नयी दिल्ली, 04 अप्रैल, उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ(डीडीसीए) को फटकार लगाते हुये पूछा है कि क्या वह फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में अवैध निर्माण के लिये एक करोड़ रूपये का जुर्माना भरने को तैयार है। सर्वोच्च अदालत ने डीडीसीए से कहा है कि वह इस जुर्माने की रकम का उपयोग स्टेडियम के विकास में करेगी। अदालत ने साथ ही कहा है कि यदि स्टेडियम में बने अवैध निर्माण को ढहा दिया जाता है तो इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में आगे की सुनवाई शुक्रवार तक के लिये टाल दी है।
अदालत ने गत सोमवार डीडीसीए से कोटला में मैच कराने के लिये दक्षिण दिल्ली नगर निगम से मिले अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिये किये गये भुगतान की रसीद भी पेश करने को कहा था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने तीन मार्च को दिये आदेश में डीडीसीए की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उसने स्टेडियम के लिये नगर निगम से एनओसी मिलने के लिये अपनी 1997 की याचिका का हवाला दिया था। वर्ष 1997 में डीडीसीए ने भारतीय पुरातत्व विभाग के जून 1992 की अधिसूचना काे चुनौती दी थी जिसमें उसने कोटला बावली के 100 मीटर के दायरे में निर्माण को अवैध बताया था।

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