ब्रासीलिया 18 अप्रैल, लातिन अमेरिकी देश ब्राजील की संसद के निचले सदन ने देश की पहली महिला राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ को करारा झटका देते हुए उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के पक्ष में मतदान किया। अब इस मामले पर अंतिम निर्णय सीनेट को लेना है। महाभियोग प्रस्ताव पर निचले सदन में दो तिहाई के बहुमत की जरूरत थी यानी 513 सदस्यों वाले सदन में से 342 सदस्यों को प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करना था । लगभग पांच घंटे तक चले मतदान के बाद जैसे ही महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में बहुमत के लिए सबसे जरूरी 342वां वोट जैसे ही कंजर्वेटीव ब्राजीलियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के ब्रुनो अराउजो ने डाला , वैसे ही पूरे सदन में खुशी की लहर दौड़ गयी। श्रीमती रूसेफ के समर्थकों ने इसका जमकर विरोध किया, जिससे सदन में तनातनी का माहौल व्याप्त हो गया। निचले सदन में महाभियोग के समर्थन में 367 वोट और विरोध में मात्र 137 वोट डाले गये जबकि सात सदस्य अनुपस्थित रहे आैर दो ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
निचले सदन में इस प्रस्ताव को मिली मंजूरी के बाद अब 81 सदस्यीय संसद के ऊपरी सदन सीनेट में यह मामला भेजा जायेगा जहां साधारण बहुमत से पारित कर दिये जाने के बाद राष्ट्रपति के विरुद्ध तुरंत मुकदमा शुरू कर दिया जायेगा और उन्हें छह महीने के लिए राष्ट्रपति के पद से निलम्बित कर दिया जायेगा। उनके निलम्बन के बाद उपराष्ट्रपति माइक टेमर को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया जायेगा। सीनेट में इस प्रस्ताव को लेकर मई में मतदान होना है। 1992 के बाद यह पहला अवसर होगा जब किसी राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग चलाया जा रहा है । वर्ष 1992 में तत्कालीन राष्ट्रपति फर्नान्डो क्वाल्ट डि मेलो को भ्रष्टाचार के आरोप के कारण कई विरोध का सामना करना पड़ा था और उन्होंने महाभियोग प्रस्ताव के लिए होने वाले मतदान से ठीक पहले पद से इस्तीफा दे दिया था। 68 वर्षीय राष्ट्रपति रूसेफ के विरुद्ध 2014 के अपने चुनाव के लिये वित्तीय कानूनों के उल्लंघन का अारोप है किन्तु उन्होंने अपने विरूद्ध लगाये जा रहे आरोपों से इनकार किया है। उन पर आरोप है कि बजट के घाटे को छुपाने के लिए उन्होंने बैंकों के रिण का इस्तेमाल किया।

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