आलेख : “क्या हिन्दुओं की भावना भावना नही होती” - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 10 जनवरी 2016

आलेख : “क्या हिन्दुओं की भावना भावना नही होती”

यस्य नास्ति स्वयंप्रज्ञा शास्त्रम् तस्य करोति किम | 
लोचनाभ्याम विहीनस्य दर्पण तस्य करोति किम|| 

संस्कृत का यह सुभाषित भारत में तथाकथित सेकुलर गिरोहों के सरगनाओ और ममता-माया, नितीश-लालू ,मुलायम-केजरीवाल जैसे स्वयम्भू नेताओं पर चरितार्थ होती है.वोटो के इन गिद्दो ने देश के हिन्दुओं की लाशो को नोच नोच अपनी सत्ता को कायम की है. भारत की राजनीति में ये सेकुलर रोग से पीड़ित गिरोह इतने निचे गिरेंगे की वोटो के लिए देश की संप्रभुता को भी ये बेचने में नही शर्मा रहे. इस गिरोहों के करतूतों से जयचंद की आत्मा मुस्कुरा रही होगी? भारत आजादी से पूर्व मुगलों और विदेशियो के आक्रमणों से त्रस्त था तो आजादी के बाद नेहरूवियन सेकुलर जिनकी उपज मार्क्स-मैकाले-मुल्ला की तिकड़ी गर्भ से हुई है से त्रस्त है.

कुछ दिन पहले विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संघठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रचारक परमपरा पर अभद्र टिप्पणी उत्तरप्रदेश के एक वर्तमान मंत्री ने की थी उसी के ज़वाब में कोई कमलेश तिवारी नामक व्यक्ति ने मुसलमानों के पैगम्बर के बारे में भी वही उत्तर दिया. एक ऐसा मुस्लिम देशद्रोही जिसने भारत माता को डायन कहा हो किन्तु हिन्दू परम्परा को शर्मसार करने बाले उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी की सरकार वोटों और मुसलमानों के डर से इस घटिया मुसलमान को जेल में डालने के बजाय उसे मंत्री पद से सुशोभित कर देश की संविधान को कुचला और उसी उत्तर प्रदेश की मुस्लिम भक्त सरकार ने कमलेश तिवारी को रासुका के तहत जेल में बंद कर रखा ?

अभी हाल में रांची से प्रकाशित फारुकी तंजीम नामक अखबार ने 15 सितम्बर 2015 के सम्पादकीय में हिन्दुओ के आराध्य श्रीराम के बारे में जो लिखा वह अगर किसी हिन्दू के द्वरा मुस्लिम मत के पैगम्बर के बारे में लिखा गया होता तो देश में खून की नदिया बह रही होती, हिन्दुओ की बहु-बेटियां बलात्कार और उसे ज़बरदस्ती इस्लाम में मतांतरित किया गया होता, हिन्दुओं के सैकड़ो मठ मंदिर इस्लामी आतातियो के हाथो तोड़े लुटे जाते किन्तु हिन्दुओ के आराध्य के बारे में में लिखा गया इसलिए इस भारत की भूमि पर कुछ नही हो सकता, क्योंकि हिन्दुओ का कोई अधिकार नही की वो अपने ऊपर किये अत्याचारों का विरोध करे? तभी तो काफी मशक्कत के बाद रांची सदर के हिन्दपीढ़ी थाना काण्ड संख्या 06/15 (22/09/15) में किसी तरह से FIR दर्ज की जा सकी और अबतक उस देशद्रोही अखबार के सम्पादक और मालिक पर कोई कारवाई तो नही उलटे लाखो रूपये का विज्ञापन झारखंड सरकार उसे दे रही है ताकि इसी तरह वो हिन्दूयों का मानमर्दन करता रहे ?आखिर ऐसा दोहरा मानदंड क्यों ?क्या हिन्दुओं को भी न्याय पाने के लिए, अपनी स्मिता बचाने के लिए, देश के सेकुलर नेता हिंसक बनाने पर नही तुले हुए हैं?

अभी तिवारी के वयान जिस पर मुस्लिमो से डरी-सहमी उत्तरप्रदेश की सरकार ने उसे कब का जेल में बंद कर रखी है फिर भी देश के अनेक भागो में उपद्रवी मुसलमानों ने जो माहौल बना रखा वह देश की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है .इस देश में शान्ति एकता और अखंडता के लिए कब तक हिन्दू अपने सर को शुतुरमुर्ग की तरह बालू में गाड़ता रहेगा और जब आंधी हटेगी तो भारत का भूभाग कटा मिलेगा? 

मालदा या पूर्णिया में हिन्दुओ के साथ जो हुआ उस समाचार पर क्या देश के नेताओं और विके मीडिया ने न्याय किया?अभी कुछ दिन पूर्व दादरी की एक छोटी घटना पर इस देश के तथाकथित सेकुलरो बुधिजीविओ और मिडिया के लोगो ने जिस तरह की हाय तौब्बा मचाई, विश्व के पटल पर भारत की वैसी छवि निर्मित करने की नापाक कोशिश की जो थी नही, वे सब आज आतंकी मुसलमानों के द्वारा किये जा रहे घृणित घटनाओं पर मौन क्यों है? कहाँ है वह गिरोह जिसने अख़लाक़ के नाम पर देश में असहिष्णुता की स्यापा कर अपने पुरस्कार वापस करते अपनी संवेदनशीलता को दर्शाया था आज उसकी संवेदनशीलता क्या आतंकी औरंगजेब, याकूब या कसाब के साथ उसके कब्रों में दफनाया हुआ है?

हर कोई को अपना मत प्यारा होता है किसी को किसी की भावना से खेलने का अधिकार नही होना चाहिए. जब हिन्दू मान विन्दुओ पे कोई आक्षेप या टिप्पणी करता है तब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हिन्दू देवी देवताओं का नग्न चित्र बनाता है तो कला की मार्मिकता कह सही ठहराने की कुचेष्टा की ज़ाती है और जब ऐसी आक्षेप मुस्लिम मत पर लगता है तो भावनाओ की आहत होना बताया जाता है ऐसा दोहरा चरित्र क्यों?अगर मुसलमानों को संवेदनशील भावना है तो हिन्दुओं की भी भावना उतनी ही सवेदनशील होती है और जो लोग दोनों की भावनाओं को अलग-अलग चश्मे से देख रहे है वे लोग इस देश के लिए विषधर से भी ज़्यादा घातक हैं.ऐसे विषधर ही इस देश की संविधान के लिए घातक और देश के लिए गद्दार विध्वंसक है.पश्चिम बंगाल,केरल, असम ,उत्तरप्रदेश, बिहार, कर्नाटक, झारखण्ड,जैसे राज्यों में मुस्लिम तुष्टिकरण की जो खेल खेला जा रहा है वह भारत की एकता और अखंडता के लिए घातक है.






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---संजय कुमार आज़ाद---
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