भारत ने पाकिस्तान को आज दो टूक शब्दों में बता दिया कि यदि वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बैठक में कश्मीर मुद्दे को उठाने तथा हुर्रियत नेताअों से मिलने की बात पर अडा रहता है तो दोनों देशों के बीच यह बातचीत नहीं होगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए)यदि बातचीत का दायरा आतंकवाद तक ही सीमित रखने और हुर्रियत को इसमें पक्षकार नहीं बनाने का आश्वासन देते हैं तो उनका बातचीत के लिए यहां स्वागत है यदि भारत को ऐसा स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता है और पाकिस्तान कश्मीर मुद्दा उठाने तथा हुर्रियत को बीच में लाने की बात करता है तो बातचीत नहीं होगी।
श्रीमती स्वराज ने कहा, “ सरताज साहब, हम बातचीत के लिये कोई पूर्व शर्त नहीं लगा रहे हैं। हम तो बस अपने नेताओं के हस्ताक्षर वाले सहमतियों का सम्मान करने की बात कह रहे हैं। अगर आप किसी तीसरे को पक्षकार नहीं बनायें और बातचीत को आतंकवाद के दायरे से बाहर नहीं ले जायें तो आपका यहाँ स्वागत है।” विदेश मंत्री का आशय शिमला समझौते और ऊफा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच पांच बिन्दुओं पर बनी सहमति से था। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच समग्र वार्ता का विषय है और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बैठक में समग्र वार्ता के मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकती है।

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