नयी दिल्ली, 06 मार्च , तेजी से बढ़ते शहरीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन आर्थिक संसाधनों का असमान वितरण और इन सबके बीच कानून व्यवस्था को संभालने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बलों की अनुपलब्धता के कारण दिल्ली समेत पूरे देश में बढ़ती अपराध की घटनाओं का सबसे ज्यादा दंश महिलाएं झेल रही हैं । राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2012 से लेकर 2014 के बीच भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की कुल संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गयी है । इन आंकड़ों के अनुसार 2012 में जहां ऐसे कुल 23 लाख 87 हजार 188 मामले पुलिस में दर्ज हुए वहीं 2013 में यह बढ़कर 26 लाख 47 हजार 722 पर पहुंच गई। 2014 तक इनकी संख्या 28 लाख 51 हजार 563 पर पहुंच गयी । इन अपराधों में बलात्कार के प्रयास से जुड़े मामलों में सबसे ज्यादा तेजी देखी गयी । वर्ष 2012 में जहां ऐसे 45 हजार 351 मामले दर्ज हुए वहीं दूसरे साल 2013 में इनकी संख्या बढ़कर 70 हजार 739 हो गयी और 2014 में यह आंकड़ा 82 हजार 235 पर जा पहुंचा । दुष्कर्म के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी होती रही । वर्ष 2012 में ऐसे कुल 24 हजार 923 मामले पुलिस में दर्ज किए गये । अगले साल इनकी संख्या बढ़कर 33 हजार 707 हो गयी और 2014 में यह आंकड़ा 36 हजार 735 के स्तर पर आ गया ।
इस दौरान पति और परिजनों द्वारा महिलाओं पर घरेलू हिंसा के मामले भी बढ़े । पुलिस में 2012 में ऐसे कुल 106527 मामले दर्ज किये जबकि 2013 में इनकी संख्या बढ़कर 118866 हो गयी थी और 2014 में यह आंकड़ा 122877 पर पहुंच गया था । हालांकि दहेज हत्या के मामलों में मिश्रित रुख रहा । साल 2012 में दहेज हत्या के 8233 मामले दर्ज हुए जबकि अगले साल यह घटकर 8083 पर आ गये लेकिन 2014 में इनमें फिर से तेजी आई और यह 8455 पर पहुंच गये । अन्य अपराधों में सबसे ज्यादा मामले चोरी से जुड़ी घटनाओं के रहे। इनमें 2012 से 2014 के बीच कुल 103508 की वृद्धि दर्ज हुई। इस अवधि में हत्या के प्रयास से जुड़ी घटनाएं भी बढ़ीं। जहां 2012 में ऐसे 35138 मामले दर्ज किए गए वहीं अगले साल यह बढ़कर 35417 पर और 2014 में 41791 हो गई। दूसरी ओर हत्या जैसे अपराध में गिरावट देखी गई। साल 2012 से साल 2014 के बीच ऐसे अपराध में 453 की कमी आई।
कानून व्यवस्था चाक चौंबद बनाए रखने के पुलिस के बड़े दावों के बीच इस दौरान अपहरण की घटनाएं लगातार बढ़ती रहीं। पुलिस में 2012 में ऐसे कुल 47592 मामले दर्ज हुए। अगले साल 2013 में इनकी संख्या 65461 हो गई और 2014 में ऐसे कुल 77237 मामले पुलिस में दर्ज हुए। सख्त कानून और सरकार की ओर से दलितों के संरक्षण के लिए कई योजनाएं लाने के बावजूद दलिताें के खिलाफ अपराध का ग्राफ भी बढ़ता दिखाई दिया। पुलिस में 2012 में दलिताें के खिलाफ अत्याचार के कुल 33593 मामले दर्ज किए गए । अगले साल इनकी संख्या 39346 पर पहुंच गई और 2014 में यह आंकड़ा 40300 पर जा पहुंचा। अपराध के राज्यवार आंकडों के अनुसार 2012 से लेकर 2014 के बीच सबसे ज्यादा 220335 मामले मध्यप्रदेश में दर्ज हुए। दूसरा नबंर उत्तर प्रदेश का रहा जहां इस अवधि में कुल 198093 मामले दर्ज हुए। तीसरे स्थान पर राजस्थान रहा । यहां इस अवधि में कुल 170948 मामल दर्ज किए गए।

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