पटना 25 अप्रैल 2016, भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों से न केवल छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान परेशान हैं, बल्कि छोटे व्यवसायी भी इसकी मार झेल रहे हैं. उन्होंने कहा कि छोटे स्वर्ण व्यवसायी मोदी सरकार के हमले का यह निशाना बन रहे हैं. यह कैसी विडंबना है कि भाजपा खुद को व्यवसायियों की पार्टी कहती है, लेकिन उसकी नीतियां छोटे व्यवसायियों की बजाए कारपोरेटपक्षधर है. उन्होंने कहा कि भारत विश्व का 35 प्रतिशत स्वर्ण निर्यात करता है. यह देश की एक अच्छी खासी आबादी का परंपरागत पेशा है. लगभग 1.5 करोड़ परिवार इस पर निर्भर हैं. इतनी बड़ी संख्या के बावजूद सरकार के यहां निबंधित व्यवसायियों की संख्या बेहद कम है. महज 40 हजार लोग ही रजिस्टर्ड हैं. जबकि कोई 17.5 लाख दुकानें हैं. लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने इस पर एक्साइज ड्यूटी लगा दिया है. इसकी वजह से छोटे स्वर्णव्यवसायियों का पेशा बंद हो जाने के कगार पर और उनकी रोजी-रोटी समाप्त होने के कगार पर है. तनिष्क, अंजलि, पीसीचंद्रा जैसे मल्टीनेशनल कंपनियों के व्यवसाय को बढ़ावा दिए जाने के लिए छोटे व्यवसायियों का पेशा नष्ट किया जा रहा है. इसके पूर्व 9 अगस्त 1963 ई. में भी एक्साइज ड्यूटी लगायी गयी थी. 9 अगस्त को आज भी व्यवसायी काला दिन मनाते हैं. लंबे आंदेालन के बाद 1990 में यह ड्यूटी वापस की गयी. इस बीच 1300 स्वर्णकारों ने आत्महत्या कर ली. 2012 में पुनः टैक्स लगा और 22 दिन की हड़ताल हुई .सरकार को इसे वापस करना पड़ा. माले राज्य सचिव ने केंद्र सरकार से मांग की है कि एक्साइज ड्यूटी वापस करे, और स्वर्ण व्यवसायियों को लघु उद्योग का संरक्षण देना चाहिए.
प्रोन्नति में रिजर्वेशन के नियमों को लागू करे सरकार
माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि बिहार सरकार को सरकारी नौकरियांे में अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के लिए रिजर्वेशन की नीति को लागू करने के प्रति गंभीरता से विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में ठीक तरीके से लड़ना चाहिए और साथ ही नया कानून बनाकर अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारों की हिफाजत करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ के तत्वावधान में चल रहे आंदोलन का हमारी पार्टी पूरी तरह समर्थन करती है.

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