एक नील ऐसा भी, जिसने कबाड़ी को बेच डाला क्षतिग्रस्त पुल
- यूजेवीएनएल में है भ्रष्ट नील, मनेरी डैम साइड के पुल बेचने का है आरोप
देहरादून, 3 अगस्त। भारतीय इतिहास में नल-नील का खूब जिक्र आता है ये दोनों भाई रामायण काल के महान इंजीनियर थे, जिन्होंने पुल बना कर भगवान राम को हिन्द महासागर को पार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन गजब देखिए कि देवभूमि उत्तराखंड में कई ऐसे नल-नील हैं जिन्होंने सेतु बनाने की जगह उल्टा पुलों को ही खुर्द-बुर्द कर डाला। ऐसे महान इंजीनियरों में शामिल हैं यूजेवीएनएल के जे.बी.सिंह। इस जे.बी. सिंह का जलवा इस कदर हावी है कि पुल बेचने के बाद भी प्रदेश के कई नामी राजनेता इस कलयुगी नील को उप महाप्रबंधक सिविल के पद पर बिठाने की जुगत में लगे हैं। जिसमें भाजपा और कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता भी शामिल हैं। आपदा से ग्रस्त उत्तराख्ंाड में हर साल पुलों के लिए सरकार करोड़ों रूपये जारी करती है लेकिन बिड़ंबना देखिए कि राज्य में पुलों का निर्माण सुस्त चाल से होता है, देर-सवेर कहीं पुल बन भी जाते हैं तो वो साल भर भी टिक नहीं पाते। लेकिन इस ओर ना तो विभाग कभी एक्शन लेता है और न ही सरकार। ऐसे में कई अधिकारी इस उदासीनता का फायदा उठा लेते हैं। ऐसा ही एक मामला आया है उत्तरकाशी के भटवाड़ी में, जहां मनेरी डैम साइड में 2 करोड़ की लागत से 2012 में वैली ब्रिज बनाया गया। यह पुल 2013 की आपदा को झेल नहीं पाया और बाढ़ में बह गया। बाढ़ की भेंट चढ़े इस पुल पर यूजेवीएनएल के उप महाप्रबंधक जे.बी. सिंह की नजर पड़ी तो उन्हें जेब गरम करने के लिए यह अच्छा मौका मिला। गजब देखिए कि जनता की गाढ़ी कमाई से बने उक्त क्षतिग्रस्त पुल को जे.बी. सिंह ने बिना विभागीय औपचारिकता के कबाड़ी को बेचने की ठानी और उन्होंने इस क्षतिग्रस्त पुल का सौदा 20 लाख रूपये में में कबाड़ी से कर डाला। यह मामला 24 जनवरी 2015 को समाचार पत्रों की प्रमुख खबर बनी तो विभाग में हड़कंप मच गया। लेकिन फिर भी क्षतिग्रस्त पुल को बेच डालने की बात किसी के भी हलक से उतर नहीं उतरी। आनन-फानन में अवर अभियंता मनेरी देवेंद्र सिंह नेगी एवं अधिशासी अभियंता एस.के. सिंह ने वैली ब्रिज का दौरा किया। अपने दौरे के दौरान दोनों अधिकारियों ने पाया कि कबाड़ी का काम करने वाले फुर्कान नाम के एक शख्स को जे.बी. सिंह ने क्षतिग्रस्त पुल को 20 लाख रूपये में बेच डाला और कबाड़ी से मामला सुर्खियों में आने से पहले 6.5 लाख रूपये ले लिये थे। क्षतिग्रस्त पुल को बिना विभागीय औपचारिकताओं के बेचे जाने पर अवर अभियंता द्वारा थाना मनेरी को लिखित रूप सूचना दी गई। जिस पर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए उक्त कबाडी को गिरफ्तार कर डाला। पुलिस की गिरफ्त में आये कबाड़ी ने यह दावा किया कि उसने क्षतिग्रस्त पुल को एक अधिकारी से 20 लाख में खरीदा है जिसमें से उसने 6.5 लाख रूपये अधिकारी को दे दिये हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन प्रबंध निदेशक जल विद्युत निगम ने एक जांच समिति का गठन किया। तीन सदस्यीय इस समिति ने जांच कर पाया कि जे.बी. सिंह द्वारा क्षतिग्रस्त पुल को बिना विभागीय औपचारिकता के कबाड़ी को महज 6.5 लाख रूपये में बेच डाला। जांच समिति ने अपनी जांच में पाया कि वैली ब्रिज सामाग्री के रख-रखाव, निरीक्षण एवं संरक्षण हेतु उप महाप्रबंधक जे.बी. सिंह व अधिशासी अभियंता एस. के. सिंह द्वारा लापरवाही बरती गई। जांच समिति ने यह भी पाया कि उक्त प्रकरण में उप महाप्रबंधक जे. बी. सिंह की भूमिका संदिग्ध है साथ ही विभाग को जे.बी.सिंह की भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के संदर्भ में जांच समिति द्वारा उनके कार्यकाल में किये गये कार्यों की निगम स्तर पर स्पेशल आॅडिट करने करने की संस्तुति भी कर डाली, इतना ही नहीं दोषी अधिकारी के विरूद्ध आरोपों का निर्धारण कर चार्जसीट दायर करने की भी संस्तुति की। विभागीय जांच समिति द्वारा जे.बी. सिंह को इस प्रकरण में दोषी पाया है लेकिन बिड़ंबना देखिए कि एक ओर टिहरी हाइड्रो डेपलपमेंट कर्पोरेशन यानि टी.एच.डी.सी से प्रतिनियुक्ति पर आये जे.बी. सिंह की करतूतों को देखते हुए वापस लेने से मना कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कुछ सफेदपोश इस कलयुगी नली को जल विद्युत निगम में उप महाप्रबंधक सिविल के पद पर बिठाने के लिए हर संभव कोशिशों में जुटे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जे.बी. सिंह की पैरवी सफेदपोश क्यों कर रहे हैं, आखिर भ्रष्ट अधिकारियों के लिए उत्तराखंड पनाहगाह क्यों बन रहा है। इस सवाल को समझने की कोशिश कीजिये।
मामला काफी गंभीर है। ऐसे अधिकारियों को प्रदेश से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। जिस अधिकारी ने एक पुल को बेच दिया हो उस अधिकारी समायोजन कई सवाल खडे करता है। ऐसे अधिकारियों की विशेष जांच की जानी चाहिए। इस संबंध में तत्काल मुख्यमंत्री से शिकायत की जायेगी। रविन्द्र जुगरान, पूर्व अध्यक्ष, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद
उक्त अधिकारी को अभी मुख्यालय में अटैच किया गया है। जल्द चार्जशीट सौप दी जायेगी। जहां तक जांच समिति का सवाल है। जांच समिति की रिर्पोट को आधार बनाकर ही चार्जशीट दी जायेगी। जिसके बाद निर्णय शासन को लेना है। एस.एन. वर्मा, प्रबंध निदेशक, जल विद्युत निगम
मेरे ऊपर लगाये गये सभी आरोप निराधार है। पुल की खरीद फरोख्त को लेकर मैंने अपना पक्ष रख दिया है। बैली ब्र्रिज को लेकर मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं थी। यह कार्य मेेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर था। अब शासन ही इस संबंध में निर्णय करेगा तब तक मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना है। जे.बी. सिंह, उप महाप्रबंधक, यूजेवीएनएल
दो महिला शराब तस्कर पकड़ी
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। सिटी पेट्रोल युनिट व सम्बन्धित थाना क्षेत्र की पुलिस ने मिली एक सूचना के आधार पर दो महिला शराब तस्कर को भारी मात्रा में अवैध शराब सहित गिरफ्तार कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह सिटी पेट्रोल यूनिट व नेहरूकालोनी थाने की पुलिस रिस्पना पुल पर यातायात ड्यूटी पर मौजूद थे। इस दौरान सिटी पेट्रोल यूनिट को सूचना मिली कि दो महिला शराब तस्कर बस स्टाप पर आने वाली है। इस सूचना को संज्ञान में लेते हुए सिटी पेट्रोल यूनिट व थाना पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए बताये गये स्थान से दो महिलाओं को दो कट्टो सहित हिरासत मंे ले लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने उनसे 192 पव्वे देशी शराब बरामद की। इस पर पुलिस उन्हे थाने ले आयी जहंा पूछताछ में उन्होने अपना नाम माया देवी पत्नी मुकेश व छोटी पत्नी दीपक निवासी जाटव बस्ती ऋषिकेश बताया। महिल तस्करोें का कहना है कि वह देहरादून से शराब लेकर उसे मंहगे दामों में ऋषिकेश में बेचा करती है। पुलिस ने दोनो महिला तस्करों को आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
भारत की महान शिक्षा-परंपरा को पुनः स्थापित करेंः राज्यपाल
- राजभवन में शुरू हुआ टाॅपर्स कानक्लेव
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। उत्तराखंड राजभवन में ‘टाॅपर्स कानक्लेव’ के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल ने कहा कि भारत तक्षशिला, विक्रमशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों की परंपरा का देश है। इस परंपरा को पुनः स्थापित किए जाने की जरूरत है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को अपनी संस्थाओं को उत्कृष्ट शैक्षिक संस्थानों में बदलने के कार्य को चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन महज कान्फ्रेंस, सेमीनार या वर्कशाॅप नहीं है, बल्कि इसके साथ ज्यादा बड़ा उद्देश्य और लक्ष्य जुड़ा हुआ है, इसीलिए इसे ‘कानक्लेव’ के तौर पर आयोजित किया जा रहा है। देश में अपनी तरह का पहला ‘टाॅपर्स कानक्लेव’ आज उत्तराखंड राजभवन में आरंभ हआ। ‘कानक्लेव’ के उद्घाटन सत्र में राज्यपाल ने कहा कि इस आयोजन के जरिये टाॅपर्स को ऐसा माहौल उपलब्ध कराना है, जिससे वे देश और प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। साथ ही, दूसरे छात्र-छात्राओं के लिए ‘रोल-माॅडल’ बन सकें। उनमें रचनात्मकता के विकास, खुद की क्षमता के सही इस्तेमाल और अपने सांस्कृतिक परिवेश के प्रति समझ को बढ़ाने पर भी इस आयोजन में जोर दिया जाएगा। राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि इस ‘कानक्लेव’ के बाद प्रतिभागी युवाओं को अपने व्यक्तित्व में एक सकारात्मक बदलाव की अनुभूति होगी। राज्यपाल ने कहा कि शैक्षिक ढांचे में विश्वविद्यालयों का स्थान सर्वाेच्च रहा है। एक समय ऐसा भी रहा है जब दुनिया के विभिन्न देशों के छात्र भारत की संस्थाओं में पढ़ने आते थे, लेकिन 12वीं शताब्दी से इनमें गिरावट आनी शुरू हुई और आज भी हमारे सामने सवाल बना हुआ है कि क्या हमारी संस्थाएं ज्ञान के सर्वाेच्च केंद्र हैं? आज सर्वाधिक जरूरत इस बात की है कि नाॅलेज, रिसर्च और इनोवेशन को एक-दूसरे से गहराई के साथ जोड़ा जाए। रिसर्च से नया ज्ञान हासिल होगा और इनोवेशन को इस नए ज्ञान के जरिये सामाजिक-आर्थिक संपदा के रूप में परिवर्तित किया जा सकेगा। राज्यपाल ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों को सामाजिक-आर्थिक विकास के पथप्रदर्शक बनना चाहिए। शिक्षा केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, वरन इसका विस्तार समाज और राष्ट्र तक होना चाहिए। विश्वविद्यालयों की गतिविधियों के साथ स्वच्छ भारत अभियान, आदर्श ग्राम, डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को भी जोड़ना चाहिए। साथ ही, भारत सरकार की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं में विश्वविद्यालयों की भूमिका नजर आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ‘उच्च मस्तिष्क’ तैयार नहीं है, वरन ऐसी मनस्थिति तैयार करने की जरूरत है जो समाज और राष्ट्र के सामने खड़ी होने वाली चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सके। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान हासिल करना और सक्षम व्यक्ति बनना भी नहीं, बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण का जरिया बननी चाहिए। राज्यपाल ने चाणक्य नीति को उदधृत करते हुए कहा कि ज्ञान एक ऐसी संपदा है जिसे कोई चुरा नहीं सकता और जो बांटने पर बढ़ती है। राज्यपाल ने टाॅपर्स को याद दिलाया कि वे श्रेष्ठों में सर्वश्रेष्ठ हैं। इसलिए राज्य, देश और समाज उनसे ज्यादा अपेक्षाएं रखता है। उन्होंने कहा कि इन दिनों स्मार्ट सिटी तैयार करने को लेकर काफी चर्चा हो रही है। लेकिन, आज स्मार्ट सिटी से पहले ‘स्मार्ट-पर्सन’ तैयार करने की जरूरत है जो नई प्रौद्योगिकी और पर्यावरण, दोनों के साथ संतुलन बनाकर रहे। राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि यह ‘कानक्लेव’ टाॅपर्स के लिए बड़ा अवसर साबित होगी और उनमें नेतृत्व के गुण का विकास होगा। पहले दिन के दूसरे सत्र में उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव डाॅ. आर.एस.टोलिया ने ‘गुड गवर्नेंस और लोकप्रशासन में मूल्य’ विषय पर व्याख्यान दिया। ‘कानक्लेव’ के जरिये टाॅपर्स को उत्तराखंड के विकास के साथ भी जोड़ने की तैयारी है। इसी क्रम में उन्हें प्रदेश की चुनौतियों से रूबरू कराया गया और उनसे समाधान भी पूछे गए। कुलपतियों और विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों में टाॅपर्स के सवालों के जवाब भी दिए। राज्यपाल द्वारा दीप प्रज्जवलित कर पांच दिवसीय कानक्लेव की शुरूआत करने के बाद कुमायूँ वि.वि के कुलपति प्रो0 धामी ने इस आयोजन के उद्देश्यों पर विस्तृत प्रकाश डालकर टापर्स के साथ ही अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरक संदेश दिया। ‘टाॅपर्स कानक्लेव’ में श्रीदेव सुमन वि.वि. से पूनम डबराल, तकनीकी वि.वि. से रूपाली और रोहित थपलियाल, संस्कृत वि.वि. से रामानंद डबराल और शतानंद शर्मा, ओपन वि.वि.से ज्योति बांगा और पूजा भंडारी, मेडिकल एजुकेशन वि.वि. से आकांशा नौटियाल और मयंक भसीन, कुमाउं वि.वि. से मीना जोशी और तान्या साहा, पंतनगर वि.वि. से ज्योति पंवार और रितुषा तिवारी, आयुर्वेद वि.वि. से अनु वर्मा और निहारिका वर्मा, दून वि.वि. से गरिमा नौटियाल और अदिति खंडूरी, औद्यानिकी-वानिकी वि.वि. से श्वेता पोखरियाल और चेतनचिंदबर.एन शामिल हैं। पहले दिन के सत्रों में दून वि.वि. के कुलपति प्रो. वी.के.जैन, कुमाऊं वि.वि. प्रो. डी.एस. धामी, श्रीदेव सुमन तथा उत्तराखण्ड मेडिकल वि.वि. के कुलपति प्रो. डी.एस. रावत, तकनीकी वि.वि. के कुलपति प्रो. पी.के. गर्ग, संस्कृत वि.वि. प्रो. महावीर अग्रवाल, औद्यानिकी-वानिकी वि.वि. मैथ्यू प्रसाद, आयुर्वेद वि.वि. प्रो. सत्येंद्र मिश्र, ओपन वि.वि. प्रो. सुभाष धूलिया आदि भी मौजूद थे।
सीएम ने पूर्व विधायक के निधन पर शोक जताया
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नैनीताल के पूर्व विधायक खड़क सिंह बोरा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत की आत्मा की शांति एवं दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि स्व0 बोरा एक कुशल राजनीतिज्ञ एवं समाजसेवी थे। उनके निधन से प्रदेश को अपूरणीय क्षति हुयी है।
जमीनी फर्जी वाडा कर ठगी करने का आरोपी दबोचा
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। जमीनी फर्जी वाडे का अंजाम देकर मंे लाखों की ठगी करने के आरोपी को एसआईटी व बसंत विहार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबधित धाराओं में मुकदमा कायम किया है। सोमवार को अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आई.जी.गढ़वाल संजय गुज्ंयाल ने बताया कि बीती 23 मार्च को लेह में तैनात एक सैन्यकर्मी नरेन्द्र प्रसाद पुत्र विद्यादत्त निवासी पौड़ी गढ़वाल ने अपने साथ हुए जमीनी फर्जी वाड़े में प्रकाश चन्द पुत्र भगतराम द्वारा लाखों ठगे जाने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया था। शिकायती पत्र के माध्यम से नरेन्द्र प्रसाद ने बताया था कि उसके और प्रकाश चंद्र के बीच अच्छे सम्बन्ध हो गये थे। नरेन्द्र प्रसाद का कहना था कि प्रकाश चन्द्र ने कुछ दिनों बाद उसे आरकेडिया ग्रांट मंे एक भूमि दिखाते हुए उससे एक बीघा जमीन का सौदा 9 लाख रूपये में कर लिया तथा एग्रीमेन्ट के दौरान उससे 1लाख 25 हजार रूपये ले लिये। बाद में वादी को पता चला कि उसके साथ धोखा धड़ी की गयी है। मामले की जांच के जांच में जुटी पुलिस ने पाया कि आरोपी प्रकाश चन्द्र ने जमीन के मूल मालिक के नाम से नकली कागजात तैयार कर उसका सौदा पीडि़त पक्ष के साथ कर दिया। जबकि मूल मालिक ने इस बात से इन्कार करते हुए बताया कि उन्होने कोई भी सौदा पीडि़त के साथ नहीं की है। प्रकाश चन्द्र के खिलाफ जमीनी फर्जीवाड़ा करने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने सोमवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया है।
‘आपदा स्मरण स्थल’ बनाए जाने को मंत्री व एक विधायक ने दी सहमति
- -इंडियन मीडिया सेंटर के अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने की थी सरकार से मांग
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। इंडियन मीडिया सेंटर के अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने 16 जून को ‘उत्तराखंड आपदा स्मृति दिवस’ घोषित किए जाने एवं केदारनाथ क्षेत्र में ‘उत्तराखंड आपदा स्मरण स्थल’ बनाए जाने की अपनी मांगों पर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं विधायक की ओर समर्थन दिए जाने पर आभार जताया है। अनूप नौटियाल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को भेजे पत्र में जून 2013 की उत्तराखंड आपदा के स्मरण और मृतकों को सम्मान देने का हवाला देकर उक्त मांगें रखी थीं। गत 9 जून को मुख्यमंत्री को भेजे गए अनुरोध पत्र में अनूप नौटियाल ने कहा था कि 16 जून 2013 की तारीख उत्तराखंड के इतिहास में हमेशा एक खौफनाक याद की तरह पूरे देशवासियों के दिलो-दिमाग पर हावी है। इस दिन उत्तराखंड में आई आपदा को पूरी दुनिया में वर्तमान तक आईं आपदाओं में से एक महाआपदा कहा जाना गलत न होगा। प्रकृति के इस रांैद्र रूप की चपेट में आने से पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाली चारधाम यात्रा केे दौरान राज्य ही नहीं अपितु देश-विदेश के विभिन्न स्थानों से आए करीब 10 हजार श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। पत्र में यह बात भी साझा की गई कि दुनिया में कुछ जगहों पर अनायास ही किसी आपदा या अन्य कारणों से लोगों की जान जाने पर उनकी यादों को संजोए रखने के लिए हादसे की तिथि और स्थान पर बने स्मृति स्थल पर उन्हें याद किया जाता है। 26 नवम्बंर 2008 में मुबंई में हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों की याद में चवार्ड हाउस में एक म्यूजियम बनाया गया है। 9 नवम्बर 2011 को अमेरिका के न्यूयार्क में हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों की याद में अमेरिका की सरकार ने एक एजुकेशनल ऐतिहासिक म्यूजियम का निर्माण किया है। इन स्थानों पर हर साल तय दिवस पर परिजन और देशवासी अपने लोगों को श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचते हैं। अनूप नौटियाल ने बताया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने अनुरोध पत्र की प्रति राज्यपाल, प्रदेश के समस्त सांसदों एवं विधायकों को भी प्रेषित की थी। जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप प्रदेश के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने उनकी उपरोक्त मांगों पर अपनी सहमति जताते हुए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को भेजे पत्र में प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही रामनगर की विधायक अमृता रावत ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मेरी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार किए जाने का आग्रह किया है। अनूप नौटियाल ने शिक्षा मंत्री एवं विधायक का आभार जताते हुए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से मामले में शीघ्र कार्यवाही की अपेक्षा की है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि आपदा मृतकों को सच्ची श्रद्धांजलि देने एवं प्रदेश हित में उठाई गई उनकी दोनों मांगों पर प्रदेश सरकार शीघ्र ही सकारात्मक पहल करेगी।
सीएम की चेतावनी के बाद ओवरहेड टैंक से उतरे रमसाकर्मी
- -सेवा बहाली की मांग को लेकर पांच रमसाकर्मी पांच दिनों से चढ़े थे ओवरहेड टैंक पर
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। सेवा बहाली की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से पवेलियन मैदान स्थित ओवरहेड टैंक पर चढ़े पांच रमसाकर्मी मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद टंकी से उतर आए। गत दिवस मुख्यमंत्री द्वारा चेतावनी दी गई थी कि हमें टंकी पर चढ़ने वाले नहीं बल्कि काम करने वालों की जरूरत है। सीएम ने कहा था कि सरकार द्वारा चुडि़याला में हुई कैबिनेट की बैठक में रमसाकर्मियों को आउटसोर्सिंग के जरिए समायोजित करने का जो निर्णय लिया गया है, यदि टंकी पर चढ़े रमसाकर्मी सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे तक नीचे नहीं उतरे तो सरकार इस निर्णय को भी वापस ले लेगी। मुख्यमंत्री कड़े तेवर देखते हुए पवेलियन मैदान स्थित पानी के ओवरहेड टैंक पर सेवा बहाली की मांग को लेकर चढ़े पांच रमसाकर्मी छटवें दिन ओवरहेट टैंक से नीचे उतर आए। रमसाकर्मी बहाली की मांग को लेकर पिछले लंबे समय से आंदोलनरत हैं। उनके द्वारा परेड मैदान में अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा रमसा के बजट में कटौती किए जाने के बाद प्रदेश सरकार ने राज्य में माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत रमसाकर्मियों की सेवा समाप्त कर दी थी। सेवा समाप्त किए जाने के बाद रमसाकर्मी आंदोलनरत हैं, उनके द्वारा परेड ग्राउंड में अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। आंदोलनरत रमसाकर्मियों का कहना है कि वे चार साल तक स्कूलों में सेवा देते रहे। अब उन्हें अचानक बाहर कर दिया गया, जबकि विभागीय अधिकारी, शासन, सीएम और शिक्षा मंत्री तक समायोजित करने की घोषणाएं कर चुके हैं, लेकिन अब मुख्यमंत्री से बात तक नहीं करने दी जा रही है। उनका कहना है कि अब उन्हें बहुद्देशीय कार्मिकों के रूप में तैनाती की चर्चा सुनने को मिल रही है, लेकिन इसे वे स्वीकार नहीं करेंगे। बीते बुधवार को मांगों को लेकर पांच रमसाकर्मी पवेलियन मैदान स्थित पानी के ओवरहेड टैंक पर चढ़ गए थे। सीएम की चेतावनी का रमसाकर्मियों पर असर हुआ, और सोमवार को ओवरहेड टैंक में चढ़े पांचों रमसाकर्मी 134 घंटे बाद नीचे उतर आए। मुख्यमंत्री के ओएसडी आनंद बहुगुणा एवं मुख्य सचिव राकेश शर्मा द्वारा रमसाकर्मियों को टंकी से उतरने पर उनकी मांगों से संबंधित जीओ जारी करने का आश्वासन दिया गया। ओवरहेड टैंक से नीचे उतरते ही रमसाकर्मियों ने सरकार के पक्ष में नारेबाजी करते हुए आभार व्यक्त किया। रमसाकर्मियों के ओवरहेड टैंक से उतरने के बाद पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली।
ले.ज. बलवंत सिंह नेगी बने आईएमए के नए कमांडेंट
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) को एक अंतराल के बाद कमांडेंट मिला। लेफ्टिनेंट जनरल बलवंत सिंह नेगी को अकादमी का नया कमांडेंट बनाया गया है। मई में लेफ्टिनेंट जनरल मानवेंद्र सिंह के आइएमए के कमांडेंट पद से रिटायर हो गए थे। तब से आइएमए के कमांडेंट का पद रिक्त चल रहा था। इसका प्रभार पिछले दो माह से डिप्टी कमांडेंट मेजर जनरल वाईएस महिवाल के पास था। आज लेफ्टिनेंट जनरल बलवंत सिंह नेगी को अकादमी का नया कमांडेंट बनाया गया।
एक डिप्टी और आठ असिस्टेंट कमांडेंट पासआउट हुए
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। मसूरी स्थित भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस ( आइटीबीपी) प्रशिक्षण अकादमी में 41 जीओएस कंबटाइजड कोर्स के तहत एक डिप्टी कंमांडेंट और आठ असिस्टेंट कमांडेंट आज पासआउट हुए।आज सुबह मसूरी स्थित आइटीबीपी प्रशिक्षण अकादमी में 41 जीओएस कंबटाइजेशन कोर्स की पासिंग आउट परेड आयोजित की गई। अकादमी के निदेशक आइजी आनंद स्वरूप ने परेड का निरीक्षण किया। इस दौरान डिप्टी कमांडेंट निमिशा यादव को बेस्ट इनडोर और बेस्ट ओवरआल ट्रेनी की ट्राफी, जबकि असिस्टेंट कमांडेंट खड़ती विवेक नाथूजी को बेस्ट आटड डोर ट्रेनी की ट्राफी दी गई। इस दौरान आइटीबीजी के जवानों ने करतब दिखाए। पास आउट होने वालों में डिप्टी कमांडेंट निमिशा यादव, असिस्टेंट कमांडेंट अरुण नेओग, असिस्टेंट कमांडेंट खंडती विवेक नाथूजी, असिस्टेंट कमांडेंट हर्ष वी कुमारन, असिस्टेंट कमांडेंट मद्दि भरत, असिस्टेंट कमांडेंट सुमन गुरुंग, असिस्टेंट कमांडेंट श्रीनिवासु पी, असिस्टेंट कमांडेंट रोहिणी हमपाउल और असिस्टेंट कमांडेंट ओ महेश शामिल हैं।
गृह कलेश चलते फांसी लगाकर दी जान
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। डोईवाला क्षेत्र में एक व्यक्ति ने गृह कलेश चलते फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अनिल कुमार ( 50 वर्ष) निवासी केशवपुरी बस्ति डोईवाला मजदूरी करता था। किसी बात को लेकर उसका घर में झगड़ा हो गया। इसके चलते उसने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों को इसका पता सोमवार सुबह चला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कांग्रेस बनाएगी इन्दिरा प्रियदर्शिनी मंगल दल
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। प्रदेश महिला कांगे्रस अध्यक्ष सरिता आर्य की अध्यक्षता में महानगर कांगे्रस कमेटी की एक आवश्यक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने कहा कि महिला कांगे्रस की राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा राजधानी देहरादून में महिलाओं की एक बैठक अगस्त माह के अन्तिम सप्ताह में लंेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा इन्दिरा प्रियदर्शिनी मंगल दलों का गठन किया जाएगा। बैठक में केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ महिलाओं को जागरूक किया जाएगा। भाजपा के दुष्प्रचार का किस तरह जबाव देना है, महिलाओं को एक आक्रामक रणनीति अपनाये जाने के टिप्स उनके द्वारा दिए जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रही महिला योजनाओं को घर-घर तक पहुॅचाने के लिए इन्दिरा प्रियदर्शिनी मंगलदल बनाये जायंेगे। इन मंगल दलों के माध्यम से सरकार की उपब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। बैठक का संचालन करते हुए कमलेश रमन ने बताया कि महिलाओं के लिए जो योजना सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं, उनका पूरा जिम्मा महिला कांगे्रस लेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के पांच सासंद बने हैं, लेकिन उत्तराखण्ड में बजट लाने में वे लाचार हैं, ऐसे सासंदों को पद छोड़ देना चाहिए, जो प्रदेश के जनता के प्रति वफादार न हो। मुख्यमंत्री की विकास की कार्यशैली से भाजपा बौखलाई है। बैठक में नजमा खान, खष्टी बिष्ट, सुर्वषा पांल, गरिमा दसौनी,पुष्पा पाठक, विमला मन्हास, मीना रावत, चन्द्रकला नेगी, पुष्पा पंवार, सुशीला शर्मा, सुन्दरी गैरोला, सुशीला गुरूंग, खष्टी बिष्ट, गीता, आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
हिमालयी समाज एवं पर्यावरण हेतु उपयोगी शोधकार्य की महत्ती आवश्यकताः डा. ध्यानी
देहरादून, 3 अगस्त (निस)। पं. गोविन्द बल्लभ पन्त हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान, कोसी-कटारमल, अल्मोड़ा के प्रथम वैज्ञानिक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डा. पीताम्बर प्रसाद ध्यानी ने संस्थान के मुख्यालय एवं चारों क्षेत्रीय इकाईयों (हिमालच प्रदेश, श्रीनगर - उत्तराखण्ड, सिक्किम एवं अरूणाचल प्रदेश) से आए हुए संस्थान के 34 वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की विस्तृत समीक्षा की, उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बदलते सामाजिक एवं पर्यावरणीय परिवेश में वैज्ञानिकों को अपने शोध कार्यों को प्रकाशन के इतर समाज के निर्धन वर्ग हेतु उपयोगी बनाने हेतु अधिकाधिक प्रयास करने होंगें। उन्होंने संस्थान की स्थापना के 25 वर्षों के सफर पर दृष्टि डालते हुए कहा कि इस अवधि में संस्थान द्वारा सम्पूर्ण हिमालय की ज्वलंत पर्यावरणीय समस्याएॅं जैसे - बंजर भूमि सुधार, जल संरक्षण एवं जल स्त्रोतों के पुर्नजीवन, भूस्खलन की रोकथाम, जन-सहभागिता द्वारा जैव-विविधता संरक्षण, कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि, जड़ी-बूटियों का कृषिकरण, कम लागत की पर्यावरण मित्र तकनीकों द्वारा ग्रामीण कृषकों का आर्थिक उन्नयन, इत्यादि के क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय शोध कार्य को जन-जन तक पहुॅंचाने हेतु विशेष प्रयास करने होंगें ताकि जन-सामान्य इससे लाभान्वित होकर उनमें पर्यावरण संरक्षण हेतु अभिरूचि विकसित हो सके। उन्होंने आवाह्न किया कि संस्थान के षोध कार्यों मंे आगामी पंचवर्षीय योजना में आमूल-चूल परिवर्तन किया जाएगा जिससे कि वैज्ञानिक एकजूट होकर पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान तलाशने की दिशा में अपना अधिकाधिक योगदान कर सकेंगें। इस अवसर पर सभी वैज्ञानिकों ने संस्थान के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु महत्वपूर्ण सुझाव रखें। मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों की पर्यावरणीय समस्याएॅं एवं संभावनाएॅं भिन्न हैं। अतः क्षेत्रीय जन-सरोकारों के मद्देनजर शोध-परियोजनाएॅं विकसित की जाएं ताकि राज्य सरकारों एवं अन्य लाभार्थियों तक शोध परिणामों को पहुॅंचाने में आसानी हो सके।


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