श्री शशि थरूर जी द्वारा भारत में फांसी की सजा को "शासन को हत्यारों की तरह बर्ताव नहीं करना चाहिए" ऐसा कहा जाना नितांत अनुचित है । इस विषय पर श्री शशि थरूर जी ने जो यह कहा है कि आतंकवादियों को मरने तक जेल में बंद करके रखा जा सकता है , श्री थरूर जी का यह विचार वर्तमान की भारत की जो मानसिकता है या यहां की जो वर्तमान की परिस्थिति है ऐसी स्थिति में जायज नहीं है । क्योंकि हमने देखा है की भारत में आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए विमान हाईजैक किये जाते हैं , विशिष्ट लोगों का अपहरण किया जाता है , या अपहरण होने का नाटक करवाकर दुर्दांत अपराधियों\आतंकियों को मुक्त करवाया जाता है , ऐसी स्थिति में आप आतंकियों को उसके मरने तक जेल में कैसे बंद करके रख सकते है ?
साथ ही श्री थरूर जी का जो कहना है कि 143 सभ्य देशों में फांसी की सजा नहीं दी जाती । यहाँ श्री थरूर को सोचना होगा की वे लोग एक तो आतंकवाद से किसतरह निपटाए हैं , ज़रा यह देखें , दूसरी बात वहाँ भारत के अधिकाँश लोगों के तरह ऐसे लोग नहीं होते जो पैसों पर बिकाऊ होकर अपनी एजेंसी के विरुद्ध तथा अपने देश के विरुद्ध काम करे । जब अमेरिका ने निहत्था ओसामा बिनलादेन को पकड़ लिया , चाहता तो उसको ज़िंदा भी अमेरिका ले जा सकता था , लेकिन गोलियों से बिन लादेन को वहीं भून डाला , फिर फांसी की सजा की जरूरत ही क्यों ? अभी जो भारत की स्थिति है उसमें आतंकवादियों के लिए फांसी की सजा सर्वथा उचित है । यदि आतंकवादी को पकड़ेजाने के समय ही अमेरिका की तरह ढेर कर दिया जाय तो भारत में इसके लिए भी दानवों के लिए मानवाधिकार की बात करने वाले लोग गुर्राने लगते हैं ।
हाँ , आतंकवाद के अतिरिक्त फांसी की सजा शायद ही अब भारत में किसी को दी जाती है , लेकिन कुछ साल पहले जब हमने पाया की एक रेपहत्या के दोषी को फांसी की सजा दी गई तब उस फांसी के विरुद्ध उतना होहल्ला नहीं मचा ,जबकि उसको मरते दम तक जेल में रखा जा सकता था , और उस गरीब आदमी को छुड़ाने के लिए कोई अपहरण या प्लेन भी हाईजैक नहीं होता । दिखता है की भारत में जब भी किसी आतंकवादी की हत्या होती है , मानवाधिकारवादी लोग दानवों के लिए इसी अधिकार की मांग करने लगते हैं । हाँ , कोई निर्दोष व्यक्ति किसी जांच एजेंसी की गलत जांच का शिकार न हो , देश में सभी सम्प्रदाय के लोगों के साथ न्याय हो ,किसी के साथ पक्षपात न हो , यह आवश्यक है । वैसे भी भारत में क़ानून व्यवस्था इतनी लचर है की अमीर लोग अपराध करके भी माननीय बने रहते हैं , चाहे दूसरी लुगाई के कारण अपनी पत्नी की हत्या करना पड़े या पत्नी ही आत्महत्या कर ले , कार्यवाही के नाम पर होता क्या है ?
सुनंदा पुष्कर मामले में ही तीन शादी कर चुके श्री शशि थरूर का दिल जब पाकिस्तानी पत्रकारिणी सुश्री मेहर तरार पर आया तो उनकी तीसरी पत्नी सुनंदा पुष्कर की अति संदिग्ध स्थिति में हुई मौत में एम्स के वर्तमान के फोरेंसिक विभाग के प्रमुख श्री सुधीर गुप्ता जी ने आरोप लगाया है की "गलत रिपोर्ट देने के लिए यूपीए सरकार द्वारा उनपर भारी प्रेसर डाला गया था" । अब समझा जा सकता है की जिस पार्टी में थरूर केंद्रीय मंत्री थे , उस पार्टी की सरकार द्वारा पोस्टमार्टम गलत करवाने के लिए प्रेसर किसने ओर किस उद्देश्य से दिया होगा ? लेकिन प्रूव भी हो जाय तब भी ऐसे मामलों में भारत में फांसी की सजा नहीं दी जाती ।
आमोद शास्त्री ,
दिल्ली ।
मोब = 9818974495 & 9312017281

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