नयी दिल्ली, 07 नवंबर, देश में असहिष्णुता बढ़ने का आरोप लगाते हुए अब तक 80 से अधिक बुद्धिजीवियों द्वारा पुरस्कार लौटाये जाने के विरोध में फिल्म अभिनेता अनुपम खेर के नेतृत्व में सरकार समर्थक लेखकों और कलाकारों ने आज राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मिलकर देश की छवि को खराब करने वाली ताकतों के प्रति अपना विरोध दर्ज किया। मार्च में पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात नर्तक बिरजू महाराज, जानेमाने लेखक नरेंद्र कोहली, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर, चर्चित गायक अभिजीत और मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी, समाज विज्ञानी मधु किश्वर, फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला तथा अशोक पंडित समेत कई कलाकारों ने भाग लिया। ये लोग हाथों में तख्तियां और बैनर तथा पोस्टर भी लिये हुए थे और सहिष्णु भारत-सहिष्णु भारत और भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। राजधानी स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आज सुबह करीब 11 बजे सरकार समर्थक लेखकों और कलाकारों का जमावड़ा शुरू हुआ जो मार्च की शक्ल लेता हुआ राष्ट्रपति भवन की तरफ बढ़ा। यह मार्च करीब एक घंटे के भीतर ही विजय चौक के पास पहुंचा लेकिन पुलिस ने इन कलाकारों को आगे जाने से रोक दिया। तब श्री खेर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मुलाकात करने गया और उन्हाेंने श्री मुखर्जी से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन पर 40 से अधिक कलाकारों और लेखकों के हस्ताक्षर हैं जिसमें अनुपम खेर के अलावा मधुर भंडारकर, मशहूर फिल्मकार प्रियदर्शन, मालिनी अवस्थी, ध्रुपद गायक डागर बंधु, जाने माने लेखक भैरप्पा, प्रख्यात लेखक नरेन्द्र कोहली, अभिनेत्री रवीना टंडन और समाजिक कार्यकर्ता मधु किस्वर शामिल है। श्री खेर ने राष्ट्रपति से मिलने के बाद पत्रकारों को बताया कि श्री मुखर्जी कलाकारों की भावनाआें से सहमत हैं। राष्ट्रपति ने कहा है कि भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने से बुना गया है और हमें उसका सम्मान करना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि ये पुरस्कार सरकार द्वारा नहीं दिये जाते बल्कि देश के लोगों द्वारा दिये जाते हैं।
मार्च में शामिल फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने कहा कि जो अवार्ड वापस कर रहे है वो नेहरू के समर्थक हैं और सत्ता से बेदखल होने की उनकी बौखलाहट झलक रही है, इतिहास को बदल कर नेहरू नीति को खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा “पुरस्कार लौटाने वाले लोगों का विरोध- प्रदर्शन देश को बदनाम करने का राजनीतिक षडयंत्र है।” जानी मानी लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने पुरस्कार वापस करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले तीस वर्ष के दौरान किसी एक साहित्यकार का नाम बताइये जिसकी एक किताब का नाम याद हो। ऐसा तब होता है जब आप दिल से नहीं लिखते है, दिमाग से किसी को खुश करने के लिए लिखते है। संगीतकार समीर ने अवार्ड वापस करने वालों की तीखी आलोचना करते हुए कहा “अगर अापको लगता है कि काेई आपके खिलाफ गलत बोल रहा है ताे अापको अावाज उठानी चाहिए। मुझे लगता है कि ये अवार्ड वापस करना किसी मकसद से हो रहा है। अगर विरोध करना ही है तो अपनी लेखनी या रचनात्मक कार्य के द्वारा करिये। सम्मान अापको किसी दल से नहीं बल्कि राष्ट्र से मिला है।” इस मौके पर ‘मार्च फॉर इंडिया’ के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि गत दिनों के घटनाक्रम से हम रचनाकार और कलाकार चिंतित हैं, इसलिए आपसे भेंटकर अपना पक्ष रखना चाहते हैं । कोई भी नृशंस हत्या निंदनीय है और हम उनकी कठोर आलोचना करते हैं और त्वरित न्याय की अपेक्षा भी रखते हैं । किन्तु इसकी आड़ में कुछ लोगों द्वारा अगर एक सुनियोजित चाल के तहत देश को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने का प्रयास होता है तो हमें इस पर चिन्तन करना चाहिए ।
हमारा दृढ़ मत है कि किस भी रचनाकार के विरोध का सम्मान होना चाहिए और हमारा संविधान उनकी पुष्टि भी करता है लेकिन अगर ये विरोध किसी क्रमवार योजना का हिस्सा हों तो उनका खुलासा भी होना चाहिए ।
ज्ञापन में कहा गया है कि गत दिनों के घटनाक्रम से हम रचनाकार और कलाकार चिंतित हैं, इसलिए आपसे भेंटकर अपना पक्ष रखना चाहते हैं । कोई भी नृशंस हत्या निंदनीय है और हम उनकी कठोर आलोचना करते हैं और त्वरित न्याय की अपेक्षा भी रखते हैं । किन्तु इसकी आड़ में कुछ लोगों द्वारा अगर एक सुनियोजित चाल के तहत देश को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने का प्रयास होता है तो हमें इस पर चिन्तन करना चाहिए ।
हमारा दृढ़ मत है कि किस भी रचनाकार के विरोध का सम्मान होना चाहिए और हमारा संविधान उनकी पुष्टि भी करता है लेकिन अगर ये विरोध किसी क्रमवार योजना का हिस्सा हों तो उनका खुलासा भी होना चाहिए ।

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