नयी दिल्ली, 15 मार्च , सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलौत ने आज साफ किया कि हिंदू धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपना चुके दलित समुदाय के लोगों को अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं दिया जाएगा। श्री गहलौत ने संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक 2016 पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हिंदू धर्म छोड़कर जाने वाले दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने पर 1948, 1952 और 1956 में भी चर्चा हुई थी और हर बार तत्कालीन सरकारों ने यही फैसला किया कि उन्हें यह दर्जा नहीं मिलेगा। यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी गया था और उसकी भी यही राय थी।
उन्होंने कहा कि सरकार का मत है कि हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे धर्म अपनाने वाले लोगों के सामने छुआछूत का सामना नहीं करना पड़ता है इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। वर्ष 1948 में जातियों को उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर अनुसूचित जाति की सूची में रखा गया था। श्री गहलौत के जवाब के बाद सदन ने छत्तीसगढ़, हरियाणा, केरल, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की कुछ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने तथा कुछ में अधिसूचित क्षेत्र बढ़ाने के प्रावधान वाले विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

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