नयी दिल्ली, 23 दिसम्बर, सरकार ने आज स्वीकार किया कि ब्रिटेन से भारत को मिलने वाली परंपरागत आर्थिक सहायता इसी माह समाप्त हो रही है लेकिन इस निर्णय से भारत चिंतित नहीं बल्कि खुश है क्योंकि उसने हमारी बढती हुई आर्थिक ताकत को पहचानकर यह निर्णय लिया है। लोकसभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि ब्रिटेन की संसद ने नौ नवंबर 2012 को इस संबंध में फैसला लेते हुए कहा था कि 2015 के बाद भारत के साथ बदलते परिवेश में संबंधों को नया रूप दिया जाएगा। इस बदलते माहौल का हवाला देते हुए उसने कहा था कि भारत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है और उसको अब विदेशों से आर्थिक सहायता देने की जरूरत नहीं है बल्कि उसे ढांचागत मजबूती प्रदान करने के लिए तकनीकी सहायता की जरूरत है।
दक्षिण एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों और नेपाल में आयी आपदा की तरह भारत द्वारा क्या अन्य सदस्यों को भी इसी तरह से पूरी मदद देने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि निश्चितरूप से नेपाल के साथ ही भूटान को दक्षेस के अन्य सदस्यों की तुलना में भारत से ज्यादा सहायता मिलती है लेकिन अन्य देशों के साथ भी भारत का समझौता है और वह उन्हें समय समय पर मदद करता रहता है। उन्होंने कहा कि भारत ने दक्षेस देशों को एक उपग्रह बनाने की भी सलाह दी थी ताकि सभी को इसका लाभ मिल सके। उनका कहना था कि इस दिशा में आगे की बातचीत चल रही है।

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