मैं लीक से हटकर रोल करना चाहता हॅू : रिचा चडडा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

मैं लीक से हटकर रोल करना चाहता हॅू : रिचा चडडा

richa chadha
चाल्र्स शोभराज की जीवन पर बनी फिल्म ‘‘मैं और चाल्र्स‘‘ में रिचा चड्ढ़ा के एक अहम् किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री रिचा ने ‘फुकरे’ मसान जैसी फिल्मों में भी अपने अभिनय के रंग बिखेर चुकी है। आज उनके कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव भी है। पूजा भट्ट की फिल्म कैबरे के अलावा  एक और फिल्म है ‘‘और देवदास में भी काम कर रही है। रिचा अपने करियर को लेकर क्या सोचती है जानते है उनकी ही जुबानी ।  

मसान के बाद में हाल में रीलिज ‘मैं और चाल्र्स फिल्म को लेकर क्या कहना है?    
यह काफी दिलचस्प फिल्म है। उन दिनों ‘‘फुकरे’ रिलीज हुई थी। जब मुझे इस फिल्म के बारे में पता चला तो मैंने खुद फिल्म के डायरेक्टर को अप्रोच किया था। कहा जाता है कि इस तरह की अप्रोच गलत होती है लेकिन मैं इतनी नई भी नहीं थी।

ऐसा क्या था फिल्म चार्स की भूमिका में, जिसे करने के लिये आपने सामने से फोन किया? 
मुझे पहले से भूमिका के बारे में जितना पता था उसके अनुसार, ऐसा क्या था उस शख्स में कि एक पढ़ी-लिखी लड़की उसके सम्मोहन में आकर अपनी पूरी लाइफ खराब कर बैठी। दरअसल उस भूमिका में बहुत सारी परतें थी, दूसरे फिल्म में नैतिकता की बातें की गई हैं। उस वक्त का माहौल हर तरफ एंबेसडर कारें या उसी तरह की और बहुत सारी चीजें। मुझे उन सबके बीच यह फिल्म करते हुए बहुत मजा आया।

किस तरह की परतों की बात कर रही हैं?
मैं कह सकती हूं कि किसी के लिये एक अंधविश्वास, जिसे अंधा प्यार भी कहा जा सकता। फिल्म में उसका नाम भी मीरा इसीलिये रखा गया हैं क्योंकि वह उसके प्यार में लीन है, उसे कोई परवाह नहीं। यह कुछ इसी तरह की भूमिका है। 

रियल कैरक्टर्स में किसी से मिलने का अवसर मिला?    
रियल किरदारों में सबसे बड़े और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण उस केस से जुड़े इंवेस्टीगेटर ऑफिसर आमोद कंठ के साथ काफी वक्त बिताने का मौका मिला। उनका इस फिल्म की रिसर्च में बहुत बड़ा हाथ रहा है। वह एक ऐसे वाहिद आदमी हैं जिन्होंने पुलिस फोर्स से रिटायर होने के बाद भी समझा कि समाज में किस तरह से बदलाव लाना है। उनका दिल्ली में एक एनजीओ है प्रयास। जो बच्चों के लिये काम करता है जिससे वह बच्चे क्राइम की दुनिया में न जाये। हम उसी प्रयास को प्रमोट करने के लिये दिल्ली गये थे। इसके अलावा मुझे रियल पुलिस ऑफिसर झेंडे से तो मिलने का मौका नहीं मिला लेकिन फिल्म में उनका किरदार निभा रहे मराठी एक्टर नंदू यादव से जरूर मिलना हुआ। नंदू सेम झेंडे ही लगते हैं।

नई तरह की कहानियां, नये किरदार, नई सोच के डायरेक्टर्स। इनके साथ काम करते हुये कैसा लगता है?    
 बहुत अच्छा। इनके साथ काम करते हुये मेरे भीतर के एक्टर को बहुत संतुष्टी मिलती है। दरअसल आप जो भाषा बोल रहे हैं उसे सामने वाला बंदा समझता है इससे बढ़िया बात और क्या हो सकती है। हमारे यहां जो थिल्रर बनते हैं उनमें शोर शराबा, खून खराबा काफी मात्रा में होता है लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि यह एक साइकोलॉजिकल थिल्रर है। इसमें एक उत्सुकता बनी रहती है कि आगे क्या होगा। मैंने जब फिल्म देखी तो मुझे भी ऐसा ही लगा क्योंकि बहुत सारे ऐसे सीन्स थे जिनमें मैं नहीं थी। सबसे बड़ी बात कि इसमें रियलिस्टक एप्रोच बहुत ज्यादा है।

आपकी भूमिका क्या संदेश देती है?    
मैं यहां एक लॉयर हूं इसलिये मेरी भाषा भी उन्हीं के जैसी है यानी मैं बहुत संभल कर बोलती हूं जैसे लॉयर बोलते हैं। फिर भी उसे अंत में मुंह की खानी पड़ती है। मेरा रोल भी यही कहता है कि अगर आप क्राइम का साथ देंगे तो आपका हश्र बुरा ही होगा।

 इस मुकाम तक पहुंचने के बाद क्या फील करती हैं?    
 मुझे बहुत खुशी होती है जब मैं अपने बारे में सुनती हूं कि यह लड़की बहुत सोच समझ कर फिल्में चुनती है और फिर उनमें इसका बेहतरीन काम देखने को मिलता है। बस लोग इज्जत करते हैं, इज्जत से देखते हैं। 

 आगे क्या कर रही हैं?
  मेरे पास एक फिल्म हैं ‘‘कैबरे’ जिसे पूजा भट्ट बना रही हैं। एक और फिल्म है ‘‘और देवदास’। इसके अलावा एक दो फिल्में और हैं। 

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