जयपुर, 19 नवम्बर, केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कारण सरकारी खजाने पर काफी बोझ पड़ेगा और इसे कम करने के लिए आय के अन्य स्रोत तलाश करने पड़ेंगे। श्री जेटली ने यहाँ ‘रिसर्जेट राजस्थान’ कार्यक्रम को संबांधित करते हुये कहा कि सरकारों को गैर योजना मद में काफी राशि खर्च करनी पड़ती है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से भार और बढ़ जायेगा। उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कुशल वित्तीय प्रबंधन की सराहना करते हुये कहा कि आय के स्रोत खोजने और निवेश के नये क्षेत्र तलाशने से सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को आसानी से कम किया जा सकेगा । उन्होंने कहा कि बीमारू श्रेणी से निकलने के बाद सुधार के कई कदम उठाने से अब राजस्थान निवेश का बेहतर स्थान हो गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश का वातावरण तैयार करने के लिए सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाये हैं। इससे निवेशकों को आसानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सौर, पवन ऊर्जा तथा पर्यटन क्षेत्र में निवेश की काफी संभावनाएँ है। श्री जेटली ने कहा कि वर्ष 2003 से 2008 तक का समय राजस्थान के लिए मुश्किलों भरा था तथा गलत दिशा में जाने के कारण बिजली कम्पनियाँ घाटे में आ गई थीं। वर्ष 2008 में 21 हजार करोड़ का घाटा एवं वर्ष 2013 में 72 हजार करोड़ का घाटा हो गया। उन्होंने कहा कि अब उपभोक्ता को बिजली के बिल में दो रुपये प्रति यूनिट ब्याज का देना पड़ता है। तब बैंकों को भी ऋण देने में मुश्किलें आ रही थीं, लेकिन अब नया अध्याय शुरू हो गया है। पूरे देश में वातावरण बदल रहा है तथा देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि जन सहभागिता के बिना विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के साथ मिलकर विकास का प्रयास कर रही है। उन्होंने महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी में विप्रो कम्पनी द्वारा निवेश करने के निर्णय पर खुशी जाहिर की।

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