नयी दिल्ली, 07 नवंबर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने धर्मनिरपेक्षता को कांग्रेस के खून का अभिन्न तत्व बताते हुए अाज कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को समाप्त करेगी। श्री गांधी ने यहाँ राजीव गांधी सामाजिक अध्ययन संस्थान में पं. जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती वर्ष के अवसर पर “स्वतंत्रता के बिना शांति नहीं” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ समय से देश भर में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताअों से मिल रहे हैं और इससे उनका यह विश्वास दृढ़ हुआ है कि सेकुलरिज़्म कांग्रेस के खून में है और सबका सम्मान उसके डीएनए में है। श्री गांधी ने कहा कि दुनिया को देने के लिये हमारे पास एक सहिष्णुता ही है। आज विभिन्न विचाराधाराओं पर चलने वाले लोगों को जिस एक बात ने इकट्ठा किया है, वह है हमारी स्वतंत्रता, अधिकारों एवं लोकतांत्रिक प्रणाली पर आघात। उन्होंने कहा, “ हम मोहन भागवत (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक) की तुच्छ सोच नहीं चाहते हैं। हमारे देश की शांति एवं स्वतंत्रता को गहरा आघात लगा है। संघ का मकसद भारत को एक मज़हबी और तानाशाही वाला देश बनाना है। इसे हासिल करने के लिये वर्तमान उदारवादी, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी लोकतांत्रिक गणराज्य को खत्म करना जरूरी है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि पिछले 18 माह में भाजपा एवं संघ ने दिखा दिया है कि वे सत्ता की ताकत से उन मूल्यों को नष्ट करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अभिव्यक्ति एवं बोलने, धर्म एवं उपासना, विचारों एवं विश्वास की आजादी की स्वतंत्रता पर सभी हमलों की निंदा करती है।
श्री गांधी ने गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में पंचायत चुनावाें में भाग लेने वालों के लिये न्यूनतम अर्हता निधारित करने के निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा किस मुँह से गैरस्नातकों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकेगी। यह देश किसी एक विचारधारा का नहीं है। उन्होंने संघ को फासीवादी संगठन करार देते हुए संघ प्रमुख श्री भागवत का दशहरा संबोधन दूरदर्शन पर सीधे प्रसारित किये जाने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ समय से देश भर में जगह-जगह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं एवं नेताओं से मिल रहे हैं और उनसे बातचीत कर रहे हैं। उनका इस संवाद से यह विश्वास आैर पक्का हुआ है कि धर्मनिरपेक्षता कांग्रेस के खून में है और सबका सम्मान उसके डीएनए में है। उन्होंने कहा कि पं. नेहरू में बहुत गहरी सहनशीलता थी। उन्होंने भिन्न -भिन्न पृष्ठभूमि प्रत्येक व्यक्ति की अलग- अलग गाथा को एक शक्ति के रूप में देखा। उनके अनुसार भारत की सहिष्णुता ने ही उसे महान बनाया है। इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन कल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था। विभिन्न विचारधाराओं पर विश्वास करने वाले शिक्षाविदों, कलाकारों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने इसमें हिस्सा लिया और देश में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिये खुल कर लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।

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