काबुल. 25 दिसम्बर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस की दो दिन की यात्रा के बाद अफगानिस्तान की एकदिवसीय यात्रा पर आज सुबह यहां पहुंच गये, हवाईअड्डे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद हनीफ अतमार और उप विदेश मंत्री हिकमत करजई ने श्री मोदी की अगवानी की। यहां वह भारत द्वारा निर्मित अफगान संसद भवन के नये परिसर का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री मोदी की अफगानिस्तान की यह पहली यात्रा है और सुरक्षा कारणों से उनकी इस यात्रा के बारे में पहले खुलासा नहीं किया गया था। यहां पहुंचने पर श्री मोदी ने कहा, “काबुल में दोस्तों के बीच आकर खुश हूं। यहां राष्ट्रपति अशरफ गनी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला और पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात करूंगा।”
भारत ने 2007 में अफगानिस्तान के संसद भवन की इमारत बनाने का काम शुरू किया था। शुरूआत में इसकी अनुमानित लागत साढ़े चार करोड़ डॉलर थी लेकिन निर्माण पूरा होने तक नौ करोड़ डॉलर लग गये। इस परिसर में अफगानिस्तान के निचले सदन वोलेसी जिरगा और ऊपरी सदन मेशरानो जिरगा की इमारतें हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मकसद तालिबानी आतंकवाद से उबरने का प्रयास कर रहे अफगानिस्तान को भारत के समर्थन का संदेश देना है। श्री मोदी इस दौरान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को उन चार एमआई-25 लड़ाकू हेलिकॉप्टरों में से एक औपचारिक तौर पर सौंप सकते हैं, जो अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों को सुदृढ़ करने की कोशिश के तहत भारत उसे तोहफे में दे रहा है।
यह हेलिकॉप्टर पहला घातक सैन्य हथियार हैं जो भारत, अफगानिस्तान को सौंपने वाला है। अफगानिस्तान लंबे समय से विमानों की मांग कर रहा है। भारत ने अब तक अपना सैन्य सहयोग अफगानी सेना के जवानाें को प्रशिक्षित करने तक ही सीमित रखा है। श्री गनी ने अप्रैल में अपनी भारत यात्रा के दौरान श्री मोदी को अफगानिस्तान यात्रा का न्योता दिया था। श्री मोदी से पहले 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अफगानिस्तान का दौरा किया था।

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