लंदन, 10 जनवरी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतिम दिनों के बारे में प्रत्यक्षदर्शियों एवं खुफिया सूत्रों का हवाला देते हुए ब्रिटेन स्थित एक वेबसाइट ने यह दावा किया है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुए विमान हादसे में नेताजी बुरी तरह जल गये थे और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नेताजी की मौत के रहस्य से पर्दा हटाने के लिए भारत सरकार ने 1956 में इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के मेजर जनरल शाहनवाज खान की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। नेताजी के संबंधी द्वारा संचालित इस वेबसाइट ने विमान हादसे के चश्मदीद गवाहों से की गयी समिति की पूछताछ का ब्योरा आज प्रकाशित किया है। वेबसाइट में बताया गया है कि हादसे के शिकार हुए जापानी वायु सेना के बमवर्षक विमान में नेताजी और चालक दल के सदस्यों सहित 12 से 13 लोग सवार थे। विमान ने वियतनाम के तौरेन से 18 अगस्त 1945 की सुबह उड़ान भरी। इस विमान में जापानी सेना के लेफ्टीनेंट जनरल सुनामासा शेदी भी सवार थे। विमान को हेतो, ताइपेई, दायरेन से होते हुए टोक्यो जाना था ।
हवाईअड्डे के रखरखाव के लिए जिम्मेदार ग्राउंड इंजीनियर कैप्टन नाकमुरा उर्फ योमामोता ने बताया कि पायलट और इंजीनियरों ने विमान के इंजन को एकदम सही बताया था लेकिन जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, उन्होंने विमान को बांयी तरफ झुका देखा और कुछ विमान से गिरता दिखायी दिया। उन्होंने बाद में पाया कि विमान से प्रोपलर गिरा था। उनके अनुसारी विमान मात्र 30 से 40 मीटर की ऊंचाई पर था और यह हादसा रनवे से लगभग 100 मीटर की दूरी पर हो गया। हादसे के बाद विमान के अगले हिस्से में तत्काल आग लग गयी। नेताजी के साथ विमान में सवार कर्नल हबीब उर रहमान के अनुसार उन्होंने उड़ान भरने के तुरंत बाद तोप का गोला दागने जैसी बेहद तेज धमाके के आवाज सुनी थी।

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