पटना 05 अप्रैल, बिहार में एक अप्रैल से देसी शराब पर लगी रोक को मिल रहे जनसमर्थन से खुश नीतीश सरकार ने आज से ही विदेशी शराब के भी बेचने, रखने और पीने पर प्रतिबंध लगा दिया । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में पूर्ण शराबबंदी को तत्काल प्रभाव से लागू करने के फैसले को स्वीकृति दी गयी । सरकार के इस फैसले के बाद अब बिहार, गुजरात, नगालैंड और मिजोरम के बाद देश का चौथा ..ड्राई स्टेट.. बन गया है । मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने खुद इस संबंध में संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी और बताया कि पूरे राज्य में शराब के थोक एवं खुदरा व्यापार अथवा उपभोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है । श्री कुमार ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी के बाद अब राज्य के सभी छोटे-बड़े होटलों , रेस्तरां , क्लबों और बार में तत्काल प्रभाव से शराब की बिक्री और शराब पीने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है । उन्होंने बताया कि राज्य में विदेशी शराब बनाने के कारखानों पर प्रतिबंध नहीं है सिर्फ इसकी बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा । हालांकि सेना का कैंटिन इस प्रतिबंध से मुक्त रहेगा ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अप्रैल से देसी शराब की बिक्री पर लगी रोक को अपार जनसमर्थन मिला और इसी दौरान कई सामाजिक संगठनों तथा महिला समूहों ने शहरी क्षेत्रों में विदेशी शराब पर भी रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शराब के खिलाफ मुहिम को उनकी परिकल्पना से भी कहीं अधिक जनसमर्थन प्राप्त हुआ जिसके मद्देनजर सरकार ने जनभावना का सम्मान करते हुए सम्पूर्ण राज्य में मद्य निषेध के अपने संकल्प को पूरा किया । श्री कुमार ने ताड़ी (पाम ट्री से निकला रस जो किण्वन के बाद बना मादक पेय) की बिक्री के सम्बंध में स्पष्ट किया कि राज्य में इसकी बिक्री पर वर्ष 1991 से ही रोक लगी हुयी है। मद्य निषेध विभाग की एक अप्रैल 1991 की जारी अधिसूचना के अनुसार नियम 47 के तहत ताड़ी की दुकानें हाट , बाजार के प्रवेश स्थल, शहरी क्षेत्रों में अस्पतालों , शैक्षणिक संस्थानों, स्टेशन , बस पड़ाव , उच्च पथों , धार्मिक स्थानों, पेट्रोल पंपों और अनुसूचित जाति अथवा मजदूर कॉलोनियों के निकट 50 मीटर के दायरे में तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हीं स्थानों पर 100 मीटर के दायरे में और किसी गांव में आबादी वाले क्षेत्रों में नहीं खोली जा सकती है । मुख्यमंत्री ने कहा कि सूर्योदय से पहले ताड़ से निकले रस को नीरा कहा जाता है जो गुणकारी है लेकिन सूर्य की किरण पड़ने के बाद उसमें मादक गुण आ जाता है । उन्होंने कहा कि तमिलनाडू कृषि विश्वविद्यालय ने ताड़ के उत्पादों पर शोध किया है और उसके सहयोग से बिहार में भी नीरा और ताड़ के अन्य उत्पादों की बिक्री के लिए योजना बनायी जायेगी ।
श्री कुमार ने कहा कि ताड़ में कई ऐसे गुण है जो लाभकारी हैं । इसलिए सरकार काम्फेड की तर्ज पर ताड़ी के कारोबार से जुड़े लोगों का यूनियन और फेडरेशन बनाया जायेगा और इसकी एक विस्तृत योजना तैयार की जायेगी । उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी गयी है जिसका नोडल विभाग उद्योग विभाग होगा । मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ताड़ के वृक्ष से छह हजार रुपये से ज्यादा आमदनी हो सकती है । सरकार ताड़ उत्पाद के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेगी । इससे लोगों को सम्मानजनक रोजगार भी मिल सकेगा । उन्होंने कहा कि नीरा को संस्थागत रुप दिया जायेगा और इसके लिए प्रशिक्षण और विपणन की व्यवस्था की जायेगी । श्री कुमार ने कहा कि शराबबंदी को लेकर बिहार देश के लिए एक उदाहरण बनेगा । राज्य में सामाजिक परिवर्तन की नई बुनियाद पड़ी है । उन्होंने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध से राजस्व की होने वाली क्षति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस निर्णय को वह राजस्व क्षति के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक लाभ के रूप में देखते हैं । अब तक जो पैसा शराब पर खर्च हो रहा था लोग अब उसका इस्तेमाल स्वास्थ्य , शिक्षा और पोषण पर करेंगे । जहां तक राजस्व क्षति का सवाल है उसकी भरपायी अन्य करों से हो सकती है । उनकी सरकार को वैसी आमदनी नहीं चाहिए, जिससे लोगों को जीवन की कीमत चुकानी पड़े । उन्होंने कहा कि शराब पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर नई उत्पाद नीति के तहत कड़ी कार्रवाई की जायेगी ।

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