन सरकार आम लोगों व सरकारी धन का दुरुपयोग कर केजरीवाल के नाम को फेमस कर रही है। लिहाजा याचिकाकर्ता के मुताबिक दिल्ली सरकार को केजरीवाल सरकार नहीं कहा जा सकता है।

दिल्ली सरकार या फिर राज्य सरकार किसी के नाम से नहीं जानी जा सकती है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विज्ञापनों में केजरीवाल सरकार का उल्लेख कर संविधान के अनुच्छेद 14 व 19 में किए गए प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में दिल्ली सरकार को केजरीवाल सरकार के नाम से जारी सभी विज्ञापनों को वापस लेने का निर्देश दिया जाए और सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए इन विज्ञापनों पर रोक लगाई जाए। सीएम केजरीवाल के खिलाफ यह कोई पहला मामला नहीं है इसके पहले भी कई लोग उनके द्वारा दिए इस तरह के विज्ञापन के बारे काफी कुछ बयान दे चुके हैं। वाबजूद इसके यह विज्ञापन अभी भी टीवी पर आ रहा है।

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