नयी दिल्ली, 25 अप्रैल, श्रम मंत्रालय तथा कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) संगठन की 8.8 प्रतिशत ब्याज देने की सिफारिश को दरकिनार करते हुये वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ पर 8.7 प्रतिशत ब्याज की ही मंजूरी दी है। श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वित्त मंत्रालय ने भविष्य निधि पर 8.7 प्रतिशत ब्याज देने का अनुमाेदन किया है, जबकि 16 फरवरी को चेन्नई में संपन्न ईपीएफओ के केन्द्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में वर्ष 2015-16 के लिए 8.8 प्रतिशत ब्याज दिये जाने का अंतरिम फैसला हुआ था। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने ईपीएफ की जमा राशि पर ब्याज दर में कमी करने के खिलाफ 27 अप्रैल को विरोध-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। बीएमएस के महासचिव बृजेश उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 2015-16 के लिए सरकार ने भविष्य निधि पर ब्याज दर 8.7 प्रतिशत मंजूर की है, जबकि केंद्रीय न्यासी बोर्ड 8.8 प्रतिशत की सिफारिश की थी। इसके विरोध में बीएमएस देशभर में सभी भविष्य निधि कार्यालयों के सामने प्रदर्शन करेगा। केन्द्रीय न्यासी बोर्ड की 16 फरवरी को चेन्नई में सम्पन्न बैठक में वर्ष 2015-16 के लिए 8.8 प्रतिशत ब्याज दिये जाने का अंतरिम फैसला हुआ था। हालांकि, बोर्ड के सदस्यों ने 8.95 प्रतिशत ब्याज दर करने का प्रस्ताव किया था। उन्होंने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को सितंबर 2015 तक जमा अंशदान के आधार पर 8.95 प्रतिशत ब्याज देने के बाद भी लगभग 91 करोड़ रुपये की बचत होती थी। पिछले वर्ष भविष्य निधि पर ब्याज दर 8.5 प्रतिशत रही थी। श्री उपाध्याय ने कहा कि ई.पी.एफ. खाताधारकों को दिये जाने वाले ब्याज में सरकारी खजाने का कोई योगदान नहीं हैं। केन्द्रीय न्यासी बोर्ड नियोक्ता और कर्मचारी से प्राप्त अंशदान को विभिन्न बचत योजनाओं में निवेश करता है एवं उससे प्राप्त होने वाली आय के आधार पर सदस्यों को उनकी जमा राशि पर ब्याज देता है। उन्होंने कहा कि भविष्य निधि पर ब्याज दर 8.7 प्रतिशत करना न्यासी बोर्ड की अवमानना है, एवं गरीब मजदूरों के साथ अन्याय है।
सोमवार, 25 अप्रैल 2016
भविष्य निधि पर 8.7 प्रतिशत ही मिलेगा ब्याज
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