नयी दिल्ली, 15 नवंबर, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार अपने चहेते पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रही है। पार्टी के मुखपत्र “कांग्रेस संदेश” के ताजा अंक के संपादकीय में मुख्य विपक्षी दल ने मोदी सरकार के न्यूनतम सरकार और अधिकतम प्रशासन के दावे को हास्यास्पद बताते हुए कहा है कि भाजपा के 16 माह के शासनकाल में इस दावे की पोल खुल चुकी है। संपादकीय में कहा गया है कि सरकार निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रही है और अपने चहेते पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को बदल रही है। पत्रिका ने ऊर्जा क्षेत्र प्रधानमंत्री के चेहते दो पूंजीपतियों का जिक्र करते हुए कहा है कि उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए एनटीपीसी के शीर्ष पद पर नियुक्ति प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया है।
कांग्रेस संदेश के संपादकीय में कहा गया है “एनटीपीसी के मुख्य प्रबंध निदेशक पद के लिए एक आईएएस अधिकारी का विशेष पक्ष लिया गया है। यही नहीं कई विश्वविद्यालयों में शीर्ष पद पर नियुक्ति नहीं की गयी है और भारतीय फिल्म संस्थान पुणे का विवाद सबके सामने है। इससे पहले कोई भी सरकार केंद्र में ऐसी नहीं रही जिसने इस तरह से नियमों को ताक पर रखकर काम किया है।” कांग्रेस के मुखपत्र में कहा गया है कि इस तरह से काम करने से नौकरशाहों का मनोबल गिरेगा और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा आम आदमी कमजोर होगा। सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा गया है कि मोदी सरकार को केंद्र में 16 माह हो चुके हैं और अब उसे काम करना चाहिए। आखिर कब तक अपनी कमियों को छिपाने के लिए कांग्रेस शासन को कोसते रहेंगे। संपादकीय में प्रधानमंत्री से सवाल किया गया है कि “अच्छे दिन कहां हैं मोदी जी।”

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