आरटीआई कार्यकर्ता सती पर थराली में जानलेवा हमला
देहरादून, 2 अगस्त(निस)। थराली के ग्राम पंचायत सीरी में आरटीआई कार्यकर्ता भगवती प्रसाद सती पर जानलेवा हमला हुआ है। जिसकी रिपोर्ट उन्होंने तहसीलदार थराली को दी है। भगवती प्रसाद का कहना है कि उन पर सातवीं बार जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई है इससे पहले उनका इलाज श्रीनगर बेस अस्पताल में चला था। तहसीलदार थराली को लिखे पत्र में उनका कहना है कि शनिवार की सांय जब वे अपने बाथरूम से बाहर निकल रहे थे तभी घात लगाये आठ लोगों राम प्रसाद पुत्र हंसाराम, राधाकृष्ण पुत्र विश्वेवर, पप्पू प्रसाद पुत्र प्रेमबल्लभ, अमित पुत्र चन्द्रमणि चन्द्रमणि पुत्र घनश्याम, प्रधान विमला देवी पत्नी चन्द्रमणि, लखमा देवी पत्नी विश्वेर प्रसाद सीरी एवं दिनेश सिंह पुत्र हरि सिंह पैंतोली द्वारा उनके उपर लाठी डंडो से प्रहार किया गया उनके चिल्लाने पर उनकी पत्नी व परिवार के अन्य सदस्य बाहर आये आरोपियों के पास धारदार हथियार भी थे और वे नशे मे थे परिवार वालों के हो हल्ला करने पर वे भाग गये। उन्होंने आरोपियों की शीघ्र गिरप्तारी कर उचित कार्यवाही व अपनी सुरक्षा की मांग की है। आरटीआई कार्यकर्ता भगवती प्रसाद द्वारा ग्राम पंचायत से 2011 से 2014 के बीच हुये विकास कार्यों की सूचना मांगी गई थी जिसके एवज में प्रार्थी पर 15 सितम्बर 2014 को पूर्व प्रधान वर्तमान प्रधान व वीडीओ की शह पर 23 लोगों द्वारा जानलेवा हमला किया था जिसकी कि जिलाधिकारी के निर्देश पर 307, 394,147,504 एवं 506में नामजद रिपोर्ट दर्ज हुई थी। और जब मामला आयोग के पास गया तो सूचना न देने पर आयोग द्वारा ग्राम पंचायत को 25 हजार का जुर्माना हुआ था। और आयोग द्वारा जिलाधिकारी चमोली एवं पुलिस अधीक्षक को प्रार्थी को उचित सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिये थे। साथ ही आरोपियों के विरूद्ध जांच कर सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। भगवती प्रसाद का कहना है कि न तो आरोपियों के विरूद्ध काई कार्यवाही हुई और न पूर्ण सूचना मिली उसके उलट उक्त व्यक्तियों द्वारा उन पर इससे पूर्व भी छ बार जानलेवा हमला किया जा चुका है। जिसमें कि वे १०८ की सहायता से श्रीनगर बेस अस्पताल में इलजा करवा चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के विरूद्ध ठोस कार्यवाही कर उन्हें गिरफ्तार किया जाय व उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाय। थराली के तहसीलदार परमानन्द राम के अंनुसार मामले की जांच के लिए एक टीम बना दी गई है जिसमें पुलिस से भी सहयोग करने को कहा गया हैँ। और इसकी जिम्मेदारी कानूनगो नारायणबगड के साथ ही पटवारी नलगांव को दी गई है। जांच के बाद कार्यवाही की जायेगी।
रूद्रप्रयाग में सैनिक स्कूल खोलने पर प्रदेश सरकार कर रही लापरवाही:खण्डूडी
देहरादून, 2 अगस्त(निस)। गढ़वाल सांसद द्वारा जनपद रूद्रप्रयाग में उत्तराखण्ड सरकार के रवैये पर गहरा रोष प्रकट करते हुए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र लिखा है। पौड़ी सांसद ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को याद दिलाया कि उनके द्वारा 18 दिसम्बर 2014 को भी इस विषय में पत्र लिखते हुए सैनिक स्कूल, रूद्रप्रयाग की प्रक्रिया में हो रहे अनावश्यक विलम्ब के सम्बन्ध में उनका ध्यान आकर्षित किया था तथा मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड द्वारा दिनांक 16 जनवरी 2015 को जनपद रूद्रप्रयाग में स्वीकृत सैनिक स्कूल का कार्य आगे बढ़ाने हेतु केन्द्र सरकार को अनुबन्ध भिजवाये जाने हेतु आश्वासन दिया था। परन्तु आज तक यह अनुबन्ध नहीं हो पाया। इस सम्बन्ध में पौड़ी सांसद द्वारा तत्कालीन मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन से भी वार्ता की गयी थी तथा इस प्रकरण में त्वरित कार्यवाही की भी अपेक्षा की गयी थी। परन्तु आज तक यह अनुबन्ध नहीं हो पाया है। उन्होने कहा जबकि उनके द्वारा यह मामला दिनांक 25जुलाई 2014 को संसद में उठाये जाने के बाद भारत सरकार के माननीय रक्षा मंत्री जी ने व्यक्तिगत रूप से आश्वासन देते हुए दिनांक 19नवम्बर 2014 को रूद्रप्रयाग में सैनिक स्कूल की सैद्धान्तिक सहमति प्रदान कर दी गयी थी। समय-समय पर रक्षामंत्रालय द्वारा उत्तराखण्ड शासन को अनुबन्ध करने हेतु अनुरोध किया जा चुका है। किन्तु उत्तराखण्ड शासन द्वारा अभी तक कोई इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाया। उन्होने मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड से अनुरोध किया कि उत्तराखण्ड राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी व्यक्तिगत रूचि लेते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को अनुबंध पत्र को हस्ताक्षरित कर रक्षा मंत्रालय को प्रेषित करें। पौड़ी सांसद ने यह भी कहा कि प्रदेश की कांगेस पार्टी द्वारा समय-समय पर केन्द्र सरकार पर प्रहार किये जाते हैं कि केन्द्र उत्तराखण्ड को सहयोग नहीं कर रहा है जबकि वास्तविकता भिन्न है। केन्द्र सरकार द्वारा लगभग 08 माह पूर्व रूद्रप्रयाग का सैनिक स्कूल की स्वीकृति प्रदान कर दी गयी थी परन्तु स्थिति यह है कि मेरे द्वारा बार-बार कहे जाने पर तथा रक्षा मंत्रालय द्वारा बार-बार पत्र लिखकर अनुबन्ध करने हेतु अनुरोध करने पर भी रूद्रप्रयाग सैनिक स्कूल का अनुबन्ध अभी तक प्रदेश सरकार अभी तक नहीं कर पायी जो कि राज्य के लिये एक चिंता का विषय के साथ-साथ शर्म का विषय भी है।
राज्य के विकास के लिए हमने की छोटी बड़ी लगभग 211 पहलः हरीश रावत
- सरकारी महाविद्यालयों के शिक्षकों की भांति ही अन्य को मेडिक्लेम की मिलेगी सुविधा
देहरादून, 2 अगस्त(निस)। अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को सरकारी महाविद्यालयों के शिक्षकों की भांति ही मेडिक्लेम की सुविधा दी जाएगी। सरकारी विद्यालयों में स्वतः सत्रांत लाभ की व्यवस्था लागू की जाएगी। हाई स्कूलों में कृषि विषय प्रारम्भ किया जाएगा। रविवार को बीजापुर हाउस में कांगे्रस के बुद्धिजीवी एवं शिक्षक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित ‘‘संवाद’’ कार्यक्रम में आमंत्रित किए गए बुद्धिजीवियों से प्राप्त सुझावों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अनेक निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा अधिनियम बनाने के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें प्रबुद्ध शिक्षकों का योगदान भी सुनिश्चित किया जाएगा। इको-पर्यटन पर काम किया जा रहा है और इसके लिए अलग से कारपोरेशन की सम्भावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हमने राज्य के विकास के लिए छोटी बड़ी लगभग 211 पहलें की हैं। प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी व गणित की शिक्षा की योजना प्रारम्भ की है। हाई स्कूलों में स्किल शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। हम दूध उत्पादन के लिए सहकारी दुग्ध संघों को 4 रूपए प्रति लीटर बोनस दे रहे हैं। इसके परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। लगभग सभी दुग्ध संघों में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। चारे की कमी को दूर करने के लिए वन विभाग के तहत जायका के माध्यम से व मेरा पेड़ मेरा धन योजना के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। जल संरक्षण के लिए वाटर बोनस प्रारम्भ किया गया है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमारा फोकस हमारे जैविक उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर है। हमने इस प्रकार के कदम उठाए हैं, जिससे इनकी मांग सृजित हो। राज्य का जैविक बोर्ड देश के अग्रणी बोर्डों में है। जल्द ही हमारे अपने राज्य गीत, वाद्य यंत्र, परम्परागत खेल व खाद्य पदार्थों को पहचान मिलेगी। अगले दो तीन वर्षो में उŸाराखण्ड का हस्तशिल्प सबके सामने होगा। हम प्रदेश में 2-2 हजार क्राफ्टमेन व क्राफ्टवूमेन तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि गढ़वाली व कुमायूंनी भाषाओं का संरक्षण तभी सम्भव है, जबकि हम घरों में अपने आपसी बातचीत में इसका प्रयोग करें। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि शिक्षा की स्थिति में सुधार के लिए शिक्षकों को सरकार से भागीदारी करनी होगी। शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार हर सम्भव प्रयास करेगी परंतु शिक्षकों को भी शिक्षा की गुणवŸाा में सुधार के लिए सरकार के प्रयासों में सहयोग करना होगा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए कल्याण कोष बनाया जा रहा है और उनके लिए अंशदायी बीमा योजना भी प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया है। रमसा में कार्यरत लोगों के लिए चुडि़याला केबिनेट में लिए गए निर्णय से राज्य सरकार पर 52 करोड़ रूपए का व्ययभार आएगा। फिर भी इनके द्वारा सरकार पर दबवा बनाने के लिए गैरवाजिब तरीके अपनाए जा रहे हैं। ‘संवाद’ गोष्ठी में बीके नौटियाल ने अशासकीय विद्यालयों में सुविधाएं विकसित किए जाने, डा.बृजमोहन शर्मा ने स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किए जाने, डा.राजीव ने माध्यमिक शिक्षा के संबंध में, डा.किरण सूद ने उच्च शिक्षा अधिनियम की आवश्यकता के संबंध में, हरी भण्डारी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, बीके नेगी ने विद्यालयों में कृषि विषय प्रारम्भ करने, विनोद भट्ट ने जैविक कृषि नीति, के संबंध में सुझाव दिए। इसके अतिरिक्त डा. सुधा सोलंकी, डीके त्यागी, डा.प्रशांत, सोम द्विवेदी, हरीराज, डा.मनोज जादोन, दिनेश कुमार, समीर सिंह सहित अन्य बुद्धिजीवियों ने अपने सुझाव दिए। कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह, कांगे्रस प्रदेशाध्यक्ष किशोर उपाध्याय, विधायक हीरासिंह बिष्ट, प्रकोष्ठ के संयोजक प्रदीप जोशी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
पूर्णागिरीके समीप शारदा पर पुल बनाए जाने की आवश्यकता: पूर्व प्रधानमंत्री देउबा
- पंचेश्वर बांध परियोजना से नेपाल व भारत दोनों ही देशों के लोग होंगे लाभान्वित: हरीश
देहरादून, 2 अगस्त(निस)। सीएम रावत ने कहा कि पंचेश्वर बांध परियोजना से नेपाल व भारत दोनों ही देशों के लोग लाभान्वित होंगे। इससे अपेक्षाकृत कम आबादी प्रभावित हो रही है, जबकि इसके लाभ व्यापक हैं। यह बात रविवार को नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से भेंट कर उŸाराखण्ड व नेपाल के आपसी हितों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श के दौरान कही। पूर्व प्रधानमंत्री देउबा ने पूर्णागिरी(जनपद चम्पावत) के समीप शारदा पर पुल बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह पुल नेपाल के डाडेलधूरा जिले के परशुराम क्षेत्र को उŸाराखण्ड के चम्पावत जिले के पूर्णागिरी क्षेत्र से जोड़ेगा। इससे दोनों ओर के लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इसका प्रस्ताव तैयार करेगी। श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड व नेपाल में सदियों से सांस्कृतिक रिश्ता रहा है। दोनों तरफ अधिक से अधिक आवाजाही की सुविधाएं दी जानी चाहिए। श्री देउबा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री रावत का नाम नेपाल में बड़े आदर से लिया जाता है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रयासरत है कि उŸाराखण्ड व नेपाल के प्रमुख स्थानों के बीच सीधी बस सेवा प्रारम्भ हो सके। आपसी विचार विमर्श में नेपाल में भूकम्प से हुए नुकसान पर चर्चा की गई। श्री देउबा ने कहा कि संकट की घड़ी में भारत केलोग बढ-़चढ़कर नेपाल की सहायता के लिए आगे आए। श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड की भूगर्भीय स्थिति नेपाल के समान ही है। उŸाराखण्ड भूकम्प की दृष्टि से अति संवेदनशील है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी प्राथमिक विद्यालयों के भवनों को भूकम्परोधी बनाया जा सके। उन्होंने कांवड़ मेले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसमें 3 करोड़ कांवड़ आना सम्भावित है। इस पर पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इतने लोगों के लिए प्रशासनिक व अन्य व्यवस्थाएं करना चुनौति की तरह होगा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने श्री देउबा को हरिद्वार में अर्धकुम्भ में आने के लिए भी आमंत्रित किया। इस अवसर पर श्री देउबा की धर्मपत्नी डा.(श्रीमती) आरजू राणा देउबा भी उपस्थित थीं।
मैड ने सफाई यात्रा के तहत चलाया नेहरु कालोनी में फिर चलाया सफाई अभियान
देहरादून, 2 अगस्त(निस)। छात्र संगठन मेकिंग-अ-डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) संगठन ने अपने “सफाई यात्रा” को आगे बढ़ाते हुए 40 सदस्यों सहित एक बार फिर से नेहरू कालोनी में सड़क पर फैले कूड़े कि सफाई की। इस बार मुख्यमंत्री हरीश रावत अभियान में शामिल तो नहीं हो पाए लेकिन उन्होंने फोन पर मैड के संस्थापक अध्यक्ष अभिजय नेगी को शुभकामनाएं दी और अभियान चलाते रहने को कहा। गौरतलब है कि पिछले दो रविवार मुख्यमंत्री मैड कि सफाई यात्रा में शिरकत करते आ रहे थे, मुख्यमंत्री ने मैड के साथ त्यागी रोड और नेहरू कालोनी कि पूर्व में सफाई की लेकिन रविवार को वही जगह जहां मैड ने मुख्यमंत्री के साथ सफाई अभियान चलाया था वहां फिर से गंदी पाई गयी। यह मैड के सफाई यात्रा का लगातार चैथा चरण था। मैड के 20 सदस्यों की मदद के लिए नगर निगम ने जेसीबी एवं ट्रक समय पर भेज दिया था। कूड़ा इतना अधिक था कि एक और ट्रक को बुलाना पड़ा उस क्षेत्र को पूरी तरह साफ करने मे मैड को कुल तीन घंटे लगे लेकिन निगम ने इस बार अपने कर्मचारी भी भेजे थे जिससे मैड को अपने स्वच्छता सेनानी बनाने के लिए भरपूर समय मिला। गौरतलब है कि मैड के सफाई यात्रा में मुख्यमंत्री के रुचि दिखाने से नगर निगम प्रशासन पूरे शहर को साफ रखने हेतु एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है एवं मैड के साथ तालमेल भी बैठा रहा है, जैसा पहले कभी नहीं होता था। हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद मेयर के गृह क्षेत्र में ही मैड का यह दूसरा कार्यक्रम था। पिछले कार्यक्रम से खिन्न होकर मेयर ने मैड के अभियान का यह कहकर विरोध किया था कि वह (जहां सफाई की जा रही है) तो एक कलेक्शन पाईंट है। जो यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि नगर निगम के कलेक्शन पाइंट रिहायशी इलाकों में बीच सड़क पर कैसे हो सकते हैं। मेयर ने यह भी कहा था कि मैड ने पिछली बार निगम को मुख्यमंत्री के आने से पहले जी सी बी चलाने से रोका थाय पर वह यह बताना भूल गए थे कि वहाँ जीसीबी एवं निगम के कर्मचारियों को मैड के सदस्यों ने ही उससे आधा घंटा पूर्व फोन करके बुलाया था। मैड ने इस पूरे अभियान को अपने जेब खर्च से संचालित किया जहाँ मुहल्ले वालों ने मदद की वहीं उन्हें स्वच्छता सेनानी का तमगा दिया गया। मैड के प्रवक्ता ने बताया कि वह शहर भर में 10,000 स्वच्छता सेनानी नियुक्त कर पाए इस कोशिश में हैं। मैड इस बात से खुश है कि सफाई यात्रा की वजह से राज्य सरकार और नगर निगम दोनों का ध्यान सफाई पर अब केन्द्रित है और हाल ही में राज्य सरकार ने शीशाम्बाडा में रिसाइक्लिंग प्लांट को भी मंजूूरी देदी और निगम के संसाधनों के लिए एक करोड़ से अधिक धनराशी भी स्वीकृत कीद्य एक छात्र संगठन के लिए यह एक उपलब्धि से कम नहीं है। पिछले दो रविवार मैड मुख्यमंत्री को त्यागी रोड एवं नेहरु कालोनी मे सड़क पर फैला कूड़ा दिखा चुका है और इस सफाई यात्रा को मैड जारी रखने को तत्पर है, चार साल से शहर की सफाई के लिए काम कर रहा मैड अब इस बात से खुश है कि सरकारी तंत्र उसके प्रयासों को गंभीरता से लेता है। अभियान में शार्दुल सिंह राणा, हिमालय रमोला, शैलजा, मंवेंद्द्र सिंह रावत, जय शर्मा, सौरव जोशी, पूजा भट्ट, अक्षत थपलियाल, शार्दुल असवाल, सौरभ नौटियाल, सारंग गोडबोले इत्यादि मौजूद थेद्य
इतने हंगामें के बाद भी अधिकारी को पता ही नहीं आखिर किसकी करनी है जांच
- एक आईएएस के स्टिंग में फंसने का मामला, अभी तक दर्ज नहीं कराई गई कोई भी रिपोर्ट
देहरादून, 2 अगस्त। देश का शायद यह पहला मामला होगा, जिसमें जांच करने वाले को यह पता ही नहीं है कि उसे किस बात की जांच करनी है। इतना ही नहीं, 10 रोज बीतने के बाद भी अब तक इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई एफआईआर तक नहीं कराई गई है। इसके बाद भी सरकार इसी जांच के नाम पर एक आईएएस अफसर को जबरन उत्तराखंड में रोके हुए है। जी हां, बात हो रही है कि आईएएस अफसर मो.शाहिद के एक स्टिंग आपरेशन की। यह मामला दून से लेकर दिल्ली तक गूंज रहा है। इसी मामले की वजह से कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी की मोदी सरकार को घेरने की मुहिम को पलीता लग चुका है। इसके बाद भी अब तक ऐसा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है कि जो इस बात का अहसास कराए कि सरकार इस मामले को जरा भी गंभीरता से ले रही है। इसे इस तथ्य के प्रकाश में देखें कि सरकार की ओर से इस मामले की जांच का जोरशोर से ऐलान किया जा रहा है। तमाम हो हल्ला होने के बाद इस मामले की जांच का आदेश भी जारी करने की बात की जा रही है। अब बात करते हैं जांच की। सरकार की ओर से इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ओमप्रकाश को जांच अधिकारी बनाया गया है। आदेश में इस बात का जिक्र नहीं है कि जांच के बिंदु क्या होंगे। अलबत्ता जांच पूरी करने के लिए समयसीमा जरूर तय कर दी गई है। अब जांच अधिकारी खुद को बेबस बता रहे हैं। प्रमुख सचिव ओमप्रकाश मीडिया से बातचीत में साफ कर चुके हैं कि उन्हें पता ही नहीं है कि किस बात की जांच करनी है। वैसे भी इस तरह के मामलों में पहले एफआईआर होती है और उसी के बाद नियमों के तहत जांच आगे बढ़ती है। लेकिन यहां तो इस मामले में अब तक कोई एफआईआर ही नहीं कराई गई है। न तो स्टिंग में फंसे आईएसएस अफसर मो.शाहिद ने कोई एफआईआर कराई है और न ही इस मामले को लेकर फजीहत झेल रही सरकार ने। इतना ही नहीं, इस स्टिंग की सीडी को सामने लाकर कांग्रेस सरकार पर हमला करने वाली भाजपा ही इस दिशा में कोई कदम उठाने को तैयार है। ऐसे में सवाल यही खड़ा हो रहा है कि सरकार का मकसद मामले की जांच कराकर सत्यता तक पहुंचने का या फिर जांच का हौव्वा दिखाना। अहम बात यह भी है कि इसी जांच का हवाला देकर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के आदेश का पालन नहीं किया है। केंद्र सरकार ने स्टिंग में फंसे गुजरात कैडर के आईएएस अफसर मो.शाहिद को तत्काल रिलीव करने का आदेश मुख्य सचिव को दिया है। सरकार ने पत्रावली तैयार होने के बाद भी उन्हें रिलीव नहीं किया और इसी जांच का हवाला देकर अफसर को यहीं रोकने की कोशिश की जा रही है। तर्क दिया जा रहा है कि अगर अफसर को रिलीव कर दिया गया तो जांच प्रभावित हो सकती है। एक तरफ जांच अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें पता ही नहीं कि किसकी और क्या जांच करनी है और दूसरी तरफ इस जांच का हवाला केंद्र सरकार को दिया जा रहा है। जाहिर है कि ऐसे में सरकार की मंशा सवालात उठना लाजिमी हैं।
राकेश शर्मा की तरह ही हरीश रावत के हाथ से भी कई बार फिसली कुर्सी
- मुख्यमंत्री को करना पड़ा 12 साल का लंबा इंतजार, राकेश को मुख्य सचिव बनने में लग गए दो साल
- दोनों के सामने खुद को साबित करने की है चुनौती
देहरादून,2 अगस्त। सरकार के मुखिया हरीश रावत और शासन के मुखिया राकेश शर्मा के बीच कई बातें एक जैसी ही हैं। इसे संयोग कहें या कुछ और लेकिन सत्यता यह है कि दोनों को शीर्ष तक पहुंचने के लिए तमाम पापड़ बेलने पड़े। दोनों के हाथों सत्ता की चाभी कई बार फिसली। कई मौके आए जब लगा कि हरीष रावत अब सीएम बनने वाले है। लेकिन ऐन मौके पर कोई न कोई ऊपर से आया और कुर्सी ले उड़ा। ठीक ऐसा ही शासन के मुखिया राकेश शर्मा के साथ ही भी हुआ। कई बार कुर्सी हाथ में आते-आते कोई और बैठ गया। अब दोनों के सामने खुद को साबित करने की चुनौती है। हालांकि राकेश के पास वक्त बहुत ही कम है। पहले बात हरीष रावत की। 2002 में राज्य विधानसभा के चुनाव हरीश रावत के कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए। नतीजे आने शुरू हुए तो लगा कि कांग्रेस मैदान में ही नहीं है। एक बार तो हरीश ने हार की नैतिक जिम्मेदारी भी ले ली। अचानक ही ईवीएम ने हाथ का पंजा उगलना शुरू कर दिया और अंतिम नतीजे आए तो साफ हुआ कि अवाम ने सत्ता की कुंजी कांग्रेस के हाथों में सौंप दी है। उस वक्त किसी को भी इस बात पर कोई शंका नहीं थी कि हरीश रावत मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी सियासत ने ऐसा रंग दिखाया कि अचानक ही कांग्रेसी दिग्गज नारायण दत्त तिवारी की मुख्यमंत्री के पद पर ताजपोशी हो गई और हरीष रावत मन मसोस कर रह गए। 2007 में कांग्रेस की अंदरूनी सियासत ने ही उसे सत्ता से बाहर कर दिया और भाजपा ने यहां सरकार बना ली। 2012 में कांग्रेस एक बार फिर से सत्ता संभालने की स्थिति में आ गई। उस वक्त भी हरीश रावत का ही नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे आगे था। यह तय भी माना जा रहा था कि हरीष रावत इस बार तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हो ही जाएंगे। चुनावी नतीजा आने के बाद कई रोज तक सियासी ड्रामा चलता रहा और नतीजा यह रहा कि हरीष रावत के हाथ से एक बार फिर सत्ता की कुर्सी फिसल गई और कांग्रेस हाईकमान ने विजय बहुगुणा को ताज पहना दिया। इसके बाद भी हरीष रावत ने हार नहीं मानी और अपने अंदाज में सियासी बैटिंग करते रहे। आखिरकार वो दिन आ ही गया जब हरीष रावत के सिर पर मुख्यमंत्री का ताज सज गया। कुछ इसी तरह के हालात राकेश शर्मा के साथ रहे। सत्ता चाहें किसी की भी रही हो। राकेश शर्मा हमेशा ही सत्ता के केंद्र में रहे। किसी भी सरकार के लिए हर तरह से मददगार बने रहे राकेश को शासन की शीर्ष कुर्सी से दूर ही रखा गया। बहुगुणा सरकार के समय में उनके हाथ से कुर्सी फिसल गई तो हरीष रावत की सरकार ने भी नौ माह पहले उन्हें यह कुर्सी का ख्वाब दिखाया। लेकिन मौका आया तो अचानक ही दिल्ली से एन. रविशंकर को बुलाकर मुख्य सचिव बना दिया गया। हरीश की तरह ही राकेश ने भी हिम्मत नहीं हारी। सरकार की हर चुनौती को उन्होंने अपने ऊपर लेकर कई बार तारणहार की भूमिका निभाई। पिछले एक महीने से उनके मुख्य सचिव बनने या न बनने को लेकर नौकरशाही में जबरदस्त गहमागहमी रही। कई बार लगा कि अब उनका नाम फाइनल हो गया। फिर अचानक ही दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर तैनात किसी न किसी अफसर का नाम फिर से उछाल दिया गया। बताया जा रहा है कि तीन रोज पहले सरकार ने यह मन बना लिया था कि राकेश को ही मुख्य सचिव बनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से इस बारे में राकेश को सूचना भी दे दी गई। अचानक से केंद्र में तैनात एक अफसर और सरकार के बीच गुफ्तगू शुरू हो गई। इससे लगा कि राकेश बगैर मुख्य सचिव का ओहदा हासिल किए ही रिटायर हो जाएंगे। बताया जा रहा है कि 30 जुलाई की देर रात सरकार ने राकेश से किया गया वायदा न निभाने का मन भी बना लिया था। लेकिन इस बार किस्मत राकेश के साथ खड़ी हो गई। इसी का नतीजा रहा कि सरकार ने अंतिम रूप से तय कर लिया कि राकेश को ही शासन का मुखिया बनाया जाएगा और 31 की शाम राकेश ने मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण कर ही लिया। साफ दिख रहा है कि सरकार के मुखिया हरीश रावत और शासन के मुखिया राकेश शर्मा को ये पद प्लेट में सजा कर पेश नहीं किए गए हैं। दोनों को यह मुकाम हासिल करने के लिए तमाम पापड़ बेलने पड़े हैं। जाहिर है कि ऐसे में दोनों को पता है कि काम कैसे करना है। राकेश शर्मा के पास तो वक्त महज तीन महीने का ही है। लेकिन जिस लिहाज से उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं हैं, उससे लगता है कि उन्होंने एक्शन प्लान पहले से ही तैयार कर रखा है। इसी तरह से सरकार के मुखिया हरीश रावत चुनावी मोड में आते दिख रहे हैं। उम्मीद की जा सकती है कि सरकार और शासन के मुखिया की जुगलबंदी से सूबे के अवाम को कुछ राहत जरूर मिलेगी और कुछ ऐसा देखने को मिल सकता है जिसकी कल्पना अवाम ने की ही न हो।
चार आरोपी दबोचे
देहरादून, 2 अगस्त (निस)। पुलिस ने देहरादून के धर्मावाला चैक से लोगों को गुमराह कर उनके एटीएम से रूपए निकाले वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। यह चार युवक एटीएम के बाहर खड़े हो जाते थे और जिस व्यक्ति को रूपए नही निकालने आते थे, उसे अपनी बातों में उलझाकर उसके एकाउंट से यह रकम निकाल लिया करते थे। कुछ दिन पहले कर्णप्रयाग की एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई थी कि एटीएम के बाहर मिले उसे चार युवकों ने गुमराह कर उसके एकाउंट से 36 हजार रूपए निकाल लिए। इस मामले कांे पुलिस ने दर्ज कर लिया। इस गिरोह के खुलासे के लिए एसपी सुनील कुमार मीणा ने पुलिस टीम को लगाया था। जांच कर रही टीम को सूचना मिली कि इस गिरोह के सदस्य प्रदेश की राजधानी दून के धर्मावाला चैक में देखे गए है। सूचना के बाद पुलिस ने उन्हें घेराबंदी कर रविवार की सुबह धर्मावाला चैक से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। पकडे गए सभी आरोपी उप्र के सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के बताए जा रहे है।
यूनिवर्सिटी टाॅपर्स ‘टाॅपर्स कानक्लेव’ का हिस्सा बनेगें, राज्यपाल डाॅ. के.के. पाल के सानिध्य में पांच दिन चलेगा मंथन
देहरादून, 2 अगस्त (निस। उत्तराखंड के राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल की पहल पर आयोजित ‘टाॅपर्स कानक्लेव‘ के जरिये प्रदेश के युवाओं के सामने उन्हीं के बीच से ‘रोल-माॅडल’ प्रस्तुत किए जाएंगे। इस आयोजन में टाॅपर्स को विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों से भी रूबरू होने का अवसर मिलेगा। देश के किसी राजभवन में पहली बार ‘टाॅपर्स कानक्लेव‘ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का मूल उद्देश्य टाॅपर्स की प्रतिभा को सार्वजनिक मान्यता प्रदान कराकर उनमें आत्मविश्वास जगाना, उन्हें एक्सपोजर देकर उनके दृष्टिकोण को राष्ट्र निर्माण की दिशा में ले जाना है। इसके साथ-साथ, टाॅपर्स को राजभवन जैसी राज्य की शीर्ष संवैधानिक संस्था में अतिविशिष्ट लोगों और विशेषज्ञों के समक्ष अपने ज्ञान के प्रस्तुतीकरण की क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलेगा। आगामी तीन से सात अगस्त तक प्रदेश के 10 सरकारी विश्वविद्यालयों के 20 टाॅपर्स उत्तराखंड राजभवन में ‘टाॅपर्स कानक्लेव‘ का हिस्सा बनेंगे। यह ‘कानक्लेव’ उत्तराखंड में उच्च शिक्षा का चेहरा बदलने के अभियान का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है। टाॅपर्स ने अपने विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं में जिस योग्यता का प्रदर्शन किया है, इस आयोजन के जरिये उनकी योग्यता को व्यवहार के धरातल पर लाने की कोशिश की जा रही है। ‘कानक्लेव’ में इस बात पर विशेष तौर पर फोकस किया जाएगा कि टाॅपर्स खुद को सही प्रकार से अभिव्यक्त कर सकें। भविष्य को लेकर जो योजनाएं और विचार उनके जेहन में हैं, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर उन्हें मूर्त रूप देने की कोशिश भी की जाएगी। ‘कानक्लेव’ के जरिये टाॅपर्स के व्यक्तित्व, उनकी रचनात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। ‘कानक्लेव’ को इस प्रकार संयोजित किया गया है कि यह एकतरफा आयोजन नहीं होगा, वरन इसमें टाॅपर्स की सीधी और सक्रिय भागीदारी होगी। सभी दिनों में विशेषज्ञों के व्याख्यान के बाद टाॅपर्स को भी संबंधित विषयों पर अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके अलावा वे विशेषज्ञ-वक्ताओं से सवाल-जवाब भी कर सकेंगे। खास बात यह कि हरेक दिन की गतिविधियों को समराइज करने का जिम्मा कुलपति स्तर के वरिष्ठ लोगों को सौंपा गया है। इन पांच दिनों में गुड गवर्नेंस, पर्यावरण परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, भारत की सांस्कृतिक संपदा, पर्यावरण और विकास, देश के निर्माण में युवाओं की भूमिका, उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे का विकास जैसे मुद्दों पर गहन मंथन होगा। समापन अवसर पर टाॅपर्स के बीच से दो सर्वश्रेष्ठ युवाओं का चयन किया जाएगा और इन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष मंच पर बोलने का अवसर भी मिलेगा। आगामी दिनों में इन सभी युवाओं की उपलब्धियों को प्रदेश के छात्र-छात्राओं के सामने रखा जाएगा ताकि वे भी अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित हो सकें। ये युवा प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए रोल-माॅडल भी होंगे। गौरतलब है कि इस वक्त प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा की मौजूदा स्थिति में सकारात्मक बदलाव के लिए राजभवन की ओर से दो स्तरों पर कोशिशें हो रही हैं। एक ओर, कुलपतियों को निर्देशित किया जा रहा है कि वे अपने विश्वविद्यालयों का स्तर सुधारें और दूसरी तरफ छात्र-छात्राओं को अवसर मुहैया कराया जा रहा है ताकि वे समकालीन मुद्दों, चुनौतियों, देश और प्रदेश की परिस्थितियों से अच्छी प्रकार से अवगत हो सकें। ‘टाॅपर्स कानक्लेव‘ के पहले दिन राज्यपाल के उद्बोधन के बाद राज्य के पूर्व मुख्य सचिव डाॅ. आर.एस टोलिया ‘गुड गवर्नेंस की महत्ता और लोक प्रशासन’ विषय पर व्याख्यान देंगे। बाद के सत्रों में इसी विषय पर विमर्श होगा। दूसरे दिन जी.बी.पन्त.वि.वि पन्तनगर के कुलपति डाॅ. मंगला राय ‘जलवायु परिवर्तन और संसाधन प्रबंधन’ विषय पर टाॅपर्स के साथ विमर्श करेंगे। इसी दिन प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता अजय राय ‘पर्यावरण और विकास’ के मुद्दे पर प्रतिभागियों से रूबरू होंगे। तीसरे दिन लोककर्मी और गढ़वाल केंद्रीय वि.वि के प्रोफेसर डाॅ. डी.आर.पुरोहित ‘उत्तराखंड के विशेष संदर्भ सहित भारत की सांस्कृतिक विरासत’ पर व्याख्यान देंगे। इस दिन शाम के सत्र में, टापर्स के लिए सेलाकुई स्थित सेंटर फाॅर एरोमैटिक प्लान्टस(कैप) का भ्रमण निर्धारित किया गया है। चैथे दिन दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके जैन और यूटीयू के कुलपति प्रो. पीके गर्ग टाॅपर्स को संबोधित करेंगे। इस दिन ‘राष्ट्र के पुनर्निर्माण में युवाओं की सहभागिता और विश्वविद्यालयों की भूमिका‘ तथा ‘उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे का विकास’ विषयों पर व्याख्यान होंगे। समापन समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी मौजूद रहेंगे और राज्यपाल डाॅ. के. के. पाल द्वारा टाॅपर्स को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
85 मेधावी विद्यार्थी सम्मानित किए गए
देहरादून, 2 अगस्त (निस। ओएनजीसी परिवार के होनहार बच्चों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि अधिशासी निदेशक-प्रमुख कार्मिक संबंध एवं समिति के अध्यक्ष प्रदीप सहारिया ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में दसवीं व बारहवीं कक्षाओं में में उम्दा प्रदर्शन करने वाले कुल 85 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। ओएनजीसी सामुदायिक केंद्र में आयोजित सम्मान समारोह में सहारिया ने कहा कि वर्तमान में प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। जिनसे पार पाने के लिए लगातार परिश्रम करना होगा। समिति के सचिव अजय सिंह रावत ने कहा कि इन छात्रों के प्रदर्शन में कल के सुनहरे भविष्य की तस्वीर दिखाई पड़ती है। अपने परिश्रम व ज्ञान के सहारे वह देश को नई दिशा देंगे। इस दौरान दसवीं व बारहवीं में उम्दा प्रदर्शन करने वाले कुल 85 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ओएनजीसी महिला समिति की अध्यक्ष श्यामला सहारिया, जीएम मैकेनिकल प्रथम कुमार सक्सेना, एस्टो के अध्यक्ष डीएस रावत, उप सचिव आशीष चैहान, समिति के उपाध्यक्ष जेएस चुग, सह सचिव मनोज शर्मा, कोषाध्यक्ष संजय भंट्ट, प्रदीप वर्मा, अंकुर सिनौरिया, वीपी उनियाल आदि उपस्थित रहे।
अवैध खनन में एक डंपर व छह टैक्टर-ट्रॉली को सीज
डोईवाला, 2 अगस्त (निस। तहसील प्रशासन ने माजरीग्रांट के लालतप्पड़ क्षेत्र में जाखन नदी में छापा मारकर अवैध खनन में एक डंपर व छह टैक्टर-ट्रॉली को सीज कर दिया। छापे की कार्रवाई से खनन माफिया में हड़कंप मचा रहा। उत्तराखंड में बरसात में नदियों पर प्रतिबंध होने के बावजूद खनन माफिया अवैध रूप से खनन कर रहे हैं। इसकी वजह से सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीते रोज ग्रामीणों ने अवैध खनन को लेकर प्रशासन से शिकायत की थी। एसडीएम डोईवाला शालिनी नेगी के नेतृत्व में तहसीलदार व खनन विभाग के अधिकारियों ने आज सुबह प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन की शिकायत पर छापा मारा। इस दौरान एक डंपर और छह ट्रैक्टर ट्राली को सीज किया गया। एसडीएम शालिनी नेगी का कहना है कि अवैध खनन के खिलाफ आगे भी कार्रवाई होती रहेगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
बारिश के चलते गंगोत्री मार्ग अवरुद्ध
देहरादून, 2 अगस्त (निस। लगातार हो रही बारिश से चारधाम यात्रा मार्ग खतरनाक हो गए हैं। गंगोत्री हाइवे पहाड़ी से पत्थर गिरने से धरासू बैंड पर नालू पानी के पास बंद हो रखा है। वहीं, राज्य में बारिश से भूस्खलन होने से कई संपर्क मार्ग भी बंद हो रखे, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। सूबे में पिछले दो दिन से कहीं तेज तो कहीं मध्यम बारिश हो रही है। इससे लोगों की परेशानी उठानी पड़ रही है। चमोली जिले में बीती रात से बारिश हो रही है, जिससे बदरीनाथ हाइवे कई स्थानों पर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। मैठाणा, लामबगड़, पिनोला, बैनाकुली, रडांग बैंड और कंचन गंगा में बदरीनाथ हाइवे पर दलदल हो गया है। इससे वाहनों की आवाजाही में खासी दिक्कत हो रही है। हालांकि, बदरीनाथ यात्रा जारी है। वहीं, हेमकुंड के लिए आज 150 तीर्थयात्री गोविंदघाट से रवाना हुए। वहीं, केदारनाथ, यमुनोत्री यात्रा भी जारी है, जबकि गंगोत्री हाइवे बाधित हो रखा है। हरिद्वार में भारी बारिश से कई जगह जलभराव हो गया। मंसादेवी पहाड़ी से कुछ जगहों पर विशेष कर हरकी पैड़ी इलाके में भूस्खलन हो रहा है। प्रशासन ने अलर्ट जारी किया हुआ है। पौड़ी के कोटद्वार क्षेत्र में बारिश से पांच संपर्क मार्ग बंद हो रखे हैं।
जनवरी तक पूर्ण हो जाएगा तीनों फ्लाइओवर का निर्माण कार्य
देहरादून, 2 अगस्त (निस। देहरादून में तीनों फ्लाईओवर का निर्माण अगले वर्ष जनवरी तक पूर्ण कर लिया जाएगा। राजधानी से एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए जौलीग्रांट-थानो व बाईपास-रायपुर से सहस्त्रधारा तक की सड़क का विस्तार किया जाएगा। सड़क की राइडिंग क्वालिटी भी बेहतर बनाई जाएगी।मुख्य सचिव ने एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए सड़कों के विस्तार के लिए सचिव लोनिवि अमित नेगी को जिम्मेदारी सौंपी है। मोहकमपुर-रिस्पनापुल-जौलीग्रांट-सहस्त्रधारा सर्किट भी बनाया जाएगा। इस परिपथ को विकसित करने की जिम्मेदारी एमडीडीए उपाध्यक्ष मीनाक्षी सुंदरम को दी गई है। बैठक में दून के तीनों फ्लाइओवर का निर्माण जनवरी तक पूरा करने का निर्णय किया गया। इसके लिए कार्ययोजना बना ली गई है। बल्लीवाला फ्लाईओवर 31 अक्टूबर तक, बल्लूपुर फ्लाईओवर 31 दिसंबर व आइएसबीटी फ्लाईओवर का निर्माण जनवरी तक पूर्ण कर लिया जाएगा। प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के लिए भूमि चयन के लिए पहले संबंधित लोगों से बात की जाएगी।
दौड़ के दौरान तबीयत खराब होने से युवकी की मौत
बनबसा, 2 अगस्त (निस। सशस्त्र सीमा बल ( एसएसबी) की ओर से इंडो-नेपाल सीमा पर रविवार को आयोजित हाफ मैराथन में तबीयत खराब होने से एक युवक की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, आज मित्रता दिवस पर सशस्त्र सीमा बल ( एसएसबी) की ओर से इंडो नेपाल सीमा बनबसा पर हाफ मैराथन का आयोजन किया गया। इसमें कई लोगों ने भाग लिया। दौड़ के दौरान किशोर भंडारी पुत्र रतन भंडारी निवासी ग्राम छीनीगोठ टनकपुर की तबीयत खराब हो गई। उसकी नेपाल के जिमुवा में मौत हो गई। नेपाल में शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है।
मेडिकल काॅलेज का निर्माण अब भी अधूरा
हल्द्वानी, 2 अगस्त (निस। कुमाऊं में एक और मेडिकल कॉलेज बनना है। इसके लिए लंबी जद्दोजहद चल रही है। सात साल से अधिक का समय हो गया। पहाड़ की सांस्कृतिक नगरी में बन रहे इस कॉलेज के खुलने को लेकर जनप्रतिनिधि बार-बार हवाई घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन 300 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे निर्माण अभी आधा भी नहीं हो सका। बार-बार दबाव पडऩे पर अब शासन सख्त हो गया। जल्द काम पूरा नहीं करने को लेकर चिकित्सा शिक्षा के अपर निदेशक ने निर्माण एजेंसी को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दे दी है। दरअसल, सात साल पहले हल्द्वानी के बाद अल्मोड़ा में मेडिकल कॉलेज बनाने की नींव रखी थी। चार साल तक कोई कार्य नहीं हुआ। इसके बाद निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को दी गई। इससे उम्मीद जगने लगी कि कॉलेज खुलेगा तो राज्य के छात्र-छात्राओं को डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा। साथ ही अस्पताल में अच्छा इलाज मिल जाएगा। कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को उपचार के लिए हल्द्वानी व बाहर रेफर नहीं करना पड़ेगा। लोग टकटकी लगाए हुए हैं, लेकिन निर्माण कार्य कछुवा गति से चल रहा है। चिकित्सा शिक्षा के अपर निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना कार्य की प्रगति देखी तो हैरान रह गए। उन्होंने पूरी रिपोर्ट तैयार की और निर्माण एजेंसी को सख्त चेतावनी दे डाली। उन्होंने दैनिक जागरण को बताया कि निर्माण एजेंसी को बार-बार कहा जा रहा है, इसके बाद भी निर्माण की गति तेज नहीं हो रही। इस चेतावनी के बाद भी निर्माण कार्य जल्दी नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जबकि वर्ष 2016-17 में एमबीबीएस का पहला बैच शुरू करने का लक्ष्य रखा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को निरीक्षण करना है।
गुलदार पिंजरे में कैद
पौड़ी, 2 अगस्त (निस। क्षेत्र में बीती रात बमोली गांव में एक गुलदार (तेंदुआ) पिंजरे में कैद हो गया। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। पिछले एक माह से क्षेत्र में गुलदार का आतंक मचा हुआ था। आए दिन गुलदार किसी पशु को मार दे रहा था तो कभी लोगों पर भी हमला कर रहा था। इससे लोग दहशत में जी रहे थे। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर थे। इसी को देखते हुए वन विभाग ने बमोली गांव के पास पिंजरा लगाया। बीती रात इस पिंजरे में एक गुलदार कैद हो गया। लोगों ने इसी सूचना वन कर्मियों को दी। इस पर वनकर्मी मौके पर पहुंचे और पिंजरे में कैद गुलदार को ले गए। बताया जा रहा है कि गुलदार को राजाजी नेशनल पार्क में छोड़ने की तैयारी है।
महिला के पेट से निकाला सात किलो ट्यूटर, बोंहरा अस्पताल में हुआ महिला का सफल इलाज
- श्रीनगर और दून में भटकने के बाद उम्मीद हारी, इन्दू को मिला नया जीवन, परिजनों में खुशी
रुद्रप्रयाग, 2 अगस्त (निस। ग्राम कांडई की एक महिला के पेट में दर्द हुआ और पेट फूलकर बाहर आने लगा। ऐसे में परिजन महिला को श्रीनगर बेस चिकित्सालय ले गये, मगर चिकित्सकों ने मरीज को देहरादून के लिए रैफर कर दिया। रैफर करने के बाद यहां भी चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिये। जिससे परेशान परिजनों की कुछ समझ में नहीं आया कि अब क्या किया जाय। महिला का दर्द बढ़ता ही जा रहा था और पेट भी फूल रहा था। ऐसे में एक व्यक्ति ने उन्हें सलाह दी कि वे बोंहरा नर्सिंग होम में इलाज करवाएं। जिसके बाद वे मरीज को लेकर सीधे चिकित्सालय पहुंचे। मरीज के आॅपरेशन के बाद अब हालत ठीक है। यह सब पढ़ने में किसी फिल्मी कहानी की तरह लग रहा होगा, मगर यह सच है। जिला चमोली के ग्राम कांडई निवासी परवेन्द्र सिंह की 25 वर्षीय पत्नी इन्दू देवी को पेट दर्द और सूजन की समस्या होने लगी। इसके बाद परिजन इलाज के लिए सीधे बेस चिकित्सालय श्रीनगर ले गये, जहां डाॅक्टरों ने इन्दू के इलाज को देहरादून जाने की सलाह दी। देहरादून जाने पर परिजनों ने कई अस्पतालों के चक्कर काटे, मगर किसी भी अस्पताल में उन्हें राहत नहीं मिली। परिजनों की परेशानी बढ़ती ही जा रही थी और उन्हें कहीं से भी उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। ऐसे में किसी ने उन्हें रुद्रप्रयाग जिले में बोंहरा नर्सिंग होम में जाने की सलाह दी। परिजनों ने बोंहरा नर्सिंग होम के वरिष्ठ सर्जन डाॅ आनंद बोंहरा से फोन पर वार्ता की और पूरी समस्या से अवगत कराया। इसके बाद परिजन इन्दू को बोंहरा नर्सिंग होम ले आये। जब अस्पताल में इन्दू की जांच की गई तो पता चला कि उनके अण्ड ग्रन्थि में एक बड़ा सा सात किलो का ट्यूमर है, जिसे मेलिगनेन्ट ओविरियन ट्यूमर कहा जाता है। परिजनों को ट्यूमर के आॅपरेशन की सलाह दी गई। दो घंटे के आॅपरेशन के बाद सफलतापूर्वक ट्यूमर को बाहर निकाला गया तथा इन्दू को नई जिंदगी मिली। बोंहरा नर्सिंंग होम के वरिष्ठ सर्जन डाॅ आनंद बोंहरा ने बताया कि यह बीमारी एक हजार महिलाओं में से किसी एक को होती है। इसकी शुरूआत पेट में छोटी सी गांठ के रूप में होती है और अगर इसका इलाज न कराया जाय तो धीरे-धीरे इसका आकार बढ़ता जाता है। डाॅ बोंहरा ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज का आॅपरेशन न किया जाय तो मरीज की मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों के अस्पतालों में ऐसे इलाजों पर दो से ढाई लाख तक की मांग की जाती है, मगर बोंहरा नर्सिंग होम में ऐसे इलाज कम कीमतों पर किये जाते हैं। कहा कि इससे पूर्व भी अनेकों ऐसे जटिल आॅपरेशन किये जा चुके हैं। एक ओर जहां डाॅक्टर पहाड़ में अपनी सेवाएं नहीं देना चाहते हैं, वहीं विगत 25 वर्षों से रुद्रप्रयाग में सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान बचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बोंहरा नर्सिंग होम में निर्धन और गरीब मरीजों का इलाज निःशुल्क किया जा रहा है। इधर, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियांे और स्थानीय लोगों ने डाॅ बोंहरा के प्रयायों की सराहना की है।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें