नोएडा, 05 अप्रैल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि गरीबों को विकास यात्रा में भागीदार बनाये बिना देश का चहुंमुखी विकास नहीं हो सकता और सरकार इसी मूल मंत्र को ध्यान में रखकर बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रही हैं । उन्होंने कहा कि गरीबों और दलितों का जीवन बदलने के लिए उनकी सरकार एक के बाद एक योजनाएं ला रही हैं और वह इस सोच के साथ काम कर रहे हैं कि पूरी सरकार को गरीबों के लिए स्वाहा करने से पीछे नहीं हटेंगे। श्री मोदी ने दलितों, आदिवासियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “ स्टैंड अप इंडिया ” की शुरूआत करते हुए यहां कहा कि इस कदम से इन समुदायों के लोगों के जीवन तथा समाज में बदलाव आयेगा। इससे विकास की गति बढेगी और देश का भविष्य बदल जायेगा। इससे पहले उन्होंने पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी जयंती पर यह योजना शुरू की जा रही है यह अपने आप में बहुत उत्तम कदम है।
श्री मोदी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों का नाम लिये बिना आरोप लगाया कि देश के विकास के लिए काम करने वाले श्री जगजीवन राम जैसे दलित नेताओं को इनके शासन में करीब-करीब भुला दिया गया। उन्होंने कहा कि पहले किसी भी सरकार ने उनकी जयंती पर कोई बड़ी योजना शुरू नहीं की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो और राजनीतिक दल कोई भी हो लेकिन देश के लिए मरने वाले हमेशा प्रेरणा के स्रोत होते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग जानते होंगे कि कृषि के क्षेत्र में जब देश में क्रांति हुई तो बाबू जगजीवन राम देश के कृषि मंत्री थे और यह भी कम ही लोगों को पता है कि 1971 की लड़ाई के दौरान वह ही देश के रक्षा मंत्री भी थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि दलित और आदिवासी भी राष्ट्र के निर्माण में सबके बराबर योगदान दे सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें बराबर के अवसर भी देने होंगे। इससे पहले उन्हें इस तरह के अवसर नहीं मिले हैं और अब यह सरकार उन्हें ये अवसर दे रही है। उन्हाेंने दलितों, आदिवासियों और महिलाओं का आह्वान किया कि वे आगे आयें और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर अात्म निर्भर बनने के साथ साथ देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि नौजवान कब तक नौकरियों का इंतजार करेंगे और सरकार भी कितने लोगों को नौकरी दे पायेगी। नौजवानों को अपने हुनर और सामर्थ्य के जरिये नौकरी मांगने की बजाय नौकरी देने की भूमिका में आना होगा। इससे वह किसी की दया पर निर्भर नहीं रहेंगे तथा साथ ही देश का भी विकास होगा।
श्री मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत दलित, आदिवासी और महिलाओं को व्यवसाय और उद्योगों के लिए 10 लाख से 1 करोड रुपये तक रिण दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि देश भर में बैंकों की सवा लाख शाखाएं हैं और हर शाखा को निर्देश दिया गया है कि उसे अपने क्षेत्र में दो लोगों जिनमें एक दलित या आदिवासी हो और एक महिला को यह रिण देना होगा। इस तरह देश भर में ढाई लाख लोग अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे जिससे ये लोग खुद तो सक्षम बनेंगे ही देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनायेंगे। उन्होंने कहा कि इससे बडी संख्या में लोग कभी खत्म नहीं होने वाले कर्ज के मकडजाल से बाहर निकल सकेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंकों की सभी शाखाओं से कहा गया है कि उन्हें यह रिण अपने ही क्षेत्र में देना होगा और यह उनकी जिम्मेदारी बनती है। प्रधानमंत्री ने पिछले स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में इस योजना को शुरू करने की घोषणा की थी। जन धन योजना और मुद्रा योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनके जरिये देश के हर परिवार को बैंक से जोडने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि दशकों पहले गरीबों के नाम पर बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया लेकिन आजादी के लगभग 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी 40 फीसदी लोगों की पहुंच बैंकों तक नहीं थी। गरीबों की दरियादिली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने अब तक अमीरों की अमीरी देखी थी लेकिन गरीबों की अमीरी नहीं देखी थी। गरीबों ने इन योजनाओं में 35 हजार करोड रुपये की राशि जमा करा कर उन्हें हैरत में डाल दिया है । इसे ध्यान में रखते हुए उनकी सरकार गरीबों के उत्थान के लिए एक के बाद एक योजना शुरू कर रही है जो एक दूसरे से जुडी हैं। उन्होंने कहा कि वह इस स्वभाव से काम कर रहे हैं कि गरीबों के लिए सरकार को स्वाहा करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कौशल विकास केन्द्र का भी उद्घाटन किया और प्रधामंत्री मुद्रा योजना के तहत 5100 ई रिक्शाओं का भी वितरण किया। ये ई रिक्शा ओला एप के जरिये मोबाइल फोन से ही बुक किये जा सकेंगे। श्री मोदी ई रिक्शा में ही बैठकर कार्यक्रम के मंच तक पहुंचे। उन्होंने ई रिक्शा पाने वाले लोगों के साथ चाय पर चर्चा भी की और उनकी समस्याएं सुनने के साथ साथ उनके सुझाव भी सुने। प्रधानमंत्री ने ई रिक्शा पाने वालों से कहा कि अक्सर नेता उनसे वोट मांगने आते हैं लेकिन वह उनसे उनके बच्चों की शिक्षा की भीख मांगने आये हैं। उनका अनुरोध है कि सभी रिक्शा चालक अपने बच्चों और विशेष रूप से बेटियों को अवश्य पढायें। उनके बच्चे पढ लिखकर परिवार के साथ साथ देश को भी नयी ऊंचाई पर ले जायेंगे।

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