सावन : केसरिया से पटी सड़के, हर-हर महादेव की गूंज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 5 अगस्त 2015

सावन : केसरिया से पटी सड़के, हर-हर महादेव की गूंज

शिवालयों में जलाभिषेक के लिए कावडि़यों का उमड़ा सैलाब, लगने लगी है भक्तों की लंबी-लबी कतार। खासतौर से धर्म एवं आस्था की नगरी काशी काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर हो या फिर उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, या फिर देवघर में बाबा बैजनाथ धाम हर जगह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। प्रस्तुत है विभिन्न शिववालयों में पूजन-अर्चन पर सीनियर रिपोर्टर सुरेश गांधी की एक रिपोर्ट जिसमें मंदिरों में की विस्तृत पड़ताल है। बताया गया है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू हुआ श्रावण मास का पहला सावन सोमवार गज केसरी योग व गणेश चतुर्थी का दिन होने से शिवालयों में कुछ ज्यादा ही श्रद्धालुओं की भीड़ दिखी 
 
sawan-ki-goonj
देवों के देव महादेव को अति प्रिय और पवित्र सावन के पहले दिन शनिवार से शुरू हुआ जलाभिषेक सोमवार को पूरे शवाब पर रहा। शायद ही कोई ऐसा बचा हो जो बाबा भोलेनाथ के शिववालयों में जलाभिषेक न किया हो। सुबह भगवान सूर्य की किरणे धरती पर पड़ने से पहले शिव मंदिरों के आसपास लाखों श्रद्धालुओं को पूजन-अर्चन के लिए जाते देखा गया। मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का भगवान शिव पर जलाभिषेक का सिलसिला शुरु हुआ तो देर रात तक थमा नहीं। छोटा हो बड़ा या फिर बुजुर्ग, महिला हो फिर युवतियां सबके सब बड़ी संख्या में लोगों ने उपवास भी रखा और मंदिरों में जाकर दूध व शहद आदि से अभिषेक कर बिल्व पत्र आदि चढ़ा कर पूजा-अर्चना की। शिव चालीसा, शिव स्त्रोत का पाठ व ओम नमः शिवाय व महामृत्युंजय आदि मंत्रों का जाप भी भक्तों ने की। कई मंदिरों में रूद्राभिषेक व महाआरती का भी आयोजन किया गया। मंदिरों में शाम को भोले का नयनाभिराम शृंगार किया गया। भोले की आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। 

sawan-ki-goonj
मंदिरों में बज रहे भक्ति गीतों के बीच हर-हर, बम-बम, हरहर महादेव के जयकारे से पूरा वातावरण शिवमय हो गया है। सड़के कावडि़यों से पटी पड़ी है। मंदिरों में बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग कहीं फूलों से तो कहीं दूधों से डूबे नजर आएं। मंदिरों में आज के दिन विशेष श्रृंगार देखने को मिला। जगह-जगह कलश यात्रा भी निकाली गयी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम कर रखा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू हुआ श्रावण मास का पहला सावन सोमवार गज केसरी योग व गणेश चतुर्थी का दिन होने से शिवालयों में कुछ ज्यादा ही श्रद्धालुओं की भीड़ दिखी। पुजारी के मुताबिक इन दोनों योगों के संयोग से इस दिन की शुभता में और अधिक वृद्धि होगी। शिव के प्रिय सोमवार के दिन गुरु सिंह राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में है। ये दोनों ग्रह आमने-सामने रहेंगे। दोनों ग्रहों की यह स्थित गज केसरी योग निर्मित कर रही है। इस योग में की गई साधना-उपासना श्रेष्ठ फलदायी होती है। इसी दिन गणेश चतुर्थी होने से अत्यधिक यह सोमवार अधिक फलदायी हो गया है। क्योंकि गुरु (बृहस्पति) धर्म व सिद्धि साधना के प्रतिनिधि है, जबकि चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर शोभायमान है, जो मन का कारक है। शिव पूजा से चंद्रमा मन को स्थिरता प्रदान करता है। गुरु ज्ञान में वृद्धि करता है। गज केसरी योग में की गई शिव पूजा व अभिषेक करने से अनिष्ट करने वाले अन्य गृह भी शांत होते हैं, चूंकि शिव महाकाल भी हैं। जीवन के कल्याण के लिए श्रावण में की गई शिव भक्ति का श्रेष्ठ फल मिलता है। शिवलिंग का दूध, दही व शहद आदि से अभिषेक कर बिल्व पत्र चढ़ाने से रोग व संताप नष्ट होते हैं। 

sawan-ki-goonj
शास्त्रों के मुताबिक शिव पूजन के लिए सावन का महीना बेहद खास होता है। सावन के महीने में भक्त जब भोले बाबा के दरबार में सच्चे मन से आराधना करते हैं तो उन्हें साक्षात शिव शंकर का आशीर्वाद मिल जाता है। सावन माह में की जाने वाली शिव की उपासना और वो भी सावन के सोमवार को की जाने वाली शिव भक्ति हर भक्त के जीवन में सुख लाती है। सावन माह के सोमवार व्रत की कड़ी में चैथे और अंतिम सोमवार का व्रत बेहद शुभ है। मान्यता है कि अगर आपने आखरी सोमवार का व्रत रख कर लिया और भोलेनाथ की पूजा तो सभी सोमवारों का फल और पुण्य प्राप्त हो जाएगा। भोले-भंडारी शिव-शंकर अपने भक्‍तों को हर संकट से उबारते हैं। मुश्किल घड़ी में उन्‍हें राह दिखाते हैं। तभी तो देवता भी अपने कष्टों के निवारण के लिए भोले-भंडारी की ही शरण में जाते हैं। 

धर्म एवं आस्था की नगरी काशी काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर हो या फिर उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, या फिर देवघर में बाबा बैजनाथ धाम हर जगह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कांवडि़यों ने गंगा स्नान कर हाथों में जल का लोटा लिया और बोलबम के नारे के साथ बाबा का जलाभिषेक किया। काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है और बाबा का शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में अहम स्थान रखता है इसलिए यहां पूरे श्रावणभर बोलबम के जयकारे गूंजते हैं। भक्त कांधे पर कांवर और हाथों में जल का लोटा लेकर बोलबम के उद्घोष के साथ बाबा विश्वनाथ को जल चढाते हैं। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं। शायद यही वजह है कि बाबा के दरबार में हर रोज लगने वाली लंबी कतार के सापेक्ष सावन में सौ गुना बढ़ जाता है। जलाभिषेक करने वाले कांवडि़यों का सैलाब उमड़ पड़ता है। सावन के पहले सोमवार पर करीब एक लाख भक्त बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचे हैं। कहते है काशी में सावन में भगवान शिव मां पार्वती के साथ यही उदयमान रहते हैं और सबको दर्शन देते हैं। यही कारण है की द्वादश ज्योतिर्लिंगों में काशी के काशी विश्वनाथ प्रधान माने गए हैं। देश भर के भक्त मां गंगा का जल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। बाबा का पंचामृत से अभिषेक करते हैं। सावन में भोले नाथ के यहां जो अपनी इच्छा लेकर आता है, वो खाली हाथ नहीं लौटता। काशी महादेव के त्रिशूल पर बसी है, यहां का कण कण शंकर है। मां गंगा साक्षात बाबा विश्वनाथ से चंद कदम की दूरी पर बहती हैं। सोमवार का दिन बाबा को बहुत प्रिय है। काशी में मां गंगा के जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिल जाती है।

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया गया। विधिवत पूजा-अर्चना के बीच भगवान शिव के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। गाजियाबाद के प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर दूधेश्वरनाथ में सावन माह में शिव के जलाभिषेक को भक्त जुटने लगे हैं। इस दूधेश्वरनाथ मंदिर की भक्तों में भारी मान्यता है और दूर-दूर से लाखों लोग सावन माह में यहां शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। दूधेश्वरनाथ मंदिर की मान्यता हैं पुराने समय में यहां चरने वाली गायों का दूध खुद ही निकलने लगता था और गायें यहां जमीन में दबे शिवलिंग का अपने दूध से स्वतः की अभिषेक करती थीं। शिव की पूजा के लिए यूपी के ललितपुर में सवा पांच करोड़ शिवलिंग महज 41 दिनों में तैयार किए गए हैं।  सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण का बुंदेलखंड में अब तक का सबसे भव्य आयोजन है। गीली मिट्टी से इतनी बड़ी संख्या में शिवलिंगों का निर्माण करने वाले श्रद्धालुओं को काफी सराहना मिल रही है। अजमेर के तोपदडा स्थित शीतला माता मंदिर में तड़के जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालु उस वक्त हक्का-भक्का रह गए जब शिवलिंग से लिपटे नागराज को देखा। इस अद्भूत नजारे को देख ऐसा लगा मानो नागराज भगवान भोलेनाथ की पूजन-अचर्नन कर रहे हों। इतना ही नहीं बड़े इत्मीनान से नागराज ने शिवलिंग के पास रखे पात्र से दूघ भी पीया और फन ऐसे निकाला जैसे आरती कर रहे हों। फिर क्या इस बिहंगम नजारे की बात जंगल में लगी आग की तरह फैल गयी और देखते ही देखते आस्थावनों का सैलाब उमड़ पड़ी। 







(सुरेश गांधी)

कोई टिप्पणी नहीं: