संसद में पिछले कुछ दिनों से जारी टकराव के हालात सोमवार को भी खत्म होते नहीं दिखे। मानसून सत्र शुरू होने के दो हफ्ते बाद पहली बार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ललितगेट मुद्दे पर सफाई देने की कोशिश की। लेकिन विपक्ष ने उन्हें पूरी बात नहीं रखने दी। सुषमा ने हंगामे के बीच दिए बयान में कहा, ''मैंने कभी भी ललित मोदी के लिए किसी भी सरकार से रिक्वेस्ट नहीं की। मैं चर्चा के लिए आज और अभी तैयार हूं। दो हफ्ते से हंगामा हो रहा है। मैं दो हफ्ते से संसद आ रही हूं। जिस तथ्य के आधार पर नोटिस दिया गया है, वह निराधार है।'' हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस बीच, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर वेंकैया नायडू ने कहा है कि संसद में जारी टकराव को खत्म करने के लिए पीएम अब खुद दखल दे सकते हैं।
कांग्रेस पार्लियामेंट्री बोर्ड की सोमवार सुबह हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- ‘‘भाजपा ने ही ‘इस्तीफा अभी और बहस बाद में’ का सिद्धांत यूपीए सरकार के वक्त कम से कम 5 बार अपनाया था। हम भी उसी पर चल रहे हैं। पीएम का काम पर ध्यान नहीं है। भाजपा चाहती है कि पहले चर्चा और बातचीत हो, इसके बाद वह कार्रवाई करेगी। लेकिन यह शर्त कांग्रेस को मंजूर नहीं है। हम हर मुद्दा पुख्ता सबूतों के साथ उठा रहे हैं। लेकिन सरकार कोई एक्शन नहीं लेना चाहती। वह अपनी संख्या के बूते अड़ियल रुख अपना रही है जबकि उसका रवैया जिम्मेदारी वाला होना चाहिए। वह जांच के बजाय सिर्फ डिबेट चाहती है। यह हमें मंजूर नहीं है। जो मन की बात करने का दावा करते हैं, उन्होंने अब मौन व्रत ले लिया है।’’
कांग्रेस की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा, ''हम बीजेपी के पुराने रवैये की बराबरी नहीं कर रहे हैं। सरकार की बेशर्मी के कारण हम विरोध कर रहे हैं। संसद चले लेकिन उससे पहले सुषमा, वसुंधरा के इस्तीफे लेने होंगे। सरकार बहुमत का घमंड दिखा रही है। मोदी पैकेजिंग के मास्टर हैं, काबिल सेल्समैन हैं। हेडलाइन बनवाते हैं। चालाक न्यूज मैनेजर हैं। साथियों के करप्शन मामले में मन की बात क्यों नहीं कर रहे हैं।'' दूसरी ओर, एक टीवी चैनल से बातचीत में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जब तक दागी मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक कांग्रेस संसद नहीं चलने देगी।
एनडीए सरकार संसद में टकराव खत्म करने के लिए पीएम को आगे का लाने की सोच रही है। सरकार चाहती है कि पीएम व्यापमं और ललितगेट मामले पर संसद में दखल दें ताकि सदन का काम भी हो सके। नायडू के मुताबिक, ''अगर बहस की इजाजत मिलती है और ऐसा करने की जरूरत पड़ी तो पीएम इस मामले में बयान दे सकते हैं।उन्होंने ऐसा पहले भी किया है और अब भी कर सकते हैं।''
मानसून सत्र में अब तक हंगामे के चलते कोई काम नहीं हो सका है। ललितगेट, व्यापमं जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष खासकर कांग्रेस की ओर से सरकार पर तीखे हमले किए जा रहे हैं। वहीं, सरकार की तरफ भी कांग्रेस पर पलटवार किया जा रहा है। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होगा। तब तक शनिवार-रविवार छोड़कर सिर्फ 9 दिन बैठक होगी। अब तक एक भी दिन पूरी तरह से काम नहीं हो सका है। कांग्रेस व्यापम और 'ललितगेट' मामले में सुषमा, शिवराज और वसुंधरा का इस्तीफा मांग रही है। हालांकि, सरकार ने भी साफ कर दिया है कि सुषमा स्वराज, शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे में से कोई भी इस्तीफा नहीं देगा।
ब्रिटेन के अखबार द संडे टाइम्स ने 14 जून को एक खबर छापी जिसके बाद देश में बड़ा विवाद शुरू हो गया। अखबार के मुताबिक जुलाई 2014 में ललित मोदी ने पत्नी मीनल मोदी की पुर्तगाल में कैंसर सर्जरी से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से संपर्क किया। मोदी को ब्रिटेन से बाहर जाने की इजाजत नहीं मिल रही थी। सुषमा ने ब्रिटेन स्थित भारतीय मूल के सांसद कीथ वाज से बात की। उन्हें बताया कि अगर मोदी को ट्रेवल डॉक्यूमेंट्स दिए जाते हैं तो इससे भारत-ब्रिटेन के संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा। सुषमा की इसी मदद से सरकार बैकफुट पर आ गई। जो सरकार एक साल तक बेदाग गवर्नेंस का प्रचार कर रही थी, उसी की विदेश मंत्री पर किसी को अनुचित फायदा पहुंचाने का आरोप लग गया।

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