नयी दिल्ली, 10 जनवरी, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी के इस बयान के बाद कि 2012 में सेना की टुकड़ियों के ‘दिल्ली कूच’ की खबर सच थी, देश की राजनीति गरमा गयी है। भारतीय जनता पार्टी ने इस पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री ए के एंटनी से सफाई मांगी है जबकि कांग्रेस ने श्री तिवारी से बयान से किनारा कर लिया है। साल 2012 में एक अंग्रेजी दैनिक में खबर छपी थी कि उस साल जनवरी में सेना की दो टुकड़ियां सरकार को सूचित किये बगैर दिल्ली की तरफ 'कूच' कर रही थीं। पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री तिवारी ने कल एक पुस्तक विमोचन के अवसर पर यह कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने इसे एक पुष्ट खबर बताते हुए कहा कि वह उस समय रक्षा मंत्रालय की स्थायी समिति के सदस्य थे इसलिए इसकी सच्चाई से भली भांति वाकिफ हैं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सच्ची घटना थी। आज उन्होंने फिर कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं। तत्कालीन सेना प्रमुख और अब केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने श्री तिवारी के इस बयान पर घोर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि श्री तिवारी को आजकल कुछ काम नहीं है इसलिए वह इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। वह इस बारे में उनकी लिखी पुस्तक पढ़ लें तो सारी बातें समझ में आ जाएंगी।
उधर भाजपा ने श्री तिवारी के बयान पर डॉ़ सिंह और श्री एंटनी से स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि उनकी पार्टी के ही एक बड़े नेता विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा है कि उस समय डॉ़ सिंह प्रधानमंत्री थे और श्री एंटनी रक्षा मंत्री थे इसलिए उनकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह श्री तिवारी के बयान पर अपना रुख साफ करें। श्री एंटनी ने श्री तिवारी के बयान का खंडन करते हुए तिरुवनंतपुरम में कहा कि रक्षा मंत्री रहते हुए उस समय संसद में उन्होंने इस बारे में स्पष्टीकरण दे दिया था और अब नए सिरे से इस बारे में कुछ भी कहने का कोई मतलब नहीं है। कांग्रेस ने इस खबर को गलत बताते हुए श्री तिवारी के बयान से यह कहते हुए किनारा कर लिया है कि यह उनका निजी नजरिया हो सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मुन सिंघवी ने कहा, “इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है।”
पार्टी के एक अन्य प्रवक्ता पीसी चाको ने कहा कि सेना के दिल्ली कूच की खबर को कांग्रेस पार्टी स्पष्ट रुप से खारिज करती है। सरकार की जानकारी के बगैर सेना की ओर से ऐसा कुछ नहीं किया गया था। अखबार ने यह खबर तब छापी थी जब श्री वी के सिंह थल सेना प्रमुख के पद पर थे और उम्र विवाद और भ्रष्टाचार के अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के साथ उनकी तनातनी चल रही थी। खबर के मुताबिक सेना की ये टुकड़ियां दिल्ली से 150 किमी दूर तक पहुंच गयी थीं। अख़बार ने सेना की इस कार्रवाई को अप्रत्यक्ष रूप से तख्तापलट के प्रयास के रूप में रखने की कोशिश की थी। हालांकि सरकार और सेना ने इस तरह की किसी भी संभावना से साफ इन्कार किया था, और इसे महज एक नियमित सैन्य अभ्यास बताया था। अखबार में पूर्व संपादक शेखर गुप्ता ने कहा कि वह रिपोर्ट सच थी और इसे किसी तरह के प्रमाण की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सब जानते हैं कि सच क्या है। श्री गुप्ता ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि राजनीतिक खेमे में किसी ने इस मामले पर बात रखी।

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