श्रुति कार्यक्रम के नवीनतम आंकड़ों में, जिनमें दो वर्षों में दिल्ली और हैदराबाद में 1 लाख लोगों की जांच की गई थी, से पता लगा है कि अधिकांश महिलाएं और बच्चे गंभीर कान संक्रमणों को नजरअंदाज करते हैं जिससे स्थाई बहरापन हो सकता है डा. श्रॉफस चैरिटी हास्पिटल के सहयोग से मेडट्रानिक के श्रुति कार्यक्रम के माध्यम से वंचित लोगों में कान में संक्रमण से होने वाली अक्षमता के विषय में जागरूकता, जांच, निदान व उपचार को बढ़ावा देने के मकसद से दिल्ली स्लम बस्ती मुस्तफाबाद, त्रिलोकपुरी और जहांगीरपुरी क्षेत्रों में कम्युनिटी वर्कर्स ने लगभग 40 हजार लोगों की जांच की।
दिल्ली और हैदराबाद में तीस हजार से अधिक लोगों को कानों की देखभाल के विभिन्न स्त्रोें के लिए कान के सर्जन्स के पास जा कर सलाह लेने के लिए कहा गया जिनमें चिकित्सीय उपचार, सर्जिकल इलाज व सुनने की मशीन लगाने जैसे उपाय शामिल हैं। यह भी पाया गया कि बच्चे और महिलाएं आमतौर पर कान के संक्रमणों को नजरअंदाज करते हैं जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इस पहल के अंतर्गत अब तक लगभग 35 हजार बच्चों की जांच की जा चुकी है।
श्रुति की इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए, श्री मिलिन्द शाह, वाइस प्रेसिडेंट, साऊथ एशिया व मैनेजिंग डायरेक्टर इंडिया मेडट्रानिक ने कहा, दस हजार से अधिक लोगों की जांच श्रुति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। श्रुति ने कई लोगों को स्थाई बहरेपन से बचाया है। हालांकि अभी बहुत कुछ करना बाकी है और श्रुति टीम कई अन्य उपलब्धियां हासिल करेगी।
डा. निशि गुप्ता, हैड आफ ईएनटी, डा. श्रॉफस चैरिटी आई हास्पिटल ने कहा, कानों की वहनीय देखभाल के लिए समर्पित केंद्रों के संदर्भ में बुनियादी ढांचा बनाने की आवश्यकता है। है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ता नि:शुल्क कान जांच करने के लिए लक्ष्यित क्षेत्रों में घर-घर जाते हैं। इन स्वास्थ्य कार्यकतार्ओं के पास ईएनटी (कान, नाक व गला) सर्जनों और श्रुति किट के उपयोग के साथ पैरामेडिकल टीमों के पास काम करने का व्यवहारिक अनुभव होता है। इसके अलावा जांच प्रक्रिया के दौरान, स्वास्थ्य कार्यकर्ता शिक्षकों को कान की देखभाल की अच्छी आदतों के बारे में शिक्षित करते हैं जिससे बहरेपन को रोकने में मदद मिल सकती है। जो रोगी के कान के मध्य कर्ण की तस्वीरें सम्प्रेषित करते हैं।

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