तत्कालीन पीएसआई को कठोर आजीवन कारावास
- युवा छात्र नेता शिरोमणि चर्चित हत्याकांड में अदालत ने सुनाया फैसला
छतरपुर। कांग्रेस की युवा छात्र नेता की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश भारत भूषण श्रीवास्तव की अदालत ने हत्या करने के आरोप में तत्कालीन पीएसआई को दोषी करार दिया। आरोपी को अदालत ने कठोर आजीवन कारावास के साथ 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। एडवोकेट लखन राजपूत न बताया कि स्थानीय पन्ना नाका निवासी रिटायर्ड शिक्षिका चंदा परमार नेे थाना सिविल लाइन में शिकायत की। 20 फरवरी 2014 को उसके पति अजय भूषण परमार बाजार गए थे। चंदा परमार के दूर का रिश्तेदार रविन्द्र उर्फ रावेन्द्र सिंह बुंदेला निवासी मझगवां जिला पन्ना दो दिनों से चंदा के घर पर ठहरा हुआ था। चंदा ने अपनी पुत्री शिरोमणि की सादी रावेन्द्र सिंह से करने के लिए दो साल पहले बात की थी। बाद में शिरोमणि ने रावेन्द्र से सादी करने को मना कर दिया था। रावेन्द्र सिंह बार-बार शिरोमणि से सादी करने को कह रहा था। दिन को करीब 13.45 बजे जब चंदा परमार बाथरुम में थी। और शिरोमणि कमरे में बैठी पढ़ाई कर रही थी। रावेन्द्र सिंह भी वही पर बैठा था। अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। चंदा ने आकर देखा तो बेटी शिरोमणि जमीन में पड़ी थी। उसके सिर से खून निकल रहा था। रावेन्द्र सिंह हाथ में पिस्टल लेकर घर से बाहर की ओर भाग रहा था। चंदा परमार ने चिल्लाया तो घर के बाहर बैठे रणवीर पटैरिया, अरविंद परिहार और मुहल्ले के लोगों ने रावेन्द्र को पिस्टल लेकर भागते देखा। शिरोमणि को आनन फानन में जिला अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टर ने शिरोमणि को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करके रावेन्द्र को गिरफ्तार किया। पुलिस ने रावेन्द्र से सरकारी पिस्टल 6 जिंदा कारतूस सहित मेगजीन और घटना स्थल से कारतूस का खाली खोखा बरामद किया।
प्रयोगशाला में हुआ मिलान
पुलिस ने मौके से जब्त खाली खोखा को और गोली चलाने के बाद रावेन्द्र के हाथो में लगे गन पाउडर को फिल्टर पेपर मे लेकर जांच करने के लिए राज्य विज्ञान प्रयोगशाला सागर भेजा। मौके से जब्त खाली खोखा सरकारी पिस्टल से चलना और पिस्टल एवं रावेन्द्र के हाथो में लगे गन पाउडर का मिलान प्रयोगशाला में सिद्ध हुआ। एसपी ललित शाक्यवार ने इस निर्मम हत्या के मामले को वर्ष 2014 के जघन्य एवं सनसनी खेज मामलों में सामिल किया।
पिस्टल, कारतूस को थाने में नही किया जमा
आरोपी रविन्द्र उर्फ रावेन्द्र सिंह जिला ग्वालियर के इंदरगंज थाना में पीएसआई के पद पर पदस्थ था। उसे डियूटी के दौरान एक सरकारी पिस्टल और कारतूसो से लैस मैगजीन दी गई थी। रावेन्द्र ने छतरपुर आने के पहले थाना इंदरगंज में सरकारी पिस्टल ओर कारतूसों को जमा नही किया। रावेन्द्र ने इसी सरकारी पिस्टल से शिरोमणि की गोली मार कर हत्या कर दी।
16 गवाहो का हुआ परीक्षण
अभियोजन की ओर से एजीपी ऋषि प्रकाश बिरथरे और अरुणदेव खरे ने 16 गवाहो की साक्ष्य कराकर अदालत के सामने सबूत पेश कर दलीले रखी। विशेष न्यायाधीश भारत भूषण श्रीवास्तव की अदालत ने मंगलवार को इस मामले की अंतिम सुनवाई की। न्यायाधीश श्री श्रीवास्तव की अदालत ने तत्कालीन पीएसआई आरोपी रावेन्द्र सिंह को शिरोमणि की निर्मम हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया।
अदालत ने दिया अपना निश्कर्ष-
अदालत ने फैसला सुनाते समय कहा कि मृतिका शिरोमणि अत्यंत होनहार और मैधावी छात्रा थी जे एलएलबी की अंतिम वर्ष की परीक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। वह अपने माता पिता की एक मात्र संतान थी और अपने बृद्ध माता पिता का सहारा बनती। मृतिका का स्वर्णिम भविष्य भी उसके साथ था। कानून की कोई भी प्रक्रिय शिरोमणि को वापिस नही ला सकती। अदालत ने सजा सुनाते समय शायराना अंदाज में कहा कि यूं तो कोई इंसान इतना बुरा नही होता, पर अदालत उसे सजा न देकर बुरा बनाती है।
विशेष न्यायाधीश भारत भूषण श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाई सजा
विशेष न्यायाधीश भारत भूषण श्रीवास्वत की अदालत ने आरोपी पीएसआई रावेन्द्र सिंह को शिरोमणि की हत्या करने का दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 302 में उम्रकैद के साथ 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
मॉ-बाप की एक लौती संतान थी
शिरोमणि अपने माता-पिता की अकेली संतान थी। अदालत के फैसला होने के बाद जब शिरोमणि के पिता अजय भूषण से बात की गई तो उनकी आंखो में आंसू आ गए। अजय ने बताया कि शिरोमणि ही उनके जीना का एक सहारा थी। वह होनहार छात्रा थी। बेटी के हत्यारे रावेन्द्र सिंह को अदालत ने सजा देकर उनके साथ न्याय किया है।
मृतिका की मॉ ने दस लाख रुपये मांगा प्रतिकर
मृतिका शिरोमणि की मॉ श्रीमती चंदा परमार ने फैसले के दौरान दस लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि मांगी। अदालत ने मध्य प्रदेश अपराध पीडि़त प्रतिकर योजना 2015 के तहत इस मामले में प्रतिकर दिलाए जाने हेतु उचित माना। अदालत ने फैसले की एक प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजकर निर्देशित किया है कि यदि चंदा परमार जांच के बाद प्रतिकर पाने की पात्र पाई जाती है तो उसे प्रतिकर राशि दिलाई जावें। अदालत ने फैसले की एक प्रति कलेक्टर छतरपुर को उचित एवं आवश्यक कार्यवाही करने हेतु भी भेजी है।
डी.डी.तिवारी जबलपुर स्मार्ट सिटी कार्यसमिति के सदस्य मनोनीत
छतरपुर -नगरपालिका छतरपुर के पूर्व मुख्य नगरपालिका अधिकारी तथा राष्ट्रीय चेतना एवं विकास मंच के सचिव, सामाजिक कार्यकर्ता डी.डी.तिवारी को जबलपुर नगरनिगम की महापौर डां. श्रीमती स्वाति सदानंद गोडवोले ने स्मार्ट सिटी जबलपुर कार्यसमिति का सदस्य मनोनीत किया है तथा नगरनिगम के अतिरिक्त कमिष्नर आर.के. शर्मा को स्मार्ट सिटी की आगामी बैठको में श्री तिवारी को आमंत्रित करने के निर्देष दिए हैं नगरनिगम के कमिष्नर श्री वेदप्रकाष ने श्री तिवारी को जबलपुर स्मार्ट सिटी बनाने के लिये भेजे गये सुझाव के आधार पर नगरनिगम की ओर से प्रथम पुरूस्कार प्राप्त करने के लिये बधाई दी एवं जबलपुर स्मार्ट सिटी की योजनाओं को क्रियान्वित कराने के लिये भागीदारी निभाने हेतु आमंत्रण दिया इस अवसर पर श्री तिवारी के साथ राष्ट्रीय चेतना एवं विकास मंच के कार्यालय सचिव,शंकर सोनी ,उपायुक्त राकेश अयाची अतिरिक्त कमिश्नर आर;के ; शर्मा भी उपस्थित थे, जबलपुर स्मार्ट सिटी की कार्यसमिति के सदस्य मनोनीत होने पर राष्ट्रीय चेतना एवं विकास मंच के अध्यक्ष, बी.आर.शुक्ला, बी.एल. मिश्रा, हरवंष शर्मा,भगवानसिंह परमार, आर.के.मिश्रा, राकेष शर्मा, शंकर सोनी, अनीता अग्रवाल, साधना-भगवत अग्रवाल, बालमुकुंद पौराणिक,बसंत शर्मा आदि ने बधाई दी एवं प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि छतरपुर के लिये यह गौरव का विषय है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें