सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर (25 अप्रैल) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 25 अप्रैल 2016

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर (25 अप्रैल)

ऋणों की वसूली हेतु एक मुश्त समझौता योजना प्रारंभ

राष्ट्रीय पिछडा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम तथा राष्ट्रीय विकास वित्त एवं विकास निगम के ऋणों का वितरण पूर्व में व्यापार एवं उद्योग केंद्र के माध्यम से किया गया था जिसकी समुचित वसूली हेतु एक मुश्त समझौता योजना 2015 शुरू की गई है। इस योजना के तहत वर्ष 1998 से वर्ष 2012-13 तक के पिछडा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग के हितग्राहियों हेतु कालातीत ऋण प्रकरण में समझौता दिनांक को ऋण बकाया राशि एक मुश्त जमा करने पर अथवा 6 माह के अंतरण पर दो बराबर किश्तों मे जमा करने पर कालातीत ऋणों को ब्याज में पूर्णतः छूट दी जाएगी। यह योजना एक वर्ष के लिए लागू रहेगी। अधिक जानकारी के लिए कार्यालय पिछडा वर्ग तथा अल्प संख्यक कल्याण विभाग से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

उद्यानिकी विभाग द्वारा कृषकों से आवेदन 30 अप्रैल आमंत्रित

उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना तथा राज्य पोषित योजना अन्तर्गत वर्ष 2016-17 हेतु आम, अमरूद, नींबू व अनार की खेती के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु जिले के इच्छुक कृषकों से अनुरोघ किया है कि संबंघित वरिठ उद्यान विकास अधिकारी से सम्पर्क कर 30 अप्रैल 2016 तक आवेदन प्रस्तुत कर सकते है। योजना के तहत प्रथम आओं-प्रथम पाओं के आघार पर पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा। 

नरबाई जलाने की परंपरा को हतोत्साहित करना अनिवार्य

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मंत्रालय द्वारा नरबाई जलाने की परंपरा को हतोत्साहित करने के लिए निर्देशित किया गया है। रबी सीजन में गेहूं, बहुतायत बोया जाता है मजदूर समस्या, समय की कमी एवं सुगमता के कारण प्रदेश में हार्वेस्टर का प्रचलन बढा है। हार्वेस्टर से कटाई होने पर फसल अवशेष बडी मात्रा में खेत में शेष बचते है। कृषक सुविघा के तहत खेतो में बचे अवशेषों नरवाई में आग लगाते है, जिससे भूमि की उर्वरकता जल घारण क्षमता एवं जैव अंश नष्ट हो जाते है। ऐसी स्थिति में कृषक भाईयों को नरवाई जलाने की परंपरा से हतोत्साहित किया जाना अनिवार्य है। कृषकों से अनुरोघ किया गया है कि प्रचलित आघुनिक यंत्र जैसे स्ट्रारीपर, रीपर कमबाईडर, रोटावेटर, हेप्पी सीडर का प्रचलन अपनाये एवं नरवाई जलाने की प्रथा को समाप्त करें। साथ ही स्ट्रारीपर, रीपर कमबाईडर से फसलो की कटाई कर खेतो में बचे फसल अवशेषांे को मिट्टी में मिलाकर कम्पोस्ट खाद के रूप में उपयोग करते हुए नरवाई जलाने की प्रथा को समाप्त किया जाये। 

ग्राम उदय से भारत उदय अभियान में हुआ, 4836 महिलाओं के स्वास्थ्य का परीक्षण

sehore news
14 अपे्रल से 31 मई 2016 तक संचाािलत ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के अंतर्गत ग्राम स्तर पर महिला स्वास्थ्य षिविर आयोजित किए जाने के निर्देष राज्य शासन से प्राप्त हुए थे जिसके परिपालन में आज दिनांक तक इस अभियान के अंतर्गत 286 ग्राम स्तरीय महिला स्वास्थ्य षिविर आयोजित किए गए है। महिला चिकित्सकों के दल द्वारा जांच एवं उपचारित किए जा रहे इन षिविरों में अब तक 4836 महिलाओं के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया है।इन षिविरों में विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज कराने के लिए 920 महिलाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला चिकित्सालय के रेफर किया गया है वहीं 105 निःसंतान महिलाओं को जिला स्तर पर स्थित रौषनी क्लीनिक के लिए रेफर किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.आर.के.गुप्ता ने बताया कि ग्राम उदय से भारत उदय अभियान माननीय मुख्यमंत्रीजी के मंषानुरूप सीहोर जिले में भी संचालित किया जा रहा है। प्राप्त निर्देषों के अनुसार इस कार्यक्रम मे। ग्राम स्तर पर महिला स्वास्थ्य षिविर भी आयोजित किए जाने है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 11 अपे्रल से 20 मई तक ग्राम स्तरीय महिला स्वास्थ्य षिविरों की सूक्ष्म कार्ययोजना बनाई गई है। जिसमें समस्त आयु वर्ग के महिलाओं की निःषुल्क जांच एवं उपचार ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य षिविर लगाकर की जानी है। जिले में अब तक ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के अंतर्गत 286 महिला स्वास्थ्य षिविर आयोजित किए गए है जिसमें अब तक 4836 महिलाओं के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया है इनमें 569 किषोरी बालिकाएं भी सम्मिलित है। ग्राम स्तर महिला चिकित्सकों एवं जांच के लिए लैब की टीम ग्राम स्तर पर जाकर महिलाओं के स्वास्थ्य का परीक्षण कर रही है। डाॅ.गुप्ता ने बताया कि अब तक 1662 गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया वहीं 2605 अगर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें इलाज के लिए उचित सलाह दी गई। उन्हांेनें बताया कि ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के ंअंतर्गत आयोजित इन महिला स्वास्थ्य षिविरों में 1196 गर्भवती महिलाओं को एल्बेंडाजाॅल की टेबलेट षिविरों में उपलब्ध कराई गई वहीं 1637 महिलाओं आयरन की गोलियों दी गई।ग्राम स्तर जांच के दौरान 325 महिलाओं को विषेष उपचार के लिए ब्लाॅक स्तर पर व 196 महिलाओं को जिले स्तर पर स्थित रोषनी क्लीनिक के लिए रेफर किया गया है। जिले में विषेष उपचार एवं खून की कमी के साथ अन्य उपचार के लिए करीब 71 गर्भवती महिलाओं को जिला स्तर पर रेफर किया गया है। डाॅ.गुप्ता ने बताया कि इन षिविरों मंे 157 एनीमिया से पीडित महिलाओं का इलाज कर उचित सलाह दी गई वहीं उच्च रक्तसचाप वाली 41 महिलाओं का इलाज किया गया। जांच के दौरान इन षिेविरों में हाईरिस्क 198 महिलाएं पाई गई वहीं एनीमिया से पीडित अगर्भवती महिलाओं की संख्या 33 है। निःसंतान से संबंधित 105 महिलाओं को विषेष जांच एवं उपचार के लिए जिला स्तर पर स्थित रौषनी क्लीनिक के लिए रेफर किया गया है वहीं स्तन कैंसर के 13, बच्चे दानी मुंह का कैंसर से संबंधित दो महिलाएं व अन्य रोग से संबंधित 283 महिलाएं महिला स्वास्थ्य  षिविरों में जांच के दौरान चिन्हित की गई है। डाॅ.गूुप्ता ने बताया कि 23 मई से 31 मई 2016 तक ब्लाॅक एवं जिला स्तरीय षिविरों में विषेष कैम्प लगाकर इलाज किया जाएगा। वहीं जिला स्तर पर स्थित रौषनी क्लीनिक में सप्ताह के प्रति बुधवार को रौषनी क्लीनिक में रेफर कर इलाज किया जा रहा है। 

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