नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सम-विशम फार्मूले को लागू करने पर फोर्टिस एस्काॅटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने इस दिशा में आगामी 2 सप्ताह के दौरान प्रदूषण कम करने की दिशा में योगदान करने का फैसला किया है बल्कि एक दीर्घकालिक पर्यावरण अनुकूल कदम भी उठाया है।
देशभर में कार्बन उत्सर्जन को 2030 तक 33 से 35 फीसदी तक कम करने और पारंपरिक ईंधन स्रोतों के इस्तेमाल में कमी लाने के लक्ष्य के मद्देनज़र फोर्टिस एस्काॅटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने एक कदम आगे बढ़ाया है। जिम्मेदार संगठन होने के नाते फोर्टिस एस्काॅटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने अपने कर्मचारियों को हाइब्रिड/इलैक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ब्याज मुक्त ऋण देने की पेशकश की है। इन वाहनों के दो बड़े फायदे ये हैं कि एक तो इनसे कम उत्सर्जन होता है और साथ ही ये ईंधन की कम खपत भी करते हैं।
सीएनजी इस लिहाज से विश्वभर में प्रमाणशुदा ईंधन है जो कार्बन उत्सर्जन में शून्य प्रतिशत योगदान के लिए जाना जाता है और यही वजह है कि लोग हरे-भरे पर्यावरण के लिए अपना योगदान करने को उत्सुक भी हैं। इसी दिशा में पहल करते हुए फोर्टिस एस्काॅटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने अपने कर्मचारियों को उनकेे मौजूदा वाहनों को सीएनजी आधारित करने के लिए वित्तीय सहायता और ब्याज रहित ऋण देने की घोशणा की है जिससे उनकी वित्तीय अड़चनें दूर होंगी और वे इस पर्यावरण अनुकूल प्रयास में अपना योगदान कर सकेंगे।
सस्टेनेबल माॅडल पर विचार मंथन के बाद डाॅ अषोक सेठ, चेयरमैन, फोर्टिस एस्काॅटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने कहा, ’’हमें अपने क्षितिज से आगे देखना होगा और आने वाली पीढि़यों के लिए अधिक स्वच्छ पर्यावरण विकल्प के बारे में विचार करना होगा। अगर हर संगठन इसी प्रकार सोच-विचार करने लगे तो हम इस संसार में हरेक के लिए रोल माॅडल साबित हो सकते हैं। एफईएचआई की यह पहल सिर्फ अगले 15 दिनों के लिए ही नहीं है बल्कि हमने दीर्घकालिक रणनीति के तौर पर इसे अपनाया है ताकि हम लंबे समय तक पर्यावरण के संरक्षण में अपना योगदान कर सकें।‘‘
एफईएचआई के लिए इस माॅडल को तैयार करने वाले डाॅ सोमेष मित्तल, ज़ोनल डायरेक्टर, फोर्टिस एस्काॅटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने कहा, ’’दिल्ली को हरा-भरा बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिषा में कदम उठाने का यह सबसे उपयुक्त समय है। एफईएचआई में हम अपने स्तर पर छोटे प्रयास कर रहे हैं लेकिन हमें यकीन है कि ये दिल्ली को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। हमारी और भी कई योजनाएं हैं और हम जिस हवा में सांस लेते हैं उसे अधिक स्वच्छ बनाने के लिए उन्हें लागू करेंगे।‘‘
इस पूरे प्रयास को और फायदेमंद बनाने के लिए फोर्टिस एस्काॅटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने ’’लास्ट माइल कनेक्टिविटी‘‘ सुनिष्चित करने की भी घोशणा की है जिसके तहत् अस्पताल से नज़दीकी मैट्रो स्टेषन के लिए वाहनों को चलाया जाएगा, लोगों को वाहनों को षेयर करने के लिए प्रेरित किया जाएगा और पर्यावरण की सुरक्षा की खातिर गैस, प्रदूशण तथा सड़कों पर कारों की संख्या में कमी लाने की कोषिष की जाएगी। कर्मचारियों को लाने-छोड़ने के लिए विभिन्न मार्गों पर सीएनजी बसों का भी इंतज़ाम किया जाएगा।
दिल्ली में इस प्रयोग के चलते षुरू में अभूतपूर्व भीड़-भाड़ हो सकती है और ऐसे में राजधानी के सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा लेकिन ऐसे वक्त में हम एकजुट होकर दिल्ली को प्रदूशण मुक्त बनाने के एक व्यापक लक्ष्य को संभव बनाने के लिए काम कर सकते हैं।

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