भारत ने पाकिस्तान को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत में अड़चन डालने का जिम्मेदार ठहराते हुये आज साफ कर दिया कि यह बातचीत तभी हो सकती है जब पड़ोसी देश स्पष्ट आश्वासन दे कि इसमें हुर्रियत जैसे किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं किया जायेगा तथा इसे आतंकवाद के दायरे तक ही सीमित रखा जायेगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज भारत के रुख को स्पष्ट करते हुये यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज बातचीत के लिये आने केा तैयार हैं तो हम उन्हें बुलाने को तैयार हैं लेकिन शिमला समझौते और ऊफा समझौते की भावना के अनुरूप इस बातचीत में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं होगा तथा बातचीत आतंकवाद तक ही सीमित रहेगी। उन्होंने कहा कि श्री अजीज अगर इस तरह का आश्वासन देते हैं तो उनका स्वागत है और यदि पाकिस्तान इसे नहीं मानता है तो बात नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि शिमला समझौते में साफ किया गया है कि भारत आैर पाकिस्तान के बीच बातचीत में किसी तीसरे पक्ष की हिस्सेदारी नहीं होगी तथा ऊफा समझौते में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत आतंकवाद से जुड़े मसले पर ही होगी। उन्होंने कहा कि भारत कोई शर्त नहीं लगा रहा है बल्कि पाकिस्तान को इन दोनों समझौतों की भावनाओं और उसमें कही गयी बातों की याद दिला रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि ऊफा में यह तय किया गया था कि दोनों देशों के बीच कश्मीर सहित सभी लंबित मसलों पर समग्र बातचीत के लिये उचित माहौल बनाया जाये। वहां आतंकवाद तथा समग्र बातीचत को अलग -अलग रखने का फैसला किया गया ।
इसी के अनुरूप आतंकवाद पर चर्चा के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर , सीमा पर शांति के लिये सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तान रेंजर्स के प्रमुखों के बीच तथा संघर्ष विराम के उल्लंघन के बारे में सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच बातचीत होनी है। इन तीनों बातचीत का एजेंडा भी तभी तय कर दिया गया था। श्रीमती स्वराज ने कहा कि श्री अजीज ने आज संवाददाता सम्मेलन करके भारत का रूख जानना चाहा था जिसपर हमने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और अब हमें उनके जवाब का इंतजार है जिसके लिए उनके पास आज रात तक का समय है।

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