गाय पर राजनीति खत्म होने का नाम ही नही ले रही है. पूरे देश में गाय को लेकर काफी गरम माहौल है. बिहार का विधानसभा चुनाव भी इससे अछूते नही. राजनेताओं के बयान थमने का नाम नही ले रहे. ऐसे में भला हमेशा अपने बयानों पर विवादों के घेरे में रहे पूर्व न्यायधीश मार्कण्डेय काटजू कैसे अछूते रह सकते है. उन्होने ने भी सोचा चलो, कुछ सुर्खियां बटोर ली जाए. दुखती नब्ज पर हाथ रख लिया जाए. दादरी काण्ड के बाद तो बीफ का मामला थमने का नाम नही ले रहा. ऐसे में काटजू ने एक नया बयान दे दिया. लोगों को दाल और प्याज की जगह ‘गाय का मूत्र और गोबर खाने’ के लिए कह दिया. इससे पहले भी बीफ को लेकर बयान दिया था कि मैं तो खाता हूं, और खाऊंगा. लगता है देश में कुछ और बचा ही नही हैं.
काटजू जी आप तो बीफ भी खाते है तो इसकी शुरूआत आप करिए. गौमूत्र पीने का वर्णन तो शास्त्रों में भी है. गोबर को खाने की शुरूआत आप ही करे. अभी तक तो गाय के गोबर का प्रयोग पूजा, और उपले बनाने में किया जाता रहा है. जनता इस समय मंहगाई से परेशान है. पहले प्याज को लेकर और अब थाली से दाल गायब हो गई. और आप हंसी उड़ा रहे हैं. देश के उन गरीबों का जो पेटभर खाने के लिए तरसते हैं. काटजू जी आप तो ठहरे बड़े आदमी. क्या फर्क पड़ता है दाम बढ़े या कम हो. गाय को हमेशा सनातन धर्म में माता का दर्जा दिया जाता है.
हिंदू धर्म के लोग उसे माता कहकर पुकारते है. अब इसमें भी आप को तकलीफ हो रही है. गाय एक पशु है, वो कैसे किसी की माता हो सकती है. आप उसे पशु माने दूसरा कोई माता मानता है तो मानने दो. आप ने तो कह दिया कि बीफ खाते हैं और खाते रहेगें. विदेशों में बीफ बैन क्यों नही कराती है सरकार ये तो कह दिया. इक बात कही जाती है, जब अपना सिक्का खोटा हो तो दूसरों को नही कहते है. समझदार तो होगें ही. अब समझ जाइए. लगता है बचपन में आप ने गाय पर निबंध नही लिखा है. लिखा होता तो ये सब नही कहते. इतने बड़े ओहदे पर रहने के बाद भी, आग में घी ड़ालने का काम कर रहे है.
देश में इस मुद्दे पर पहले से ही माहौल पूरी तरह से गरमाया हुआ है. बिहार के पूरे चुनाव में बीफ ही चर्चा का विषय बना हुआ है. गौमूत्र से बीमारी नही होती. बीफ खाने से बीमारी होती है. इसे देखते हुए आप ने प्याज और दाल की जगह गोबर खाने की सलाह दे दी. यहां तक ये भी कह दिया कि गाय का गोबर खाता हुआ कोई कार्टून बनाकर भेजेगा तो मै उसे अपनी फेसबुक वॉल पर लगा दूंगा. कोई क्यों भेजे आप बनवा लीजिए.किसी की आस्था का मजाक न ही बनाए तो अच्छा है. मीडिया में आने के लिए और सुर्खियां बटोरने के लिए कुछ और काम करो. जो देश और समाज के लिए अच्छा हो.
रवि श्रीवास्तव
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक, कवि,
ravi21dec1987@gmail.com

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