लंदन 20 नवंबर, दुनिया भर में मौसम को बदलनेे की क्षमता वाली ‘अल-नीनो’ इस साल अपना सबसेेे भयावह रूप दिखा सकती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में होने वाली अल-नीनोे की घटना इस साल इतनी भयवाह होगी, जितनी पिछलेे 15 वर्षों में पहले कभी नहीं रही। डेली मेल के अनुसार अल-नीनो प्रशांत महासागर के पानी में होने वाली वह घटना है जिसके प्रभाव में न केवल उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों बल्कि शीतोष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में स्थित देशों के मौसम में जबरदस्त बदलाव होता है और इसके कारण दुनिया भर में बहुत से देश सूखे की मार झेलते हैं तो कई बाढ केे भयानक रूप का सामना करते हैं। अल -नीनोेे के कारण पूर्वी प्रशांत महासागर और दक्षिण अमेरिकी देशों में भयानक बाढ और भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ जाता है। इसके अलावा भारत ,इंडोनेेशिया और आस्ट्रेलिया में सूखेे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और इससे जंगलों में आग लगने और फसलों का उत्पादन कम रहने की आशंका बेहद बढ जाती है। हाल ही के महीनों में अल-नीनो के प्रभाव में इंडोेेनेशिया के इतिहास की कुछ सबसे भयानक दवानल की घटनाएं देखने को मिली है। प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय प्रदेश में पड़ने वाले भाग में गर्म पानी के वितरण में आने वाले बदलाव की घटना को अल -नीनो के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण हवाएं पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती हैं और इन तेज हवाओं का प्रभाव समुद्र के पानी पर बहुत अधिक होता है। भूमध्यरेखीय क्षेत्र में इस द्रुत गति हवाओं के प्रभाव में समुद्र की ऊपरी सतह का गर्म पानी भी पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लगता है और इस कारण प्रशांत महासागर के पश्चिमी हिस्सेे में गर्म पानी का बड़ी मात्रा में प्रसार होता है।
दूसरी ओर महासागर में पूर्वी हिस्से से पानी पश्चिम की ओर फैल जाने से गहरे समुद्र से ऊपर आये ठंडे पानी का प्रसार पूूर्वी क्षेत्र में हो जाता है। इसके बाद हवाओं के प्रभाव में पूर्व से पश्चिम में फैला गर्म पानी एकबार फिर पूर्व की ओर बढता है और इस तरह जलधाराओं के चक्र से लगभग पूरे प्रशांत महासागर में गर्म पानी फैल जाता है। प्रशांत महासागर के पानी के गर्म हो जाने की घटना ही अलनीनो है। महासागरों का तापमान प्रमुख रूप से जलधाराओं से निर्धारित होता है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में अाने वाले भाग में हवाओं और जलधाराअों में होने वाले परिवर्तन का असर पूरी दुनिया के मौसम में दबाव संबंधी गड़बडियां पैदा करता है। मौसम विज्ञानियों ने इस साल मध्य प्रशांत महासागर के तापमान में रिकार्ड बढोतरी दर्ज की है। नासा की एक रिपोर्ट में 1980 के बाद से इस साल अक्टूबर को सबसे गर्म महीना बताया गया है और इसके लिए “ अल-नीनो” प्रभाव को ही जिम्मेदार बताया गया है। संयुक्त राष्ट्र्र्र की मौसम एजेंसी ने भी इसी सप्ताह चेतावनी जारी की कि अल -नीनोेेे के कारण अभी तक विश्व के कई देशों में भयानक सूखे पडेे हैं और कई देश जबरदस्त बाढ की चपेट में आये हैं। विश्व मौसम संगठन के प्रमुख मिशेल जरूद नेेे कहा है कि इस साल जिस तरह का जबरदस्त अलनीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है उससे उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय प्रदेेशों में अाने वाले कई देशों को जबरदस्त सूखेे या बाढ का समाना करना पड रहा है।

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