पटना ,22 अगस्त । असंगठित क्षंेत्र कामगार संगठन एवं सहयोगी संगठनों दलित अधिकार मंच, दलित समन्वय बिहार, बीड़ी कामगार संगठन, मुसहर विकास मंच, महिला कामगार संगठन, बिहार विकलांग अधिकार मंच, महिला अधिकार मोर्चा, झुग्गी-झोपड़ी संघर्ष मोर्चा, राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘असंगठित कामगारों के हक में नागरिक मांग पत्र ’’ पर परिचर्चा कर आयोजन एएन सिन्हा इन्स्टीट्यूट के सभागार में किया गया । नागरिक मांग पत्र के संदर्भ में संगठन के संयोजक विजय कान्त सिंहा ने 31 सूत्री मांगो पर विस्तार पूर्वक प्रकाष डालते हुए विभिन्न दलों एवं सामाजिक संठनों के बीच चर्चा के लिए प्रस्तुत किया । बिहार में सकल घरेलू उत्पाद में बडा हिस्सा 67 प्रतिषत योगदान असंगठित क्षेत्र के कामगारों का है जो सम्पूर्ण श्रमषक्ति का 96 प्रतिषत है ।
परिचर्चा के अन्त में विनय ओहदार ने सभी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों को असंगठित कामगारों के नागरिक मांग पत्र को राजनीतिक मुदा बनाने की अपील की । इस अवसर पर उपस्थित भाजपा, जद यू, राजद , सीपीआई , सीपीएम , रालोसपा , लोजपा ,हम, बसपा , एनपीपी , भारतीय मोमीन फं्रण्ट ,काॅग्रेस आदि दलों के प्रतिनिधियों के अलावे अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विद्या नन्द विकल , किसान आयोग के अध्यक्ष सीपी सिन्हा , टेडं यूनियन के प्रतिनिधिया ने ेभाग लिया । सभी ने नागरिक मांग पत्र का पूरजोर समर्थन करते हुए इसे और अधिक बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये । सभी ने इस बात पर सहमति जतायी कि असंगठित कामगारों के हक में राष्टीय स्तर पर समग्र संामाजिक सुरक्षा अधिकार को मौलिक अधिकार के रुप में मान्यता मिले ।
असंगठित कामगारों के हित में राज्य स्तर पर एक आयोग का गठन हो साथ ही उनके हक में न्यूनतम मजदूरी के प्रावधानों को महंगाई के मदेनजर बढायी जाए । उक्त अवसर पर सहयोगी विद्या नन्द राम , अभिषेक कुमार , कपिलेष्वर राम ,असर्फी सदा , रंजन कुमार , सुनिल बासु , आदि उपस्थित थे ।
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